बिहार : जनवरी; आखिर कब इस काली रात की सुबह होगी? - Live Aaryaavart

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रविवार, 5 जनवरी 2020

बिहार : जनवरी; आखिर कब इस काली रात की सुबह होगी?

खुद मुसहर शैलेश मांझी ही यह सवाल उठाने लगे हैं कि यह कैसा कल्याणकारी राज्य है? सबका साथ,सबका विकास और सबका विश्वास सरकार के नौकरशाह संवेदनशील नहीं हैं
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पटना,05 जनवरी। आखिर कब इस काली रात की सुबह होगी? आजादी के 72 सालों में 15 साल लालू-राबड़ी और 15 साल नीतीश कुमार राज्य में महादलित मुसहर समुदाय की तकदीर और तस्वीर में सुधार नहीं हो सकी है। इसके आलोक में खुद मुसहर शैलेश मांझी ही यह सवाल उठाने लगे हैं कि यह कैसा कल्याणकारी राज्य है? सबका साथ,सबका विकास और सबका विश्वास सरकार के नौकरशाह संवेदनशील नहीं हैं। बताते चले कि आर.ब्लॉक से दीघा तक सड़क निर्माण की चपेट में पड़कर विस्थापित हो गए हैं।विस्थापनकाल में पुनर्वास का सपना और 10 डिसमिल जमीन का देने का आश्वासन का झुनझुना थमा दिया गया। अब तो स्थिति यह है कि इस बाबत जानकारी लेने जाने पर काफी क्रोधित हो उठते हैं।सरकारी और गैरसरकारी संस्थाओं पर विफर उठते हैं। इन महादलितों को चेहरा लाल करना वाजिब हैं। अभी कपड़े और पन्नी से घेरकर रहने लायक झोपड़ी बनाएं हैं। जो झोपड़ी धूप व वर्षा के सामने असहाय बन जाती है।इसी में दिन काट रहे हैं। बताते चले कि संविधान के द्वारा प्रदत्त जीने के अधिकार में सरकार व गैर सरकारी संस्थाओं का साथ नहीं मिलने से कष्टकर जिंदगी ठंड में गुजार रहे हैं। दोशाला ओढ़ने वाले व रूम हीटर में रहने वाले अधिकारी इन गरीबों की सुधि नहीं ले रहे हैं।उड़ान टोला के मुसहर समुदाय के लोग 2019 में जान बचाकर 2020 में जाने के जुगाड़ में हैं। ठंड से  बचने के लिए प्लास्टिक,चमड़ा,टायर,जूता आदि जलाकर शरीर को उर्जा पहुंचा रहे हैं। पेयजल की सुविधा नहीं है जिसके कारण नाली का पानी से कपड़ा धोते हैं।

इन समस्याओं को लपेट कर सीएम को भेजा
बिहार के सीएम नीतीश कुमार जी के कार्यालय से प्रेषित विभागीय ई-मेल पर कदम नहीं उठाते हैं। यह आरोप लगाया गया है पटना जिले के जिलाधिकारी महोदय केवल कथित इंडिया के लोगों को और उनके बच्चों की सुधि लेते हैं और भारत के लोगों के लोगों एवं उनके बच्चों की तरफ आंख उठाकर देखते नहीं हैं। इसका मिसाल है पटना नगर निगम के पाटलिपुत्र अंचल में है वार्ड नम्बर-1.वार्ड पार्षद छठिया देवी हैं।इनके निर्वाचन क्षेत्र में रहते हैं उड़ान टोला मुसहरी में महादलित मुसहर।ये लोग वार्ड पार्षद के सजातीय हैं।जो इन दिनों आर.ब्लॉक से दीघा तक निर्मित फोरलाइन के किनारे रहते हैं।मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।ठंडी हवाओं की झोकों को न सहने वाली पन्नी व साड़ी से झोपड़ी बनाकर रहते हैं।यहां पर पानी और शौचालय का प्रबंध नहीं किया गया है।एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित मोटर पम्प पर जाकर पानी लाते हैं।30 परिवार की मुसहरी के गरीब लोग प्रति परिवार 100 रू.देकर पानी भरते हैं।वहीं मुर्गी फॉम के लोग मर गयी मुर्गी को लाकर बेचते हैं।यह मुर्गी फॉम से मृत मुर्गियों को भान में रखकर लाने वालों से मुर्गी 30 रू.में खरीद कर दिखला रही हैं।उत्तप्रदेश व राजस्थान की तरह हादसा न हो जाए,जहां बच्चे रोगग्रस्त होकर मौत के मुंह में समा रहे है और समा जाते है।इन समस्याओं को लपेट कर सीएम को भेजा गया है।

तब इस पर सरकार और नौकरशाहों को करना है क्या?
* आपके पास योजना है आवासीय भूमिहीनों को जमीन खरीद कर देना।
* आपके पास योजना है घरविहिन लोगों को आवास सुविधा देना।
* आपके पास योजना है सात निश्चच से महादलितों को लाभ पहुंचा।
* विस्थापित होने वाले लोगों को पुनर्वास करें।

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