मधुबनी : जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में कृषि समीक्षात्मक बैठक का आयोजन - Live Aaryaavart

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शनिवार, 9 नवंबर 2019

मधुबनी : जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में कृषि समीक्षात्मक बैठक का आयोजन

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मधुबनी (आर्यावर्त संवाददाता)  जिला पदाधिकारी, मधुबनी के द्वारा कृषि विभाग के प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों एवं कर्मियों के साथ समीक्षा बैठक का आयोजन नगर भवन ,मधुबनी में शनिवार को आयोजित की गयी।  बैठक में जिला पदाधिकारी,मधुबनी ने  किसानों के द्वारा फसलों के पराली जलाने को लेकर कार्यशाला को संबोधित करते हुए बताया गया कि पराली जलाने की समस्या से हमारे पर्यावरण में प्रदूषण फैलता है साथ ही बहुत तरह की बीमारियों की  संभावना बढ़ जाती है। मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी कम होती है तथा मिट्टी में जो लाभप्रद जीवाणु रहते हैं वह भी पराली के साथ जल जाते हैं जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम होती है। फसल अवशेष प्रबंधन की गंभीरता को देखते हुए जिला पदाधिकारी के द्वारा सभी पदाधिकारियों एवं कर्मियों को निर्देश दिया गया कि किसानों को पराली को जलाने एवं फसल अवशेष प्रबंधन पर विशेष जोर देने हेतु जागरूक की जाए एवं सरकार के द्वारा पराली प्रबंधन से संबंधित कृषि यंत्र के बारे में बताया जाए और किसानों को अनुदानित दर पर कृषि यंत्र उपलब्ध कराई जाए। फसल अवशेष प्रबंधन के लिए किसानों को जागरूक किया जाए ताकि पराली जलाने को रोका जा सके।  तत्पश्चात जिला पदाधिकारी,मधुबनी के द्वारा खरीफ मौसम में बाढ़ एवं अतिवृष्टि के कारण  प्रभावित फसलों एवं अल्पवृष्टि के कारण कृषि योग्य पड़ती भूमि से हुई क्षति  में कृषि इनपुट अनुदान वितरण से संबंधित दिशा निर्देश दिया गया जिसमें बताया गया कि विभाग को जो जो प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया है ,उसी के आधार पर सभी प्रखंड कृषि पदाधिकारी/ कृषि समन्वयक/ सभी प्रखंड तकनीकी प्रबंधक/ सभी सहायक तकनीकी प्रबंधक /सभी किसान सलाहकार कार्रवाई करेंगे तथा सभी किसानों का जियो टैग फोटोग्राफी के माध्यम से सर्वे करेंगे । जिनका 33% से ज्यादा नुकसान हुआ है । जिला पदाधिकारी के द्वारा यह भी बताया गया कि किसानों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है जिसमें वास्तविक खेतीहर को कृषि इनपुट अनुदान वितरण में  प्राथमिकता देने का  निर्देश दिया गया।  वास्तविक खेतिहर के आवेदनों को सत्यापित करने हेतु विभिन्न दिशानिर्देश भी दिया गया उन्हें  यह भी बताया गया कि अल्पवृष्टि के कारण परती योग्य भूमि के मामले में , वैसे भूमि को माना जाएगा जिसमें इस वर्ष किसी तरह की आकस्मिक या वैकल्पिक फसल नहीं लगा पाए हो एवं किसी तरह के किसी कार्य नहीं करा पाए हो और जमीन संपूर्ण खरीफ फसल में परती पड़ी हो तथा जिसमें भूतकाल में कभी भी किसी तरह का फसल नहीं लगाया गया हो।  गत 3 वर्ष की अवधि में किसी भी वर्ष यदि कोई फसल नहीं लगाया गया हो ऐसे क्षेत्र में इस बार सुखाड़ के कारण परती रहने की स्थिति में भूमि परती माना जाएगा। सभी जांचकर्ता को निर्देश दिया गया कि किसानों के हुई फसल क्षति का शत-प्रतिशत जियो टैग फोटोग्राफी के माध्यम से सर्वेक्षण कराना सुनिश्चित करेंगे।
जिला पदाधिकारी,मधुबनी के द्वारा निर्देश दिया गया कि विभागीय दिशा निर्देश के आलोक में समय सीमा के अंदर कृषि इनपुट अनुदान का वितरण कराना सुनिश्चित करेंगे । बैठक में जिला कृषि पदाधिकारी श्री सुधीर कुमार ,सहायक निदेशक पौधा संरक्षण श्री सतीश चंद्र झा, कृषि विज्ञान केंद्र, बसैठ के कार्यक्रम समन्वयक श्री मंगलानंद झा, प्रखंड के सभी प्रखंड कृषि पदाधिकारी /सभी कृषि समन्वयक /प्रखंड तकनीकी प्रबंधक /सहायक सभी किसान सलाहकार/ एवं सभी प्रखंड के प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया ।

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