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रविवार, 3 नवंबर 2019

योगी ने जनता से अपनी जड़ों की ओर लौटने को कहा

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नयी टिहरी, तीन नवंबर, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को जनता से अपनी जड़ों की ओर लौटने की अपील करते हुए कहा कि मां और मातृभूमि का कोई विकल्प नहीं हो सकता। उत्तराखंड राज्य के 20 वें स्थापना दिवस समारोह के तहत प्रदेश सरकार द्वारा पहाड़ों से पलायन रोकने के लिये विकास की रूपरेखा पर चर्चा करने हेतु आयोजित 'रैबार' कार्यक्रम के दूसरे संस्करण में योगी ने कहा, ‘‘हमें अपने जड़ों से जुड़ना चाहिए क्योंकि मां और मातृभूमि का कोई दूसरा विकल्प नहीं हो सकता।'’  राज्य से बाहर जाकर बस गये उत्तराखंडियों से अपने घरों की ओर लौटने का आह्वान करने वाले 'आवा आपणु घौर' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारियों को अपने गांवों में जाकर बसने की भी सलाह दी। मूल रूप से उत्तराखंड के पौड़ी जिले के निवासी योगी ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने हाईस्कूल की पढ़ाई टिहरी से की थी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की प्रसिद्ध टिहरी झील में साहसिक पर्यटन की असीम संभावनाओं के मद्देनजर इसके यह राज्य में रोजगार सृजन का एक बड़ा स्रोत बन सकती है। उन्होंने कहा कि राज्य में वायु और सौर उर्जा का केंद्र बनने की भी अच्छी संभावना है। योगी ने पिछले 19 सालों से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच संपत्ति और देनदारियों के लंबित पड़े बंटवारे के मसलों के समाधान पर भी बात की। राष्ट्र निर्माण में उत्तराखंड के योगदान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस हिमालयी राज्य से निकलने वाली गंगा और यमुना पूरे उत्तर भारत की सिंचाई करती हैं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि उनकी सरकार उत्तराखंड को पृथक राज्य के लिये संघर्ष करने वाली जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप बनाने का प्रयास कर रही है। रावत ने कहा, ‘‘हम विकास को दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों तक ले जाकर संतुलित विकास का प्रयास कर रहे हैं जो अलग राज्य के लिये संघर्ष करने वाली जनता का सपना था ।' उन्होंने राज्य में जैविक खेती को उनकी सरकार द्वारा दिये जा रहे प्रोत्साहन और जंगल की आग का मुख्य कारण मानी जाने वाली चीड की सूखी पत्तियों से ईंधन के उत्पादन के लिये उठाये जा रहे कदमों के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा, ‘‘राज्य में जैविक खेती के लिये 1,000 से भी ज्यादा क्लस्टर्स बनाये जा चुके हैं और राज्य के जंगलों के लिये पारंपरिक रूप से अभिशाप मानी जाने वाली सूखी चीड की पत्तियों को वरदान में बदला गया है । हम इनका प्रयोग ईंधन और बिजली पैदा करने में कर रहे हैं । '

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