बिहार : खत्म हुआ बिहार सरकार का ड्रामा,अरुण कुमार सिंह बने विकास आयुक्त - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 2 सितंबर 2019

बिहार : खत्म हुआ बिहार सरकार का ड्रामा,अरुण कुमार सिंह बने विकास आयुक्त

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अरुण कुमार (आर्यावर्त)  आखिरकार नीतीश सरकार अपने अभूतपूर्व संकट से निकल ही गया।ऐसा पहलीबार हुआ 48 घंटे तक राज्य के विकास आयुक्त का पद खाली रहा।आखिरकार देर शाम अरूण कुमार सिंह को सूबे का विकास आयुक्त बनाने की अधिसूचना जारी कर ही दिया गया।लेकिन इससे पहले अंदर ही अंदर खूब ड्रामा भी चला।सूबे की ब्यूरोक्रेसी में नंबर दो का पद माना जाने वाले विकास आयुक्त की कुर्सी पर किसी अधिकारी को बिठाने में सरकार को क्या क्या न करना पड़ा।आपको बता दूँ कि 31 अगस्त को राज्य के विकास आयुक्त सुभाष शर्मा रिटायर हो गये थे।अब तक चली आ रही परंपरा के  अनुसार रिटायरमेंट के पहले ही नये विकास आयुक्त का नाम तय कर लिया जाता रहा है।लेकिन इस बार रिटायरमेंट के 48 घंटे बाद सरकार ने अधिसूचना जारी की।सचिवालय के सूत्रों की मानें तो राज्य सरकार के ज्यादातर अधिकारियों ने इस कुर्सी पर बैठने में अपनी अनिच्छा जाहिर कर दी थी।सरकार ने पहले से ही जल संसाधन विभाग के अपर मुख्य सचिव अरूण कुमार सिंह को विकास आयुक्त बनाने का फैसला लिया था।लेकिन वे इसके लिए तैयार  नहीं थे।इनके अलावा आमिर सुबहानी और त्रिपुरारी शरण के नाम पर भी चर्चा हुई थी लेकिन दोनों ने ही अपनी अनिच्छा जता चुके थे। सीएम के समझाने पर आखिरकार मान ही गये अरूण कुमार सिंह। सचिवालय में चर्चा यही है कि खुद मुख्यमंत्री के समझाने पर अरूण कुमार सिंह माने हैं।वे जल संसाधन जैसा विभाग छोड़ कर आना ही नहीं चाहते थे।लेकिन उन्हें बताया गया कि अगले साल फरवरी में सूबे के मुख्य सचिव का पद भी खाली हो रहा है।उस पद पर विकास आयुक्त की ही स्वभाविक दावेदारी बनती है।

क्यों नहीं बनना चाहता है कोई विकास आयुक्त :-
दरअसल विकास आयुक्त के पद में अधिकारियों को कोई दम-खम ही नहीं दिखता है।विभागों का प्रभार पावर के साथ साथ और भी बहुत कुछ देता तो है,लेकिन विकास आयुक्त का काम सीमित होता है।पद तो बड़ा बताया जाता है लेकिन पावर कुछ खास नहीं होता है।और अब बिना पावर वाले पद से अधिकारियों का मोहभंग हो चुका है।

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