राहुल का अध्यक्ष पद पर बने रहने से इनकार, आठ बजे फिर होगी सीडब्ल्यूसी की बैठक - Live Aaryaavart

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शनिवार, 10 अगस्त 2019

राहुल का अध्यक्ष पद पर बने रहने से इनकार, आठ बजे फिर होगी सीडब्ल्यूसी की बैठक

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नयी दिल्ली, 10 अगस्त, कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में अध्यक्ष पद पर बने रहने के नेताओं के अनुरोध को राहुल गांधी द्वारा अस्वीकार किए जाने के बाद शनिवार को पार्टी के नए अध्यक्ष के चयन को लेकर विस्तृत परामर्श का दौरा चला। अब रात आठ बजे एक बार फिर सीडब्ल्यूसी की बैठक होगी जिसमें पार्टी के नए अध्यक्ष को लेकर कोई न कोई निर्णय होने की संभावना है। इस बीच, पार्टी संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी और अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे चुके राहुल गांधी ने नया अध्यक्ष चुनने की प्रक्रिया से खुद को अलग कर लिया है। नए अध्यक्ष को लेकर सुबह हुई सीडब्ल्यूसी बैठक के बाद नेताओं ने पांच अलग-अलग समूहों में मंथन किया। इन समूहों के परामर्श के आधार पर सीडब्ल्यूसी रात आठ बजे बैठक कर कोई फैसला करेगी। सीडब्ल्यूसी के नेताओं को पांच अलग अलग समूहों- पूर्वोत्तर क्षेत्र, पूर्वी क्षेत्र, उत्तर क्षेत्र, पश्चिमी क्षेत्र और दक्षिण क्षेत्र- में बांटकर परामर्श बैठकें हुईं। पूर्वोत्तर क्षेत्र के समूह में अहमद पटेल, अंबिका सोनी, गुलाम नबी आजाद और कई अन्य वरिष्ठ नेता, पूर्वी क्षेत्र के समूह में केसी वेणुगोपाल, कुमारी शैलजा, तरुण गोगोई और कई अन्य वरिष्ठ नेता, उत्तरी क्षेत्र वाले समूह में प्रियंका गांधी, पी चिदंबरम, ज्योतिरादित्य सिंधिया और कई अन्य वरिष्ठ नेता, पश्चिमी क्षेत्र के समूह में एके एंटनी, गुलाम नबी आजाद, मल्लिकार्जुन खड़गे और कई अन्य वरिष्ठ नेता तथा दक्षिणी क्षेत्र के समूह में मनमोहन सिंह, अधीर रंजन चौधरी, आनंद शर्मा तथा कई अन्य वरिष्ठ नेता शामिल थे। सीडब्ल्यूसी की पहले दौर की बैठक के बाद पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, 'सीडब्ल्यूसी के सभी सदस्यों ने राहुल गांधी से अध्यक्ष बने रहने और नेतृत्व करने का सहमति से आग्रह किया। उन्होंने यह अनुरोध भी किया कि आज जब मौजूदा सरकार संवैधानिक प्रावधानों, नागरिकों के अधिकारों और संस्थाओं पर आक्रमण कर रही है तो ऐसे समय मजबूत विपक्ष के लिए और कांग्रेस को नेतृत्व देने के लिए राहुल गांधी उपयुक्त व्यक्ति हैं।' उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘गांधी ने अपना इस्तीफा वापस लेने से इनकार किया और कहा कि सीडब्ल्यूसी के सदस्यों और दूसरे नेताओं से नए अध्यक्ष को लेकर व्यापक विचार विमर्श किया जाए।’’ 


सुरजेवाला ने कहा कि सीडब्ल्यूसी पांच अलग-अलग समूहों में परामर्श कर रही है। रात आठ बजे सीडब्ल्यूसी की फिर बैठक होगी जिसमें इन समूहों की बातचीत में निकले निष्कर्ष के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। एक सवाल के जवाब में सुरजेवाला ने यह भी कहा कि अभी गांधी का इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ है और यह सीडब्ल्यूसी के विचाराधीन है। सूत्रों के मुताबिक बैठक में शामिल ज्यादातर नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि राहुल गांधी को अध्यक्ष बने रहना चाहिए, हालांकि गांधी ने अपने फैसले पर पुनर्विचार करने से साफ इनकार किया। बैठक से बाहर आने के बाद पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वी नारायणसामी ने कहा, ‘‘मुझसे विकल्प के बारे में पूछा गया और मैंने कहा कि राहुल गांधी का कोई विकल्प नहीं है। राहुल गांधी के नेतृत्व में ही पार्टी मजबूत हो सकती है।’’  उधर, बैठक से बाहर निकलने के बाद सोनिया ने संवाददाताओं से कहा कि नया अध्यक्ष तय करने के लिए बातचीत की प्रक्रिया शुरू हुई है। मैं और राहुल इसका हिस्सा नहीं हो सकते। मेरा नाम बैठक के लिए गलती से शामिल हो गया था। दरअसल, इस्तीफा देते समय राहुल गांधी ने स्पष्ट किया था कि गांधी परिवार का कोई व्यक्ति अध्यक्ष नहीं बनेगा और वह इसके चयन की प्रक्रिया में शामिल नहीं होंगे। सोनिया गांधी और राहुल गांधी के चयन की प्रक्रिया से अलग होने के बारे में पूछे जाने पर सुरजेवाला ने कहा कि दोनों शीर्ष नेताओं ने यह फैसला किया ताकि किसी की राय पर उनका प्रभाव नहीं पड़े। सीडब्ल्यूसी की बैठक में पार्टी संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, राहुल गांधी, महासचिव प्रियंका गांधी, वरिष्ठ नेता अहमद पटेल, एके एंटनी, गुलाम नबी आजाद, मल्लिकार्जुन खड़गे , राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कई अन्य नेता शामिल हुए। पार्टी के नये अध्यक्ष को लेकर मुकुल वासनिक, मल्लिकार्जुन खड़गे, अशोक गहलोत, सुशील कुमार शिंदे, ज्योतिरादित्य सिंधिया और सचिन पायलट सहित कई वरिष्ठ एवं युवा नेताओं के नामों की चर्चा है। वैसे, अध्यक्ष पद के लिए पार्टी के कई नेता प्रियंका गांधी के नाम की पैरवी कर चुके हैं। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद 25 मई को राहुल गांधी ने पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। उस वक्त उनके इस्तीफे को अस्वीकार करते हुए सीडब्ल्यूसी ने उन्हें पार्टी में आमूलचूल बदलाव के लिए अधिकृत किया था, हालांकि गांधी अपने रुख पर अड़े रहे और स्पष्ट कर दिया कि न तो वह और न ही गांधी परिवार का कोई दूसरा सदस्य इस जिम्मेदारी को संभालेगा।

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