अयोध्या फैसले का देशभर में स्वागत - Live Aaryaavart

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शनिवार, 9 नवंबर 2019

अयोध्या फैसले का देशभर में स्वागत

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नयी दिल्ली, 09 नवंबर, कई दशकों तक भारतीय राजनीति में छाये रहे अयोध्या विवाद में उच्चतम न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले का देशभर में लोगों ने स्वागत किया है और कांग्रेस तथा भारतीय जनता पार्टी सहित सभी राजनीतिक दलों ने भी इसका समर्थन किया है और कहा कि इससे देश की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक विविधता बनाए रखने में मदद मिलेगी और भारतीय लोकतंत्र मजबूत होगा।उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ के 1045 पृष्ठ के फैसले में विवादास्पद भूमि पर राम मंदिर बनाने और वैकल्पिक भूमि पर मस्जिद के निर्माण के बारे में दिए निर्णय का राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, जमियत -ए-उलेमा हिंद तथा मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने भी फैसले का स्वागत किया है।अयोध्या पर न्यायालय का फैसला आने के बाद देशभर में लोगों ने खुशी का इजहार किया और दोनों समुदायों के बीच सौहार्द बनाए रखने की झलकियां नजर आयी। अयोध्या में सरयू के तट पर विशेषरूप से भव्य आरती का आयोजन किया गया और मंदिरों में दीप जलाए गए और पूजा- अर्चना की गयी।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुक्तार अब्बास नकवी, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी सहित सभी प्रमुख नेताओं ने फैसले का खुलकर स्वागत किया है और कहा है कि वर्षाें से राम मंदिर निर्माण की मांग न्यायालय के फैसले से पूरी हो गयी है और निर्माण कार्य का रास्ता प्रशस्त हो गया है।कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी, महासचिव प्रियंका गांधी, वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल, बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता सीताराम येचुरी समेत कई विपक्षी दलों के नेताओं ने इस निर्णय का स्वागत किया और कहा कि न्यायालय के फैसले से इस मसले का शांतिपूर्ण समाधान निकल गया है। फैसले से देश में राम मंदिर के नाम पर होने वाली राजनीति का रास्ता बंद हो गया है।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अयोध्या में रामजन्मभूमि को लेकर उच्चतम न्यायालय के फैसले को इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय करार दिया है और कहा है कि इस फैसले के बाद देश के नागरिकों पर नये भारत के निर्माण के लिए जुटने की जिम्मेदारी बढ़ गयी है। उन्होंने राष्ट्र के नाम अपने संदेश में कहा कि आज उच्चतम न्यायालय ने एक ऐसे महत्वपूर्ण मामले पर फैसला सुनाया है, जिसके पीछे सैकड़ों वर्षों का एक इतिहास है। पूरे देश की ये इच्छा थी कि इस मामले की अदालत में हर रोज़ सुनवाई हो, जो हुई, और आज निर्णय आ चुका है। 

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