हिन्द प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए जापान के साथ संबंध महत्वपूर्ण: मोदी - Live Aaryaavart

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा I ह्रदय राखि कौसलपुर राजा II, हरिजन जानि प्रीति अति गाढ़ी। सजल नयन पुलकावलि बाढ़ी॥, मंगल भवन अमंगल हारी I द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी II, हरि अनंत हरि कथा अनंता I कहहि सुनहि बहुबिधि सब संता II, दीन दयाल बिरिदु संभारी । हरहु नाथ मम संकट भारी।I, माता पिता की सेवा करें....बुजुर्गों का ख्याल रखें...अपनी प्रतिभा और आचरण से देश का नाम रौशन करें...

शनिवार, 30 नवंबर 2019

हिन्द प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए जापान के साथ संबंध महत्वपूर्ण: मोदी

relations-with-japan-important-for-peace-and-stability-in-indian-pacific-modi
नयी दिल्ली 30 नवम्बर, जापान के विदेश मंत्री टी मोतेगी और रक्षा मंत्री तारो कोनो ने आज यहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की और रणनीतिक, सुरक्षा और रक्षा सहयोग के द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की।जापान के दोनों नेता भारत के रक्षा और विदेश मंत्रियों के साथ टू प्लस टू प्लस डॉयलाग के लिए यहां आये हुए हैं।विदेश मंत्रालय के यहां जारी वक्तव्य में कहा गया है ,“ प्रधानमंत्री ने दोनों मंत्रियों का स्वागत किया और इस बात पर संतोष जताया कि दोनों पक्ष उनके और जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे के बीच बनी सहमति पर अमल करते हुए टू प्लस टू प्लस संवाद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस बैठक से दोनों देशों के बीच सामरिक, सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग मजबूत होगा। ”रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर टू प्लस टू डॉयलाग में भारत का नेतृत्व कर रहे हैं।प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-जापान संबंधों के चहुमुखी विकास के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के लोगों , क्षेत्र तथा दुनिया को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय बैठकों का नियमित आयोजन उनके मजबूत संबंधों का प्रमाण है।श्री मोदी ने कहा कि वह और प्रधानमंत्री आबे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती को बहुत महत्व देते हैं।उन्होंने कहा कि वह अगले महीने यहां होने वाले भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में श्री शिंजो का स्वागत करने को उत्सुक हैं। उन्होंने कहा कि भारत के जापान के साथ संबंध हिन्द प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और स्मृद्धि की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं और भारत की एक्ट ईस्ट पालिसी के केन्द्र में है। 

कोई टिप्पणी नहीं:

Loading...