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बुधवार, 1 जनवरी 2020

विचार : पाकिस्तान में प्रताड़ित हिन्दू भारत नही ंतो क्या इटली जाएगा

प्रजातंत्र में विरोध के नाम पर हिंसा क्षम्य नहीं: किशन रेड्डी सीएए पर अब पीछे हटने का सवाल ही नहींनागरिकता संशोधन कानून को सभी राज्यों को लागू करना होगा: केंद्रीय गृह राज्यमंत्री
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वाराणसी (सुरेश गांधी) । गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि आज देशभर में सीएए, एनआरसी और एनपीआर को लेकर चर्चा हो रही है। किसी भी मुद्दे पर सभी को विरोध करने का अधिकार है लेकिन हिंसा फैलाकर नहीं। उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून को लेकर कांग्रेस का रवैया बिल्कुल ही गैर जिम्मेदाराना है। देश का सबसे पुराना राजनीतिक दल होने के बावजूद कांग्रेस के नेताओं ने नागरिकता संशोधन कानून की आड़ में भड़के दंगों पर घटिया राजनीति की, वह बेहद अशोभनीय है। नागरिकता संशोधन कानून को सभी राज्यों को लागू करना होगा, कोई भी संविधान से बढ़कर नहीं है। उक्त बातें केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी ने सर्किट हाउस में प्रेस वार्ता के दौरान कहीं। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री दो दिनी दौरे पर मंगलवार को काशी पहुंचे थे। उन्होंने कल बाबा विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन करने के बाद गंगा आरती में भी भाग लिया था। उन्होंने कहा कि विपक्ष के सभी दल जागरूक करने की बजाय राजनीति कर रहे हैं। चाहे वह राहुल गांधी हो या प्रियंका या पूर्व सीएम अखिलेश यादव। सभी की जिम्मेदारी सही जानकारी देने की है, न कि गुमराह करने की। सीएए किसी के खिलाफ नहीं, इसलिए पीछे हटने का सवाल ही नहीं है। वह पूछना चाहते है कि आखिर सीएए किसके खिलाफ है, आपकी राय क्या है, आपका मकसद क्या है, प्रजातंत्र में आप विरोध के नाम पर हिंसा क्यों कर रहे हैं। दुनिया और आज का युवा विरोध के नाम पर हिंसा को उचित नहीं मानता है। इसका जवाब राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने तो अपने 1947 के नेशनल कांफ्रेंस में पाकिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यक सिख हिंदू को सुरक्षा देने की बात पाकिस्तान सरकार से की थी। साथ ही यह भी पास हुआ कि भारत सरकार वहां के अल्पसंख्यकों को सुरक्षा दिलाने के लिए पाकिस्तान सरकार पर दबाव बनाएं। 2003 में विपक्ष के नेता मनमोहन सिंह ने अटल बिहारी बाजपेई से पाकिस्तान से आए अल्पसंख्यकों को नागरिकता दिलाने के लिए मांग की थी। सीपीआई नेता प्रकाश करात भी बहुत बार इस बात को उठा चुके हैं। हमारे निर्णय से एक भी मुसलमान को प्रभावित नहीं होना पड़ेगा। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह इस बात को स्पष्ट कर चुके हैं की हम तो केवल पाकिस्तान में 30 फीसदी से घटकर 2 फीसदी हिंदुओं की बात कर रहे हैं जिनको सुरक्षा देने की पंडित जवाहरलाल नेहरू और लियाकत अली के बीच में समझौता में हुआ था।

