बिहार : लोगों को विश्वास ही नहीं हुआ, बाद में हर्ष का माहौल - Live Aaryaavart

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सोमवार, 25 नवंबर 2019

बिहार : लोगों को विश्वास ही नहीं हुआ, बाद में हर्ष का माहौल

जब पोखन मांझी के पुत्र लूटन मांझी घर लौटा 
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सोनो,25 नवम्बर। बिहार पुलिस के द्वारा मानव अधिकार का घोर उल्लघन करने का समाचार मालूम हुआ है। पुलिस ने पोखन मांझी के पुत्र लूटन मांझी को शराब पीने के जुल्म में 6 अगस्त 2019 को पटना के बेउर जेल भेज दी। मगर पुलिस ने परिवार वालों को गिरफ्तारी की सूचना देने की जिम्मेदारी नहीं निभायी। इसका असर पोखन मांझी के घर पर पड़ा। परिवार के लोग सोचने लगे कि लूटन मांझी का निधन हो गया है।घर में कोहराम मच गया और लूटन मांझी की पत्नी विधवा की तरह जिन्दगी बिताने लगी। जमुई जिले सोनो के प्रखंड के  ग्राम+पोस्ट "केवाली" में पोखन मांझी रहते हैं। उनके पुत्र का नाम लूटन मांझी है। घर वापसी नहीं होने परिवार वाले चिंतित हो गए। काफी खोजखबर करने के बाद भी लूटन मांझी नहीं मिला तो परिवार वाले सोच लिए कि वह मर गया होगा। पिता पोखन मांझी भी अपने पुत्र के बारे में यकीन कर लिया कि मेरा पुत्र अब इस दुनिया मे नहीं रहा।

प्रबोध जन सेवा संस्थान के सुमन सौरभ की भूमिका
प्रबोध जन सेवा संस्थान के सुमन सौरभ ने कहा कि उनको जानकारी मिली कि लूटन मांझी नामक महादलित एक कैदी बेउर जेल में बंदी हैं। उससे कोई भी लोग मिलने नहीं आते हैं। जेल में आने के बाद आज तक परिवार वाले नहीं आने पर बहुत  रोते रहता है। उन्होंने कहा कि प्रवीण जी से संपर्क किए। उन्हें पटना हाई कोर्ट से जेल विजिट करने की इजाजत मिली हुई है। जेल में जाकर प्रवीण जी लूटन मांझी नामक कैदी से मिले। उससे पूरी जानकारी लेकर बताया की वह कैदी काफी परेशान हैं।वह जेल से बाहर निकालना चाहता है।प्रवीण जा से डिटेल लेकर जिले के कई साथियों को सूचित किया।

संतोष जी नामक अधिवक्ता ने लूटे घर में लूटन मांझी को पहुंचाया
प्रवीण जी व सुमन सौरभ ने अपनी ओर से प्रयास किया। और वह  कैदी जेल से बाहर आ गया। काफी खोजबिन करने के बाद जमुई के सहयोगी साथी के सहयोग से लूटन मांझी के परिजनों से संपर्क हो सका।  लूटन मांझी के पिता पोखन मांझी 13/11/2019 को   जमुई से पटना सिविल कोर्ट गया,जहाँ अधिवक्ता संतोष जी उनकी प्रतीक्षा कर रहे थे। उन्होंने उस निर्धन पिता की जिस प्रकार से सहयोग की है, उसे शब्दों बयान नहीं किया सकता।उसी दिन 13/11/ 2019 को बेल फाइल की गयी और उसके बाद  22/11/2019 को जमानत स्वीकृत हो गयी। इस तरह  116 दिनों के बाद 24/11/2019 को लूटन मांझी जेल से  बाहर आया।

परिजन ही नहीं बल्कि पूरे समुदाय के लोग काफी ख़ुश
पटना सिविल कोर्ट के अधिवक्ता संतोष जी प्रवीण जी व सुमन सौरभ के इस तरह नेक कार्य करने से लूटन मांझी के परिजनों के साथ पूरे समुदाय के लोग काफी खुश हैं। पूरा करने की जिम्मेदारी का निर्वाह कर रहे अधिवक्ता संतोष जी की जितनी भी प्रशंसा किया जाए कम है। आप ईश्वर की प्रतिमूर्ति है आपकी सेवा को लेकर मेरे पास कोई शब्द नहीं है।
मुझे ही नहीं हमारी पूरी टीम आप जैसे बड़े भाई समान सहयोगी को पाकर गर्व की अनुभूति कर रही है। 

मानव अधिकार का हनन करने वालों पर कार्रवाई
मानव अधिकार का हनन करने वालों पर कार्रवाई व 116 दिन जेल में रहने वाले परिवार को मुआवजा मिले। लूटन मांझी ने कहा कि अप्रैल 2016 से बिहार में शराबबंदी है तो कैसे शराब पी लिए। पटना के बेउर जेल मे बंद रखने की जानकारी परिवार को नहीं दिया गया। यह मानव अधिकार है कि अगर आपको पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है तो आपको यह अधिकार मिला है कि आप अपने किसी संबंधी को इसकी सूचना दे सकें। इसके लिए पुलिस आपको टेलीफोन मुहैया कराएगी, अगर टेलीफोन की व्यवस्था नहीं है तो पत्राचार से इसकी सूचना भिजवाने की जिम्मेदारी पुलिस की है और यह अधिकार आम नागरिक को सर्वोच्च न्यायालय से मिला है।

