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मंगलवार, 11 फ़रवरी 2020

बिहार : राजनीतिक रसूख वाला ब्रजेश ठाकुर अब रहेगा जेल में

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नई दिल्ली (आर्यावर्त संवाददाता) : मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस में दिल्ली के साकेत कोर्ट ने दोषी ब्रजेश ठाकुर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।इसके साथ ब्रजेश ठाकुर को 20 लाख जुर्माना लगाया है जिसमें 4 लाख पीड़िता को मुआवजा दिया जाएगा।रवि रोशन को आजीवन कारावास व 1.5 लाख जुर्माना।विकास को आजीवन कारावास व 14 लाख जुर्माना और गुडु पटेल को आजीवन कारावास दिया गया है।

ब्रजेश के साथ ही इन दोषियों को भी मिली सजा 
1 - ब्रजेश ठाकुर आजीवन कारावास 20 लाख जुर्माना जिसमे 4 लाख पीड़िता को मऊआजा दिया जाएगा।
2 - रवि रोशन आजीवन कारावास 1.5 लाख जुर्माना
3 - विकास आजीवन कारावास 14 लाख जुर्माना
4 गुडु पटेल-आजीवन कारावास

इन दोषियों को मिली उम्रकैद की सजा 
1- किरण कुमारी
2- मधु कुमारी
3- रामानुज ठाकुर
4- मीनू देवी
5- विजय तिवारी ,
6 - कृष्णा कुमार 

10 साल की सजा पाए दोषी
1- नेहा कुमारी
2- हेमा मशीह
3- अश्वनी कुमार
4- मीनू देवी
5 - मंजू देवी
6- चांदा देवी
7 - रमा शंकर
8 - इन्दु कुमारी को 3 साल
9 - रोजी रानी 6 महीने​

टिस की रिपोर्ट से हुआ था खुलासा
बताते चले कि TISS (Tata institute of social sciences) की विंग ‘कोशिश’ की रिपेार्ट में बालिका गृह कांड का खुलासा हुआ था, जिसकी रिपोर्ट चौंकाने वाली थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि बालिका गृह में करीब 40 से अधिक बच्चियों के साथ यौनशोषण किया गया था। नाबालिग बच्चियों ने जो बताया था वो बातें रोंगटे खड़े करने वाली थी। इस रिपोर्ट के खुलासे के बाद तहलका मच गया था।  रिपोर्ट के मुताबिक ब्रजेश ठाकुर की संस्था सेवा संकल्प एवं विकास समिति द्वारा संचालित बालिका गृह में नाबालिग बच्चियों के साथ बलात्कार सहित अन्य वीभत्स घटनाओं को अंजाम दिया जाता था। रिपेार्ट में हुए खुलासे के बाद 31 मई 2018 को मुजफ्फरपुर महिला थाने में केस दर्ज किया गया था। बाद में बालिका गृह कांड को लेकर राजनीतिक गलियारों में तूफान खड़ा हो गया था। विधानसभा से लेकर लोकसभा तक में विपक्षी दलों के नेताओं ने बवाल काटा था। बाद में इसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई थी।

