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मंगलवार, 9 जुलाई 2019

जब श्रमदान से निर्मित तालाब ने ग्रामीणों के जीवन में बदलाव का कारक बन गया

जलसंकट से जुझ रहा गांव आज पानी से लबालब  जन सहयोग से जन सरोकार की अलख जगाई है एकता परिषद ने 
श्यामपुरा गांव में पोषणबाड़ी का उद्घाटन किया गया। गांव वालों ने निर्णय लिया है कि इस वर्ष सामुदायिक पोषणबाड़ी के अलावा मछ्ली पालन का काम भी किया जायेगा। श्रमदान से जलसंकट की समस्या का समाधान ने गांव के लोगो का जीवन ही बदल दिया।
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बदरवास, 8 जुलाई ।मध्य प्रदेश के  शिवपुरी जिले का गांव श्यामपुरा आज पूरे प्रदेश में एक मिशाल बनकर रह गया है जिसने स्वयं के श्रमदान से जलसंकट को समाप्त करने में सफलता हासिल की है।आज इस गांव को देखने एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री रन सिंह परमार, उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ समाजसेवी  राकेश दीक्षित और भोपाल से संगठन की महिला साथी प्रीति तिवारी श्यामपुरा पहुंची। एकता परिषद के जिला संयोजक और तीन दशक से शिवपुरी जिले में निवास करने वाले सहरिया समुदाय के विकास के लिए प्रयासरत श्री रामप्रकाश शर्मा ने बताया कि श्यामपुरा गांव में वर्ष 2017 तक पीने को भी पानी नहीं था। पानी की समस्या के समाधान के लिये गांव में पच्चीसों कुएं खोदे गये लेकिन मार्च आते आते सभी कुएं सूख जाते थे। दो वर्ष पहले गांव के लोगों ने बताया कि गांव में एक तालाब बन जाए तो पानी की समस्या हमेशा के लिये समाप्त हो जाए। इस दिशा में योजना बनाई गई और 2017 मे श्रमदान के माध्यम से तालाब बनाया गया। बारिश आते ही पूरा तालाब लबालब भर गया।गांव वालों को तब आश्चर्य हुआ जब पिछ्ले वर्ष गर्मी के मौसम में भी तालाब का पानी नहीं सूखा।  गांव के ही सहरिया समुदाय के मुखिया पंचम सहरिया ने बताया कि इस वर्ष तालाब की वजह से सभी 70 परिवारों के बीच लगभग 1000 क्विंटल चना तथा लगभग 100 क्विंटल गेहूं की फसल हुई। सहरिया समाज के पटेल ने बताया कि तालाब बनने का एक फायदा यह हुआ है कि गांव के सभी कुएं में इस वर्ष पानी रहा, कोई भी कुआं सूखा नहीं। गांव के लोग इस वर्ष जैविक खेती और सब्जी लगा रहे हैं । आज श्यामपुरा गांव में पोषणबाड़ी का उद्घाटन किया गया। गांव वालों ने निर्णय लिया है कि इस वर्ष सामुदायिक पोषणबाड़ी के अलावा मछ्ली पालन का काम भी किया जायेगा। श्रमदान से जलसंकट की समस्या का समाधान ने गांव के लोगो का जीवन ही बदल दिया।

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