बिहार : बिजली विभाग के कर्मचारी और इंजीनियर 11 फरवरी को हड़ताल पर - Live Aaryaavart

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सोमवार, 10 फ़रवरी 2020

बिहार : बिजली विभाग के कर्मचारी और इंजीनियर 11 फरवरी को हड़ताल पर

आम लोगों को असुविधा न हो, इस वजह से हड़ताल को एस्मा यानी एसेंसियल सर्विसेस मेंटेनेंस एक्ट की परिधि में शामिल कर दिया गया है। कल दिल्ली विधानसभा का चुनाव परिणाम आने वाला है।कल ही भारत और न्यूजीलैंड के बीच तृतीय अंतिम एक दिवसीय मैच है।अगर हड़ताल होती है तो टी.वी.दर्शक मायूष हो जाएंगे
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पटना,10 फरवरी (आर्यावर्त संवाददाता) । बिजली विभाग के कर्मचारी और इंजीनियर 11 फरवरी को हड़ताल पर जा रहे हैं। हड़ताल का कारण कंपनी का निजीकरण बताया जा रहा है। वहीं इसे लेकर ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव ने कर्मचारियों को चेतावनी दी है।विभाग के सीएमडी सह ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने कंपनी के निजीकरण को केवल अफवाह बताया है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर बिजली कंपनी के इंजीनियर या फिर कर्मचारी निजीकरण के सवाल पर हड़ताल पर गए तो उन्हें बर्खास्त किया जा सकता है। उनपर भारतीय दंड विधान संहिता के तहत भी कार्रवाई संभव है।साथ ही मंत्री ने ये भी कहा कि कर्मचारियों पर भारतीय दंड विधान संहिता के तहत कार्रवाई की जाएगी।वहीं आम लोगों को असुविधा न हो, इस वजह से हड़ताल को एस्मा यानी एसेंसियल सर्विसेस मेंटेनेंस एक्ट की परिधि में शामिल कर दिया गया है। ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव के बयान पर पावर इंजीनियरिंग सर्विस एसोसिएशन (पेसा) के महासचिव सुरेंद्र कुमार ने कहा कि राज्य सरकार की एस्मा लगाने की घोषणा से यहां कोई डरने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्यभर के विद्युत अभियंता और कर्मी 11 फरवरी की सुबह छह बजे से 24 घंटे की हड़ताल पर रहेंगे।  महासचिव सुरेंद्र कुमार ने कहा कि राज्य सरकार की एस्मा लगाने की घोषणा से यहां कोई डरने वाला नहीं है। कुमार ने कहा कि 1979 में 39 दिन, 1984 में 18 दिन तथा 1998 में 11 दिन एस्मा लग चुका है। सरकार हड़ताल रोकना चाहती है तो यह आदेश जारी करे कि विद्युत कंपनी का निजीकरण नहीं होगा। पेसा महासचिव ने कहा कि पेसा और जेसा (पावर जूनियर इंजीनियर सर्विस एसोसिएशन) कानूनी रूप से 1959 से हैं। 29 जून 2018 को पेसा के वार्षिक सम्मेलन में विद्युत कंपनी के सीएमडी प्रत्यय अमृत ने भाग लिया था तथा अभियंताओं को भाग लेने के लिए अवकाश की स्वीकृति भी दी थी। 

11 फरवरी को है बिजलीकर्मियों की हड़ताल
बता दें कि पहले से ही बिजलीकर्मियों ने कहा है कि 11 फरवरी की सुबह से ही कंपनी के कामगार और इंजीनियर हड़ताल पर रहेंगे। बिजली कंपनी के निजीकरण को हड़ताल का कारण बताया जा रहा है।  बता दें कि वर्ष 2007 में पटना उच्च न्यायालय ने बिजली कर्मियों की हड़ताल के संबंध में यह टिप्पणी की थी कि अनिवार्य सेवा की वजह से हड़ताल पर वे नहीं जा सकते। आम लोगों को असुविधा नहीं हो इस वजह से एसमा लगाया गया है।

पेसा का निबंधन ही नहीं तो कैसे चल रहा संगठन
प्रत्यय अमृत ने कहा कि दिलचस्प बात यह है कि बिजली कंपनी के इंजीनियरों के एसोसिएशन पेसा का कोई निबंधन तक नहीं। निबंधन महकमे ने बिजली कंपनी को इस बारे में लिखित रूप से सूचना भी भेजी है। बगैर निबंधन के कैसे यह संगठन चल रहा यह हैरान करने वाली बात है। यह पूरी तरह अवैधानिक है कि आप निजीकरण का भ्रम फैलाकर हड़ताल को उकसाएं।

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