बिहार : भोजपुर में माले नेताओं व समर्थकों पर मुकदमा निंदनीय - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 22 अगस्त 2019

बिहार : भोजपुर में माले नेताओं व समर्थकों पर मुकदमा निंदनीय

सामंती ताकतों के दबाव में है भोजपुर जिला प्रशासन.
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पटना 21 अगस्त 2019 भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने भोजपुर में माले नेताओं सहित 500 अज्ञात लोगों पर भोजपुर प्रशासन द्वारा झूठे मुकदमे थोपने की कार्रवाई की कड़ी निंदा की है और भाजपा-जदयू सरकार को चेतावनी दी है कि वह आंदोलनों के दमन से बाज आए तथा लोकतंत्र का गला घोंटना बंद करे. गौरतलब है कि भोजपुर जिले के लोकप्रिय किसान नेता सतीश यादव की चैथी शहादत पर बड़गांव गांव में माले ने विगत 20 अगस्त को संकल्प सभा का आयोजन किया था. कार्यक्रम की घोषणा बहुत पहले हो चुकी थी और उसकी तैयारी भी लगातार चल रही थी लेकिन सतीश यादव हत्याकांड के मुख्य अभियुक्त रिंकू सिंह के दबाव में प्रशासन द्वारा कार्यक्रम में रूकावट डाला जाने लगा. यहां तक कि सामंती गिरोहों के दबाव में आकर प्रशासन द्वारा कार्यक्रम के दिन धारा 144 लागू कर दिया गया और संकल्प सभा को रोकने का प्रयास किया गया. भाकपा-माले ने सामंती ताकतों की गिरफ्तारी की मांग की ताकि संकल्प सभा को शांतिपूर्वक तरीके से चलाया जा सके, लेकिन प्रशासन ने उनकी बातें सुनने से इंकार कर दिया. माले नेताओं-कार्यकर्ताओं ने तब धारा 144 को तोड़ते हुए और सामंती दबदबे को धत्ता बताते हुए गांव में संकल्प सभा आयोजित की. संकल्प सभा में केंद्रीय कमिटी के सदस्य मनोज मंजिल, राजू यादव, विधायक सुदामा प्रसाद सहित इलाके के हजारों मजदूर-किसान, छात्र-नौजवान शामिल हुए थे. बाद में पता चला कि प्रशासन ने 17 माले नेताओं सहित 500 लोगों पर झूठा मुकदमा दर्ज कर दिया है. जाहिर है कि यह कार्रवाई पूरी तरह सामंतों के दबाव में की गई है. माले ने बिहार सरकार से पूछा है कि एक तो वह हत्यारों को गिरफ््तार नहीं कर रही है, क्या शहीदों को याद करना और शांतिपूर्वक तरीके से संकल्प सभा आयोजित करना भी बिहार में गुनाह हो गया है? बिहार सरकार आंदोलनों के नेताओं के दमन से बाज आए और लोकतांत्रिक अधिकारों का गला घोंटना बंद करे. उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र की सत्ता में भाजपा के दुबारा लौटने के बाद सामंती ताकतों का मनोबल सर चढ़कर बोल रहा है.

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