मुजफ्फरपुर शेल्टर होम
दिल्ली की साकेत कोर्ट ने बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में एक आश्रयगृह में कई लड़कियों के यौन शोषण और शारीरिक उत्पीड़न के मामले में ब्रजेश ठाकुर को मंगलवार (11 फरवरी) को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ कुलश्रेष्ठ ने ठाकुर को उसके शेष जीवन के लिए उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने ठाकुर को 20 जनवरी को पॉक्सो कानून और भारतीय दंड संहिता (भादंसं) की संबंधित धाराओं के तहत बलात्कार तथा सामूहिक बलात्कार का दोषी ठहराया था। दिल्ली स्थित साकेत कोर्ट ने 4 फरवरी को सजा पर बहस पूरी कर ली थी। 11 फरवरी सजा की तारीख मुकर्रर की गई थी।अदालत ने अपने 1,546 पन्नों के फैसले में ठाकुर को धारा 120बी (आपराधिक षड्यंत्र), 324 (खतरनाक हथियारों या माध्यमों से चोट पहुंचाना), 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाना), उकसाने, पॉक्सो कानून की धारा 21 (अपराध होने की जानकारी देने में विफल रहने) और किशोर न्याय कानून की धारा 75 (बच्चों के साथ क्रूरता) के तहत भी दोषी ठहराया है। ब्रजेश ठाकुर की संस्था सेवा संकल्प एवं विकास समिति द्वारा संचालित बालिका गृह में नाबालिग बच्चियों के साथ बलात्कार सहित अन्य वीभत्स घटनाओं को अंजाम दिया जाता था। रिपेार्ट में हुए खुलासे के बाद 31 मई 2018 को मुजफ्फरपुर महिला थाने में केस दर्ज किया गया था। बाद में बालिका गृह कांड को लेकर राजनीतिक गलियारों में तूफान खड़ा हो गया था। विधानसभा से लेकर लोकसभा तक में विपक्षी दलों के नेताओं ने बवाल काटा था। बाद में इसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई थी।उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के मुताबिक इस मामले में सुनवाई प्रतिदिन चली और छह माह के भीतर पूरी कर ली गई। अदालत ने 30 मार्च, 2019 को ठाकुर समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे। अदालत ने बलात्कार, यौन उत्पीड़न, नाबालिगों को नशा देने, आपराधिक धमकी समेत अन्य अपराधों के लिए मुकदमा चलाया था।ठाकुर और उसके आश्रय गृह के कर्मचारियों के साथ ही बिहार के समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों पर आपराधिक षड्यंत्र रचने, ड्यूटी में लापरवाही और लड़कियों के उत्पीड़न की जानकारी देने में विफल रहने के आरोप तय किए गए थे। इन आरोपों में अधिकारियों के प्राधिकार में रहने के दौरान बच्चों पर क्रूरता के आरोप भी शामिल थे जो किशोर न्याय कानून के तहत दंडनीय है।उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर इस मामले को सात फरवरी, 2019 को बिहार के मुजफ्फरपुर की स्थानीय अदालत से दिल्ली के साकेत जिला अदालत परिसर की पॉक्सो अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया था। यह मामला टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टिस) द्वारा 26 मई, 2018 को बिहार सरकार को एक रिपोर्ट सौंपने के बाद सामने आया था। यह रिपोर्ट उसी साल फरवरी में टिस ने बिहार समाज कल्याण विभाग को सौंपी थी।

राजनीतिक रसूख वाला अब रहेगा जेल में 
बालिका गृहकांड का मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर है और जिस तरह के नियमों की अनदेखी करके बालिका गृह का संचालन बिना रोकटोक चल रहा था और सरकारी फंड भी मिल रहा था, उससे पता चलता है कि उसकी पैठ सियासी गलियारों से लेकर ब्यूरोक्रेसी के कॉरिडोर तक थी। उनकी मदद से वह हर चीज को मैनेज कर लिया करता था।एनजीओ के साथ ही वह कई तरह के अखबार का भी प्रकाशन किया करता था और इसका दफ्तर बालिका गृह के प्रांगण में ही था। सबसे दिलचस्प बात ये थी कि टिस की रिपोर्ट के बाद उसके एनजीओ को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था और इसके बावजूद उसे भिखारियों के लिए आवास बनाने के वास्ते हर महीने 1 लाख रुपये का प्रोजेक्ट दिया गया था। हालांकि, बाद में इस प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया गया था।

 ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी ने कहा
11फरवरी 2020 , मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड के मुख्य अभियुक्त ब्रजेश ठाकुर व अन्य आरोपियों को आज सजा सुनाई गई है ऐपवा ने इसे न्याय की जीत बताया है और कहा है कि यह बिहार की महिलाओं के लम्बे चले आंदोलन और शेल्टर होम की लड़कियों द्वारा तमाम धमकियों के बावजूद अपने बयानों पर टिके रहने से संभव हुआ है। हालांकि पुलिस , सीबीआई और सरकार ने इस कांड के राजनीतिक संरक्षकों का चेहरा सामने आने से बचा लिया है।इसे लेकर आगे लड़ाई जारी रहेगी।ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी ने कहा है कि हम उम्मीद कर सकते हैं कि बिहार  सरकार इस फैसले से सबक लेगी और अब  मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड की तरह दूसरा कांड नहीं होगा।बिहार में गरीब, अनाथ लड़कियां सुरक्षित रह सकें इसके लिए सरकार कदम उठायेगी. मीना तिवारी ने बिहार के सभी विपक्षी दलों को भी धन्यवाद दिया । उन्होंने कहा कि भाकपा माले ने विधानसभा में  इस सवाल को उठाया था और विपक्ष एकजुट होकर  महिलाओं के समर्थन में उतरा था।बाद में कई लोगों ने  हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अलग अलग याचिका दायर की थी। बिहार के आम जनमानस ने भी इस घटना में काफी संवेदनशीलता दिखाई थी। ऐपवा समेत सभी महिला संगठन अब भी सचेत हैं और बिहार की बेटियों, महिलाओं की लड़ाई जारी रहेगी।

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