हम प्रश्न पूछना चाहते हैं कि बाकी के हिंदू कहां गए पाकिस्तान से। अल्पसंख्यक हिंदू और सिखों को प्रताड़ित करने की बात यूएनओ और पाकिस्तान कोर्ट भी स्वीकार चुका है। हिन्दू, सिख कहा जायेगा। क्या इटली जाएगा। जबकि हमने भारत के मुसलमानों को ना केवल सुरक्षा दी है बल्कि उन्हें अधिक अधिकार भी दिया है। आज पूरे देश में पाकिस्तान और बांग्लादेश से आए अल्पसंख्यक बहुत ही खराब जिंदगी जी रहे हैं। दिल्ली में ही पाकिस्तान हिंदू बस्ती, पाकिस्तान सिख बस्ती विकसित हो चुकी है। यह आरोप भी गलत है कि हमने कोई काम जल्दीबाजी में किया है। हमारा यह बहुत पुराना एजेंडा है। 2015 में हम इसे लोकसभा में भी लेकर आए थे। दो दिनों तक चर्चा भी हुई। राज्यसभा में भी बिल पेश हुआ लेकिन पास नहीं हुआ। एक बार फिर 2019 में हमने बिल को पेश किया और वह संविधान के अनुसार पास भी हो गया। जनता ने भी हमें इसके लिए माइंडेड दिया है। हम अपनी जिम्मेदारियों को निभा रहे हैं।  कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वह हिंसा को भड़काने में सहयोग कर रहे हैं। उन्हें सबसे पहले हिंसा करने वालों का विरोध करते हुए शांति की अपील करनी चाहिए। हिंसा करने वालों के समर्थन में बयान देना देश हित में नहीं है। गरीब परिवार से आने वाले पुलिसकर्मियों पर बरसात की तरह ईंट बरसाने वाले लोगों को समझाना चाहिए। इसके विपरीत वे मुस्लिम वर्ग को गुमराह कर देश के खिलाफ भड़का रहे हैं यह सबसे बड़ा क्राइम है। एक गृहमंत्री के नाते हम कहना चाहते हैं कि हम पूरी जिम्मेदारी से जांच करा रहे हैं। कोई भी बेगुनाह फसेगा नहीं और कोई भी बलवाई बचने नहीं पाएगा। वह चाहे जिस भी दल का हो। एक प्रश्न के जवाब में जी किशन रेड्डी ने कहा कि दिल्ली में जिस हिंसा से विरोध की शुरुआत हुई उसमें आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के नेताओं द्वारा भड़काने की बात सामने आई है।

गृहमंत्री ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि राहुल कह रहे हैं इससे टैक्स बढ़ेगा। राहुल को सीए और जीएसटी को समझना चाहिए। पता नहीं उनको कौन सा पंडित ट्यूशन पढ़ाता है। जो इस तरह की बातें करते हैं। उन्हें पहले सी ए ए को समझना चाहिए फिर सड़क पर आना चाहिए। कांग्रेस तो सीएए एनपीआर को भी जोड़कर विरोध शुरू कर दी है। जबकि उसी ने 2011 में एनपीआर लागू किया था। स्वयं उनके गृह मंत्री रहे चिदंबरम एनपीआर को जरूरी बताते रहे हैं। एनपीआर जरूरी भी है क्योंकि इससे एससी, एसटी, गरीब, मजदूर, किसान, व्यापारी सभी का विवरण मिल सकेगा। इससे उनके लिए लाभकारी योजनाएं बनाई जा सकेंगी। जरूरत पड़ने पर एससी एसटी को अधिक आरक्षण दिया जा सकेगा। आज जो लोग एनपीआर का विरोध कर रहे हैं जबकि कांग्रेस और विपक्षी दलों के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकारें पिछले 8 माह से 2021 के एनपीआर को लेकर बैठकें, प्रशिक्षण की तैयारी कर रही हैं। एनपीआर में जो चीजें शामिल की जाएंगी वही सब कुछ तेलंगाना सरकार ने अपने एक सर्वे में लिया तब ओवैसी कुछ नहीं बोले और जब हमने बात की तो वह सबसे बड़े विरोधी बन गए।  एनपीआर को लेकर विरोध के लिए जुलूस पर निकलने वाले, पुलिस पर पत्थर चलाने वाले, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों से हमारी नए साल में अपील है की एक बार वह सोचे कि वह किस कार्य के लिए निकल रहे हैं, क्या वह उनके खिलाफ है, सीएए और एनपीआर का एक भी क्लास किसी भी देशवासी के खिलाफ नहीं है। इसलिए सभी नए साल में सरकार के साथ मिलकर देश को और ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए कार्य करें। हमने भ्रष्टाचार का मुंह खोलें राहुल गांधी और विपक्ष को कोई मौका नहीं दिया इसलिए विपक्षी पार्टियां देश को बांटने पर उतारू हो गई हैं। हमने इस कानून को अंबेडकर के संविधान के अनुसार पास किया है। यह किसी राज्य से अलग नहीं है। कुछ लोगों द्वारा इमरजेंसी से तुलना करने पर गृहमंत्री ने मीडिया से कहा की आज आप जैसे प्रश्न पूछ रहे हैं तब यह भी अधिकार नहीं था। जुलूस धरना भाषण प्रदर्शन तोड़फोड़ की तो कोई सोच भी नहीं सकता था। हम लोग इमरजेंसी का विरोध कर यहां तक पहुंचे हैं। इसलिए इमरजेंसी जैसी स्थिति पैदा करने का प्रश्न ही नहीं उठता है। गृह मंत्री ने जनरल रावत  को पहला सीडीएस नियुक्त करने पर कहा कि यह कारगिल युद्ध के बाद गठित एक कमेटी का निर्णय है उसी के अनुसार किया गया है।

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