विशेष : पटना में बाढ़, दोषी कौन ? - Live Aaryaavart

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मंगलवार, 1 अक्तूबर 2019

विशेष : पटना में बाढ़, दोषी कौन ?

किस चूक के कारण 'स्मार्ट सिटी' बनने वाली पटना जलग्मग हो गई                                  
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पटना एक प्राचीन नगर है, इसका गौरवशाली इतिहास रहा है। यहां कि मिट्टी हर क्षेत्र में उर्वरा रही है। एक बार फिर से इसे बचाने की जरुरत है। किसी भी शहर की सभ्यता वहां की पहचना होती है। ऐसे में पटना जैसे प्राचीन और ऐतिहासिक शहर को विशेष संरक्षण की जरूरत है। व्यापार, शिक्षा, रोजगार और अन्य तरह की कंक्रीट सुविधाओं की यहां खास जरुरत है। लेकिन अफसोस कि जिस पटना से बिहारवासियों को उम्मीदें हैं वो पटना अपनी बदहाली पर खुद ही आंसू बहा रहा है। पटना को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए लगातार दावे किए जा रहे हैं मगर चार दिन की बारिश ने पटना को जलमग्न कर दिया और पटना के मॉरिशस बन जाने की कल्पना की कलई खुल गई। सितंबर के आखिरी दिनों में हुई भीषण बारिश से पूरा पटना जलमग्न हो चुका है। यहां बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होने से आम से लेकर खास तक परेशन हैं। बिहार की राजनीति में अपना कद बढ़ाने वाले बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी पटना में जल जमाव और कई समस्याओं को लेकर धरना पर बैठ जाया करते थे। लेकिन इस बार वो खुद ही पदासीन हैं और उन्हें एनडीआरएफ की टीम ने बाहर निकाला। आम जनता उनसे ही सवाल पूछ रही है कि अब आप किसकों दोष देंगे। क्या सिर्फ कुर्सी तक पहुंचने के लिए ही धरना प्रदर्शन किया करते थे या फिर इस जलमग्न पटना में खुद की हालात से आम जनता के दर्द को आप समझेंगे। पटना अकेला ऐसा शहर नहीं है, जहां असामान्य रूप से अधिक बारिश हुई है। बिहार में 26 से 29 सितंबर तक 181.9 मिमी बारिश हुई है, जो इन पांच सबसे ज्यादा बारिश वाले सालों की तुलना में सबसे अधिक है। बचाव एवं राहत कार्य के लिए एनडीआरएफ की 22 टीमों को तैनात किया गया है। इस शहर की परेशानी किसी से छूपी हुई नहीं है। आम जनता सरकार की व्यवस्था पर जहां सवाल खड़ा कर रही है वहीं राज्य के आपदा प्रबंधन मंत्री लक्ष्मेश्वर राय तो इसे प्राकृतिक आपदा कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं। जब इतना से भी जी नहीं भरता तो कहते हैं सरकार पूरी तरह से चौकस है। ड्रेनेज की व्यवस्था पर कहते हैं शीघ्र कमियां दूर कर ली जाएंगी। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि पिछले 14 वर्षों से नीतीश कुमार की ही सूबे में सरकार है, जब इस समस्या को दूर नहीं कर पाए तो आगे कितना इन पर विश्वास किया जाए। राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव फिलहाल जेल में हैं उन्होंने ट्विटर पर लिखा है, 'विपक्ष को गाली दे-देकर बिहार में इतना विकासे कर दिए हैं कि अब सुशील अपने और नीतीश के 15 बरस के ‘विकास’ के साथ सड़क पर खड़ा है।' पटनावासियों ने 35 वर्षों से सुशील मोदी और उनकी पार्टी को सभी चुनावों में जिताया है। ये ख़ुद 15 वर्ष से सरकार में नगर विकास मंत्री रहे हैं। अगर इन्होंने ड्रेनेज का फ़ंड भ्रष्टाचार में ड्रेन करने की बजाय काम में लगाया होता तो आज इस अवस्था में ना होते।' 

आखिर क्यों लाचार हैं नीतीशः
बिहार ही नहीं पूरे देश दुनिया में सुशासन बाबू के रुप में अपनी अमिट पहचान बनाने वाले नीतीश कुमार के लिए वर्ष 2015 के चुनाव में “बिहार में बहार है- नीतीशे कुमार है” काफी पॉपुलर हुई थी। लेकिन इधर इनके विकास पर ही सवाल खड़ा होने लगा है। बिहार में लंबे समय से एनडीए की सरकार है। बीच में 20 माह के लिए राजद के साथ गए थे। इस लिहाज से एनडीए की पारी लंबी रही इनकी विकास इनका मेन एजेंडा रहा, इसमें कोई दो मत नहीं की इन्होंने विकास भी किया। सूबे की सड़कें, पुल पुलिया तो दुरुस्त हो गईं मगर यहां पटना को स्मार्ट सिटी बनाने का सपना कहीं सपना न रह जाए इसका भय जरुर सता रहा है। बिहार में पूर्ण शराबबंदी है, लेकिन इसकी तस्करी चरम पर है। ये आपको भी पता है कि आम लोगों की पहुंच से शराब दूर तो हो गई मगर आपके खास लोगों के करीब आज भी नशामुक्ति अभियान का कोई असर नहीं पड़ा है। सूबे में कई अभियान चलाए जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक तो आपकी सोच की सभी तारीफ करते हैं परंतु आम जनता को इसका कितना लाभ मिलता है इसकी तहकीकात करने की बात करते हैं। अगर नहीं यकीन हो रहा है तो पटना में आयी बाढ़ के समय जारी किए गए हेल्प लाइन नंबर पर जरा कॉल कर के देख लीजिए आपको समझ में आ जाएगा की आप और प्रशासन आम लोगों के लिए कितना सजग है। अरे, जब शराब कारोबारियों को पकड़वाने के लिए आपने बिजली के पोलों पर जो नंबर अंकित कराए उस पर कितना काम होता है ये बातें आप से बेहतर कोई नहीं जानता होगा। और इस सब की जड़ में आपकी लगातार घंटों मीटिंग करना और ऑफिसरों को खुली आजादी देना इसका मुख्य कारण है। ।

