शाहीन बाग से लौटकर सामाजिक वैज्ञानिक अनिंदो बनर्जी ने लाइव आर्यावर्त के आलोक कुमार को वस्तुस्थिति से अवगत कराया
पटना,15 जनवरी। दिल्ली के शाहीन बाग में 15 दिसंबर से जारी धरना 31वें दिन में प्रवेश कर चुका है। बुधवार को बड़ी संख्या में लोग धरना प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पहुंचे हैं। शाहीन बाग इलाके में सड़क पर चल रहे प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पंजाब से लोग पहुंचे, साथ ही भारतीय किसान यूनियन ने भी शाहीन बाग में पहुंचकर प्रदर्शनकारियों का हौसला बढ़ाया।यहां पर आए प्रदर्शनकारियों के लिए दिल्ली के शाहीन बाग में 'लंगर' की तैयारी की जा रही है। यहां पर काफी बड़ी संख्या में लोगोें के लिए लंगर लगाया जा रहा है। शाहीन बाग के जज़्बे को सलाम! अगर अपने देश और संविधान की आत्मा और ताक़त को समझना है तो खुद को भारतीय कहने वाले हर व्यक्ति को यहां कुछ समय जरूर गुज़ारना चाहिए। देश की एकजुटता और बहुरंगी संस्कृति से जिन्हें मोहब्बत है (और जिन्हें नहीं भी है) वह सभी शाहीन बाग की दिलेर महिलाओं से बहुत कुछ सीख सकते हैं। इतनी समर्पित, शांतिपूर्ण, प्रेरणादायी और स्वतःस्फूर्त नागरिक अभिव्यक्ति मैंने अपनी ज़िंदगी में पहले कभी नहीं देखी। पिछले चार हफ़्तों से कड़ाके की ठण्ड, बारिश और रात-दिन की परवाह न करते हुए अपने मिशन पर टिकी इन महिलाओं और उनके सहयात्रियों को किसी ख़ास धर्म या बिरादरी का बताना गलत होगा; यहां सभी 'हम भारत के लोग' प्रजाति के विशुद्ध भारतीय हैं, जिन्होनें देश की एकजुटता, समानता की भावना और सामाजिक सौहार्द को बचाये रखने के लिए मोर्चा खोल रखा है। दिलचस्प बात यह है कि इस मुहिम में अभी तक राजनैतिक पार्टियां नदारद हैं, हालाँकि दिल्ली के चुनाव के बाद शायद ऐसी स्थिति न रहे। नगद चंदों पर मनाही है, लेकिन कोई चाहे तो कम्बल और दवाई जैसे ज़रूरी सामग्रियों का सहयोग दे सकता है। एक हिस्से में बच्चों की पेंटिंग्स और अभिव्यक्तियाँ देखी जा सकती हैं, तो दूसरी ओर दीवारों पर दिल को छू लेने वाले एकजुटता के नारे! प्रदर्शन की जगह पर एक मंच बना हुआ है जहां से लोग बारी बारी से अपनी बात रखते हैं। बात रखने वालों में कवि भी हैं और शायर भी; स्थानीय निवासी भी हैं और अलग अलग जगहों से आये समर्थक भी; विद्यार्थी भी हैं और सांस्कृतिक-सामाजिक कर्मी भी; लेकिन भाव एक ही है - देश की एकजुटता! कई स्थानीय दुकानदारों ने ज़्यादा से ज़्यादा लोगों के बैठने या खड़े होने की जगह बनाने के लिए अपना कारोबार 31 दिनों से बंद कर रखा है। शाही नबाग का यह जज़्बा ही हिंदुस्तान है, जो अपने देश की महानता और लोकतंत्र की खूबसूरती का अहसास कराता है। इसी जज़्बे में भारत की भारतीयता कायम है।

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