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शनिवार, 1 फ़रवरी 2020

अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की कवायद, मध्यम वर्ग को राहत, गाँव-किसान पर जोर

budget-2020
नयी दिल्ली 01 फरवरी, सरकार ने वित्त वर्ष 2020-21 के बजट में मध्यम वर्ग को आयकर में राहत और कृषि से जुड़े क्षेत्रों तथा ग्रामीण विकास के लिए संसाधनों का प्रावधान करने के साथ ही बुनियादी ढांचे पर व्यय के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों में तेजी लाने की काेशिश की है। बजट में वर्ष 2024-25 तक पाँच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य और सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करने की कवायद की गयी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में करीब आठ लाख करोड़ रुपये के घाटे का बजट पेश किया। सरकार ने राजकोषीय घाटे में कमी लाने के लिए आईडीबीआई बैंक में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचने और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) में प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के जरिये विनिवेश कर पूंजी जुटाने का ऐलान किया है। बही खाता के रूप में आयी वित्त मंत्री करीब ढाई घंटे के अपने बजट भाषण में अर्थव्यवस्था की नींव को मजबूत बताते हुये कहा कि भारत अभी दुनिया की पाँचवी बड़ी अर्थव्यवस्था है। चालू वित्त वर्ष में सरकारी व्यय में बढ़ोतरी होने और राजस्व संग्रह में कमी आने के कारण राजकोषीय घाटा बढ़कर जीडीपी के 3.8 प्रतिशत पर पहुँचने का अनुमान है। अगले वित्त वर्ष में इसे 3.5 प्रतिशत तक सीमित रखने का लक्ष्य तय किया गया है। सरकार ने अगले वित्त वर्ष के लिए कुल 30.42 लाख करोड़ रुपये का बजट तैयार किया है जबकि राजस्व प्राप्तियों का लक्ष्य 22.46 लाख करोड़ रुपये रखा गया है। इस प्रकार यह करीब 7.96 लाख करोड़ रुपये के घाटे का बजट है। इसमें 5.36 लाख करोड़ रुपये डेट बाजार से और 2.11 लाख करोड़ विनिवेश से जुटाये जायेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बजट की तारीफ करते हुये कहा कि इसमें घोषित नये सुधारों से अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी, उसकी नींव मजबूत बनेगी और हर नागरिक आर्थिक रूप से सशक्त बनेगा। उन्होंने कहा, “इस बजट में विजन भी है और एक्शन भी। मुझे विश्वास है कि यह आय और निवेश के साथ माँग और खपत को बढ़ायेगा तथा वित्तीय प्रणाली और ऋण उठाव में तेजी लायेगा। यह मौजूदा आवश्यकताओं के साथ ही इस दशक में भविष्य की अपेक्षाओं की भी पूर्ति करेगा।” देश के इतिहास में पहली बार एक वित्त वर्ष के लिए दो कर व्यवस्था को लागू की गयी है जिसमें करदाताओं के पास नयी और पुरानी कर व्यवस्था में एक के चयन करने का विकल्प होगा। गाँव, किसान और मध्यम वर्ग को राहत देने के साथ ही लाभांश वितरण कर से कंपनियों को छूट दिये जाने के बावजूद शेयर बाजार को बजट रास नहीं आया और भारी बिकवाली देखी गयी। सेंसेक्स करीब एक हजार अंक और निफ्टी 300 अंक टूट गया जिससे निवेशकों को 3.46 लाख करोड़ रुपये की चपत लगी। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2020-21 के आम बजट को किसानों, गरीबों, वेतनभोगी मध्यम वर्ग और व्यवसायी वर्ग को लाभ पहुँचाने वाला सर्वस्पर्शी एवं कल्याणकारी बताते हुये इसकी सराहना की और विश्वास जताया कि यह बजट देश के विकास को नयी गति देगा और रोज़गार सृजित करेगा। सम्पूर्ण विपक्ष ने इस बजट को जहाँ दिशाहीन, जनविरोधी और बेरोजगारी एवं आर्थिक संकट की हकीकत से मुँह चुराने वाला बताया, वहीं सत्ता पक्ष ने इसे ‘विजन और एक्शन’ से पूर्ण तथा कल्याणकारी बजट करार दिया है। उद्योग जगत ने इसे स्वागत योग्य बजट बताया है। प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक प्रोफेसर एम.एस. स्वामीनाथन ने 2020-21 के बजट की प्रशंसा करते हुए कहा है कि उन्हें बहुत ही खुशी है कि सरकार ने कृषि क्षेत्र और ग्रामीण विकास के लिए एक विस्तृत योजना प्रस्तुत की है। उन्होंने कहा, “यह बहुत ही आवश्यक है क्योंकि देश में अधिकतर लोगों की आजीविका कृषि है।”  

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