बिहार : खुद को भड़कने वाले नेता के रूप में ढालते चले जा रहे हैं केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री - Live Aaryaavart

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शुक्रवार, 15 नवंबर 2019

बिहार : खुद को भड़कने वाले नेता के रूप में ढालते चले जा रहे हैं केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री

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बक्सर,15 नवम्बर (आर्यावर्त संवाददाता)।  केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री और बक्सर से भाजपा सांसद अश्विनी कुमार चौबे खुद को भड़कने वाले नेता के रूप में  ढालते चले जा रहे हैं। पहली दफा 01 अक्टूबर,2017 को बक्सर जिला के असैनिक शल्य चिकित्सक सह चिकित्सा पदाधिकारी पर भड़के। 13 अक्टूबर,2018 को खुद के ऊपर केस होने पर भड़के। 30 मार्च,2019 को बक्सर में काफिला रोकने पर एसडीएम पर भड़के। 23 सितम्बर, 2019 को जनता दरबार में ओपी प्रभारी को धमकी दे मारी।14 अक्टूबर,2019 को पटना में अश्विनी चौबे पर स्याही फेंकने से भड़के। आज एक बार फिर अपना आपा खो दिया है। ताजा मामला केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य कल्याण मंत्री सह बक्सर सांसद अश्विनी कुमार चौबे शुक्रवार को एक बार फिर आपा खो बैठे। सर्किट हाउस में मंत्री से मुलाकात करने गये सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ दुव्यर्वहार किये जाने का मामला सामने आया है। इस दौरान मुलाकात करने गये कार्यकर्ताओं के बैनर भी फाड़ दिये गये। घटना के बाद गुस्साये लोगों ने मंत्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मामले की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने दो सामाजिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया है। बताया जाता है कि सर्किट हाउस में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री सह बक्सर सांसद अश्विनी चौबे ठहरे हुए थे। इसकी सूचना मिलते ही सामाजिक कार्यकर्ता और दिव्यांग संघ के कार्यकर्ता वहां पहुंच गये। इसके बाद उनके द्वारा सदर अस्पताल में बेहतर सुविधाओं को बहाल करने के लिए किये गये वायदे को पूरा करने की मांग करने लगे। बक्सर के सदर अस्पताल में डिजिटल एक्सरे और अल्ट्रासाउंड की सुविधा को बहाल करने का वादा किया था। इसके लिए महीनों से मशीनें लाकर रखी गई हैं लेकिन अभी तक उन्हें इस्तेमाल में नहीं लाया गया है। जब सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उन्हें यह वादा याद दिलाया तो वह भड़क गए और अपना आपा खो दिया। उन्होंने उनके हाथों से बैनर छीनकर फाड़ दिया और उन्हें भाग जाने को कह दिया।

इसी बात को लेकर सांसद भड़क गये। इसके बाद उन्होंने कार्यकर्ताओं से मिलनेवालों को भगाने का आदेश दिया। इस दौरान हो-हंगामा कर रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं का बैनर छीनकर सासंद ने फाड़ दिया। सांसद को भड़कता देख कार्यकर्ताओं ने हंगामा शुरू कर दिया। हंगामे की सूचना मिलते ही नगर थाने की पुलिस ने सामाजिक कार्यकर्ता रामजी सिंह और जितेंद्र कुमार को हिरासत में ले लिया। सामाजिक कार्यकर्ता रामजी सिंह ने कहा कि अश्विनी चौबे ने दो माह पूर्व कहा था कि बक्सर सदर अस्पताल में डिजिटल एक्सरे और अल्ट्रासाउंड की सुविधा को एक माह में बहाल कर दिया जायेगा।इसके लिए मशीन भी सदर अस्पताल में लाकर महीनों से रखी गयी है, लेकिन उसे अभी तक इस्तेमाल में नहीं लाया जा सका है. इसी बात को लेकर उनसे कहा गया था, मगर अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता रामजी सिंह ने कहा, 'पिछले 10 महीनों से अल्ट्रासाउंड मशीन जिला अस्पताल में मंत्री के आश्वासन के बावजूद निष्क्रिय पड़ी है। हम यहां विरोध करने के लिए पहुंचे थे। मंत्री गुस्सा हो गए और उन्होंने हमें धक्का देना शुरू कर दिया।' कार्यकर्ताओं और दिव्यांगो ने मंत्री पर अपना अपमान करने का आरोप लगाया है। बता दें कि इससे पहले केद्रीय मंत्री ने 23 सितंबर को जनता दरबार में एक थानेदार को वर्दी उतरवाने की धमकी दी थी। एक बुजुर्ग ने मंत्री से थानेदार की शिकायत की तो उन्होंने भरी सभा में सबके सामने थानेदार को बुलाकर उसकी वर्दी उतरवाने की धमकी दी थी। आरोप है कि थानेदार ने बुजुर्ग को गुंडा एक्ट में फंसाने की धमकी दे रहा था। केंद्रीय मंत्री जब थानेदार को खरी-खोटी सुना रहे थे उस दौरान वहां मौजूद लोग तालिया बजा रहे थे। जिसपर मंत्री ने नाराज होकर कहा था कि तालियां मत बजाइये। वहीं थानेदार चुपचाप उनकी फटकार सुन रहे थे। इससे पहले चौबे ने 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान बक्सर के एसडीएम के साथ बदतमीजी की थी। एसडीएम राजेश उपाध्याय का चुनाव आयोग के आदेशानुसार काम करना मंत्री पसंद नहीं आया और वह उनसे उलझ गए थे। इस बाबत सांसद के मीडिया प्रभारी नितिन मुकेश ने कहा कि कुछ शरारती लोग सांसद से मिलने गये थे। उनका काम ही है बेवजह उपद्रव कराना। उन्हीं शरारती तत्वों की शह पर घटना का अंजाम दिया गया है। वहीं, इस बाबत सांसद से भी बात करने का प्रयास किया गया, मगर उनसे बात नहीं हो पायी।नगर थानाध्यक्ष राहुल कुमार ने बताया कि धारा-151 के तहत रामजी सिंह और जितेंद्र कुमार को हिरासत में ले लिया।दो लोगों को हिरासत में लिया गया है।कागजी कार्रवाई के बाद दोनों को छोड़ दिया जायेगा।

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