आतंरिक मामले में पाकिस्तान की टिप्पणी निंदनीय : विदेश मंत्रालय - Live Aaryaavart

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शनिवार, 9 नवंबर 2019

आतंरिक मामले में पाकिस्तान की टिप्पणी निंदनीय : विदेश मंत्रालय

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नयी दिल्ली 09नवंबर, सरकार ने कहा है कि अयोध्या मसले पर उच्चतम न्यायालय का फैसला पूरी तरह से देश का आंतरिक मामला है और इसको लेकर पाकिस्तान की अनुचित और आधारहीन टिप्पणी किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने शनिवार शाम ट्वीट करके कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला कानून सम्मत है और इसमें सभी धर्माें को बाराबर का सम्मान दिया गया है। यह ऐसी व्यवस्था एवं धारणा है जो पाकिस्तान के चरित्र से परे है। उन्होंने कहा,“ इसलिए पाकिस्तान की इस तरह की अवधारणा आश्चर्यचकित करने वाली नहीं है। यह उसकी पैथोलॉजिकल बाध्यता है। द्वेष फैलाने के लिए के इरादे से आतंरिक मामलों में जानकबूझ कर की गयी उसकी टिप्पणी निंदनीय है।”उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान ने विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने सदियों पुराने अयोध्या मसले को लेकर आये फैसले के समय को लेकर आज सवाल खड़े किये। उन्होंने जियो न्यूज से बातचीत में कहा,“ उच्चतम न्यायालय के फैसले से पहले से ही पीड़ित मुसलमान समुदाय पर दबाव और अधिक बढ़ेगा।”श्री कुरैशी ने कहा कि फैसले के विस्तार से अध्ययन के बाद पाकिस्तान का विदेश विभाग आधिकारिक वक्तव्य जारी करेगा। उन्होंने हालांकि आज के दिन फैसले की घोषणा पर प्रश्नचिह्न खड़े किये। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा, “उच्चतम न्यायालय ने लंबे समय के बाद आज फैसला सुनाया। भारतीय अदालत ने आज ही क्यों अादेश सुनाया।”विदेश मंत्री ने कहा कि करतारपुर कॉरीडोर के उद्घाटन के दिन ही सुनाये गये इस फैसले से पहले से पीड़ित समुदाय पर और दबाव बढ़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी नफरत की राजनीति के तहत घृणा के बीज बो रही है।मानवाधिकार मंत्री शिरीन मजारी ने भी अयोध्या पर आये फैसले के समय पर सवाल खड़ा किया है जबकि विज्ञान एवं प्रोद्यौगिकी मंत्री फवाद चौधरी ने इस फैसले को गैरकानूनी एवं अनैतिक करार दिया है।गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने संबंधी संविधान अनुच्छेद 370 एवं 35ए को समाप्त करने के बाद भी पाकिस्तान बौखलाया था और उसने अनाप-शनाप बयान जारी किये थे। पाकिस्तान ने इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समर्थन के लिए विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इसे उठाने की कोशिश की लेकिन हर जगह उसे मुंह की खानी पड़ी।गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने पांच सौ साल से अधिक पुराने अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद का शनिवार को पटाक्षेप करते हुए विवादित भूमि श्री राम जन्मभूमि न्यास को सौंपने और सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद के निर्माण के लिए अयोध्या में ही उचित स्थान पर पांच एकड़ भूमि देने का निर्णय सुनाया। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि विवादित भूमि श्री राम जन्मभूमि न्यास को दी जायेगी तथा सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में ही पांच एकड़ वैकल्पिक जमीन उपलब्ध करायी जाये। गर्भगृह और मंदिर परिसर का बाहरी इलाका राम जन्मभूमि न्यास को सौंपा जाये।पीठ ने कहा है कि विवादित स्थल पर रामलला के जन्म के पर्याप्त साक्ष्य हैं और अयोध्या में भगवान राम का जन्म हिन्दुओं की आस्था का मामला है और इस पर कोई विवाद नहीं है। 

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