केंद्र से मदद की दरकारः 
बिहार सरकार ने केंद्र को बताया कि राज्य के 16 जिलों में बाढ़ का प्रकोप है। पटना के अलावा समस्तीपुर, बेगूसराय, सीतामढ़ी, भागलपुर और नालंदा समेत कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं। सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बिहार में आई बाढ़ को लेकर बातचीत की थी और हर संभव मदद का भरोसा दिया था। सोमवार को ही नीतीश कुमार ने पटना का हवाई दौरा कर हालात का जायजा लिया था। गंगा, सोन और पुनपुन नदियों के जलस्तर में वृद्धि से पटना जिले की 30 पंचायतें बाढ़ प्रभावित हो गई हैं। बाढ़, मोकामा, अथमलगोला, बख्तियारपुर, फतुहा, पटना सदर, दानापुर और मनेर ब्लॉक के लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। 

1975 में पटना बाढ़ में डूब गया थाः
आधुनिक पटना में वर्ष 1975 में बाढ़ एक बड़ी त्रासदी के रूप में सामने आई थी। तब मध्य और पश्चिमी पटना पूरी तरह बाढ़ के पानी में डूब गया था। सबसे खास ये कि सोन और गंगा में एक साथ बाढ़ आने के बावजूद राजेंद्र नगर और पटना सिटी का इलाका बच गया था, लेकिन इस बार इन इलाकों के साथ मध्य पटना भी जलप्रकोप का शिकार हो गया है। इसके पहले वर्ष 1960 में भी पटना के हालात बिगड़े थे। हमेशा इस तरह की घटनाओं का होना आम है फिर भी न जाने क्यों बिहार सरकार और नगर निगम ड्रेनेज सिस्टम को लेकर संवेदनशील क्यों नहीं होती यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है।

1144 वर्ग किमी क्षेत्रफल फैला है पटनाः
बिहार की राजधानी पटना है इसको विकसित करने के लिए मास्टर प्लान में पांच सैटेलाइट टाउनशिप के विकास करने की योजना पर सरकार काम करने का दावा कर रही है। इसमें फतुहा, नौबतपुर, पुनपुन, बिहटा और खुशरूपुर शामिल हैं। पटना मास्टर प्लान का कुल क्षेत्रफल 1144.92 वर्ग किलोमीटर निर्धारित है। शहर का विस्तार उत्तर में गंगा किनारे से दक्षिण में 16 किलोमीटर तय है जबकि पूरब से पश्चिम तक करीब 50 किलोमीटर निर्धारित है। शहर का विकास फेजवाइज करने की योजना तय है। लेकिन पटना को स्मार्ट बनाने का सपना सिर्फ पटना के कुछ इलाकों में सिमट कर रह गया है।

पानी बहाव के रास्ते बंदः
पटना शहर को हाईटेक बनाने का सरकार दावा कर रही है। हम आपको बता दें कि इस शहर में 31 बड़े नाले हैं और 29 संप हाउस हैं, जिसके सहारे शहरों के पानी का बहाव की जाती है। पटना नगर निगम इस बाढ़ के लिए मुख्य दोषी मानी जा रही है। असल में शहर के लगभग 50 फीसदी नालों सफाई नहीं की गई है और सफाई हुई भी है तो सिर्फ उसकी खानापूर्ति करके काम छोड़ दिया गया है। पिछले कई वर्षों से सफाई के नाम पर कमाई तो होती रही लेकिन पटना में इस बार हेवी रेन ने सारे पोल को खोलकर रख दिया है। एक बात और याद दिला दूं कि कभी भगवान बुद्ध ने कहा था कि पटना को पानी और आग से खतरा रहेगा, बावजूद इसके हम चेत नहीं रहे हैं।

पटना में तालाबों का अस्तित्व ही मिट गयाः
पटना कभी 1005 तालाबों का शहर हुआ करता था, जिसमें आधे से अधिक तालाबों का नामोनिशान मिट गए हैं। ये तालाब गर्मी के बाद बरसात के आगमन के साथ जल संचयन का कार्य करता था, इसी वजह से पटना शहर के सड़कों, गलियों में जल जमाव नहीं हुआ करता था। पटना को स्मार्ट बनाने और भूमाफियाओं के साथ-साथ सरकारी नुमाइंदों ने गगनचुंबी इमारतों की इजाजत देकर तालाबों के अस्तित्व को ही मिटा दिया नतीजा आप देख रहे हैं कि पटना किस हालत में जिने को विवश है। बिहार के मुख्यमंत्री तालाबों, पोखर, पइन को जिंदा करने की बात कर रही है। आपने देखा की अकेले पटना से ही इतने तालाब कहां गुम हो गए, जिसे सरकार भी ढूंढ पाने में असमर्थ नजर आ रही है।


मुरली मनोहर श्रीवास्तव           
(लेखक/पत्रकार/स्तंभकार)  
मो.9430623520

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