पूर्णिया : सर्वोदय आश्रम में ग्रामीण शिक्षा व लोक कलामंच की परिचर्चा में गांधी जी व विनोबा भावे से जुड़ी यादें हुई ताजा - Live Aaryaavart

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शुक्रवार, 8 नवंबर 2019

पूर्णिया : सर्वोदय आश्रम में ग्रामीण शिक्षा व लोक कलामंच की परिचर्चा में गांधी जी व विनोबा भावे से जुड़ी यादें हुई ताजा

- बापू के चरण रानीपतरा में पड़ने के कारण स्व बैद्यनाथ चौधरी ने रानीपतरा में सर्वोदय आश्रम की नींव रखी एवं गांधी जी की विचारधारा को यहां के लोगों को अंगीकार करने को ले प्रेरित किया
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पूर्णिया : पूर्णिया पूर्व प्रखंड अंतर्गत रानीपतरा सर्वोदय आश्रम में ग्रामीण शिक्षा एवं लोक कलामंच की ओर से परिचर्चा का दूसरा चरण पेश किया गया। जिसमें पूर्णिया जिला के स्वतंत्रता आंदोलन में गांधी जी की भूमिका एवं पूर्णिया प्रेम था। इस विषय पर रानीपतरा, टीकापट्टी और पूर्णिया के कई लोगों ने अपने विचारों का आदान प्रदान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सर्वोदय आश्रम के अध्यक्ष बैद्यनाथ मेहता ने बताया कि स्वतंत्रता से पूर्व 1934 में गांधी जी रानीपतरा आए थे। इस बात की जानकारी हमारे दादा हरिहर मेहता से मुझे मिली है। बापू के चरण रानीपतरा में पड़ने के कारण स्व बैद्यनाथ चौधरी ने रानीपतरा में सर्वोदय आश्रम की नींव रखी एवं गांधी जी की विचारधारा को यहां के लोगों को अंगीकार करने को ले प्रेरित किया। जिसका नतीजा यह है कि आज भी रानीपतरा के लोग गांधी विचारधारा से जुड़े हैं। 

...पर्यटन क्षेत्र में रूप में विकसित करने की उठी मांग : 
समाजसेवी बैद्यनाथ सिंह चंद्रवंशी ने रानीपतरा को पर्यटन के रूप में विकसित करने की मांग की। कहा कि सभी सदस्यों व कमेटी के सहयोग से एक मांग पत्र मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को दिया जाएगा। टीकापट्टी के साहित्यप्रेमी राजेंद्र प्रसाद वेणु जी ने कहा कि पूर्णिया के टीकापट्टी में जब बापू आए तो स्वराज के लिए सबों को तैयार किया और अपना नमक सबों को बनाने की सलाह दी। गांधी जी के आने के बाद ही टीकापट्टी गांधीमय हो गया। डॉ अखिलेश जायसवाल ने कहा कि टीकापट्टी स्वराज आश्रम था। जो अाजादी के पहले क्रांतिकारियों, रंगकर्मियों और बुद्धिजीवियों का प्रशिक्षण केंद्र था। लेकिन आजादी के बाद सृजनात्मक आंदोलन के लिए रानीपतरा सर्वोदय आश्रम का निर्माण हुआ। जो सबों के लिए है।

...गांधी जी व विनोवा भावे की कर्मभूमि है : 
राम नारायण तूफान जी से और वीरेंद्र वर्मा से दस्तावेज लिखवाया गया और संवदिया पत्रिका में प्रकाशित करवाया गया। श्री कालिका नाट्य समिति का इतिहास रंगसंवाद पत्रिका भोपाल से छपवाया जिसका दस्तावेज नई दिल्ली में सुरक्षित है। संगीत अकादमी नई दिल्ली द्वारा रिसर्च ग्रंथ लिख कर संगीत नाट्य अकादमी नई दिल्ली को समर्पित किया गया। 1930 में बैद्यनाथ प्रसाद चौधरी, धनिक लाल प्रेमी, सूर्यनारायण मंडल क्रांतिकारियों के द्वारा कोशी कछार पर तिरंगा झंडा फहराया गया। स्वराज आश्रम टीकापट्टी की नींव डाली। गांधी के आने के पूर्व आश्रम की नींव डाली। कसबा और टीकापट्‌टी की महिलाओं ने गांधी को स्वर्ण आभूषण भूकंप पीड़ितों और देश सेवा के लिए दान दिया था। वहीं राष्ट्रपति पुरस्कृत सुश्री अर्चना देव कहती हैं कि पिता जी चरखा खरीद कर दिए। वह रानीपतरा सर्वोदय आश्रम आती और चरखा सीखती थी। 15 अगस्त और 26 जनवरी के दिन पहले प्रभातफेरी होती थी जो अब बंद सी हो गई है। समाजसेवी राजीव कुमार ने कहा कि आगामी दिनों मुख्यमंत्री टीकापट्टी आ रहे हैं हमारे रानीपतरा भी आएं ताकि ऐसी धरोहर को संरक्षित होने की प्रक्रिया की जा सके। समाजसेवी सुमित प्रकाश ने कहा कि जानकारों के अनुसार गांधी जी रानीपतरा से होते हुए टीकापट्टी गए। विनोबा जी कई बार आए। 15 गांव में सूती वस्त्र का निर्माण होता था। इस क्षेत्र में ध्रुव जैसे अन्य कई महान सेनानी रहे हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज फाउंडेशन के सचिव शिवाजी राम राव ने गांधी यात्रा की पहल की। युवा कवि हरेकृष्ण प्रकाश ने गांधी जी की अभिलाषा कविता पाठ करते हुए कहा कि रानीपतरा सर्वोदय स्थापना के लिए हरिहर मेहता, बासुदेव मेहता, देवचरन सिंह, आनंदी मेहता ने जमीन दान दी। खादी ग्रामोद्योग को पुनः बढ़ावा मिलना चाहिए। कार्यक्रम के संयोजक व मंच संचालनकर्ता ई शशि रंजन कुमार ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया।

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