यह है मानव अधिकार

FIR दर्ज करने से मना नहीं कर सकती पुलिस पुलिस रेगुलेशन के मुताबिक थाने पर आने वाले प्रत्येक पीड़ित की FIR यानि प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करना पुलिस की जिम्मेदारी है और पुलिस इसके लिए आपको मना नहीं कर सकती। दर्ज FIR की एक कॉपी भी आपको निशुल्क दी जाती है।

2. किसी व्यक्ति से मारपीट या अमानवीय व्यवहार नहीं कर सकती पुलिस

सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश है कि पुलिस थाने लाए गए किसी भी व्यक्ति से अमानवीय व्यवहार नहीं कर सकती है और पुलिस थाने लाए गए किसी भी व्यक्ति के साथ मारपीट नहीं करेगी।

3. आपको बिना कारण बताए गिरफ्तार नहीं किया जा सकता

CRP दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 150 के मुताबिक पुलिस बिना कारण बताए किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं कर सकती है। अगर पुलिस आपको गिरफ्तार करती है तो इसके लिए आप पुलिस से गिरफ्तारी का कारण पूछ सकते हैं और पुलिस को कारण बताना होगा।

4. पुलिस किसी को भी 24 घंटे से ज्यादा हिरासत में नहीं रख सकती

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 167 के मुताबिक पुलिस किसी भी व्यक्ति को 24 घंटे से ज्यादा हिरासत में नहीं रख सकती है। गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर पुलिस को नजदीकी न्यायालय के समक्ष पेश करना जरूरी होता है।

5. थाने में आपको भूखा नहीं रख सकती पुलिस

पुलिस रेगुलेशन के मुताबिक अगर पुलिस किसी व्यक्ति को हिरासत में या गिरफ्तार करके थाने लाती है तो उसको समय पर भोजन कराना पुलिस की जिम्मेदारी है और इसके लिए पुलिस को भत्ता भी मिलता है।

6. न्यायालय के आदेश के बगैर आपको हथकड़ी नहीं लगा सकती पुलिस

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के मुताबिक पुलिस हिरासत में लिए गए व्यक्ति और विचाराधीन बंदी को एक कारागार से दूसरे कारागार, थाने से न्यायालय में पेश करते समय या न्यायालय से कारागार ले जाते समय हथकड़ी नहीं लगा सकती इसके लिए पुलिस को न्यायालय से अनुमति लेनी होती है।

7. रिमांड पर लिए व्यक्ति का 48 घंटे में पुलिस को चिकित्सीय परीक्षण कराना होता है

अगर पुलिस किसी विचाराधीन बंदी को रिमांड पर लेती है तो 48 घंटे के भीतर पुलिस को रिमांड पर लिए गए व्यक्ति का चिकित्सीय परीक्षण अवश्य कराना होगा। अगर पुलिस ऐसा नहीं करती तो यह सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना होगी।

8. परिवार वालों को गिरफ्तारी की सूचना देना पुलिस की जिम्मेदारी

अगर आपको पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है तो आपको यह अधिकार मिला है कि आप अपने किसी संबंधी को इसकी सूचना दे सकें। इसके लिए पुलिस आपको टेलीफोन मुहैया कराएगी, अगर टेलीफोन की व्यवस्था नहीं है तो पत्राचार से इसकी सूचना भिजवाने की जिम्मेदारी पुलिस की है और यह अधिकार आम नागरिक को सर्वोच्च न्यायालय से मिला है।

9. पुलिस थाने पर भी ले सकती है जमानत

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 436 के तहत पुलिस को थाने से ही जमानत देने का अधिकार है। यदि किसी व्यक्ति ने ऐसा अपराध कर दिया है जो जमानतीय है तो ऐसे अपराध की जमानत पुलिस थाने पर ही ले सकती है।

10. रेप पीड़िता से महिला पुलिस की मौजूदगी में ही की जा सकती है पूछताछ

सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के मुताबिक थाने में पूछताछ के दौरान आने वाली महिलाओं के साथ पुलिस अभद्र व्यवहार अथवा अश्लील भाषा का प्रयोग नहीं कर सकती। विशेष रूप से सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बलात्कार पीड़िता के साथ पुलिस को उच्च कोटि की संवेदनशीलता का परिचय देना चाहिए। इसका कारण यह है कि वह महिला पहले से ही मानसिक व शारीरिक वेदना झेल चुकी होती है ऐसे में पुलिस को चाहिए कि ऐसी महिला के साथ संवेदनशीलता दिखाए सुप्रीम कोर्ट का यह भी आदेश है कि बलात्कार पीड़िता की रिपोर्ट महिला पुलिसकर्मी ही लिखेगी और पूछताछ भी महिला पुलिसकर्मी ही करेगी। अगर ऐसा संभव ना हो तो पूछताछ के समय कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद रहने जरूरी है और पीड़िता के परिवार की भी कोई महिला साथ रह सकती है।

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