बिहार :आउटसोर्सिंग समाज के दबे-कुचले समुदाय के अधिकारों पर हमला : माले - Live Aaryaavart

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सोमवार, 10 फ़रवरी 2020

बिहार :आउटसोर्सिंग समाज के दबे-कुचले समुदाय के अधिकारों पर हमला : माले

  • सफाई मजदूरों की बेहतर मजदूरी व स्थाई नियोजन की गारंटी करे सरकार.
  • सीएए-एनआरसी व एनपीआर के बाद पदोन्नति में एससी-एसटी के आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला दलित’-वंचित समुदायों के अधिकारों पर एक और हमला.
  • नगर विकास सहित जनसरोकार के मुद्दों वाले विभागों से भाजपा को मुक्त करें नीतीश कुमार
  • 11 फरवरी को भाकपा-माले का राज्यव्यापी विरोध दिवस
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पटना 10 फरवरी (आर्यावर्त संवाददाता)  नीतीश-भाजपा सरकार द्वारा सफाई मजदूरों को आउटसोर्स के तहत काम लेने का निर्णय सफाई मजदूरों के रोजी रोटी और आजीविका के अधिकार पर सीधा हमला है. नीतीश सरकार बिहार के सफाई मजदूरों को निजी मालिकों का गुलाम बना देना चाहती है. वह इन कर्मचारियों को नियमित काम के अधिकार से बाहर कर रही है. नीतीश-भाजपा सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग ने राज्य के सभी 143 नगर निगम, निकाय के सफाई मजदूरों सहित ग्रुप डी के सभी सृजित पदों को मृत घोषित कर स्थाई पदों को समाप्त कर संगठित कानूनी लूट वाले निजीकरण, एनजीओकरण के तहत सफाई कार्य को आउटसोर्सिंग के माध्यम से एजेंसियों, निजी कंपनियों से कराने का निर्णय किया है. उक्त बातें माले नेताओं ने आज पटना में संवाददाता सम्मेलन में कही. संवाददाता सम्मेलन को भाकपा-माले के राज्य सचिव कुणाल, भाकपा-माले राज्य स्थायी समिति के सदस्य व बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी-ऐक्टू के अध्यक्ष आरएन ठाकुर, भाकपा-माले बिहार राज्य कमिटी के सदस्य व बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ-ऐक्टू के महासचिव श्यामलाल प्रसाद, भाकपा-माले विधायक सुदामा प्रसाद और भाकपा-माले राज्य कमिटी सदस्य सह ऐक्टू के राष्ट्रीय सचिव रणविजय कुमार ने संबोधित किया. इतना ही नहीं जो दैनिक सफाई मजदूर वर्तमान में कार्यरत हंै, उन्हें भी निजी एजेंसियों के मार्फत काम पर लेने का निर्णय सुनाया है, जिसके खिलाफ पूरे बिहार के लगभग 30 हजार से अधिक सफाई मजदूर अपने रोजी-रोटी और बुनियादी अधिकार को बचाने के सवाल पर पिछले एक सप्ताह से हड़ताल पर हैं। बिहार की गरीब, मध्यवर्गीय जनता नगर निगम-निकायों में अपनी मेहनत की कमाई की राशि जो टैक्स के रूप में जमा करती है, उसकी यह कानूनी लूट है. बिहार के हर नागरिक को यह अच्छे से पता है कि निजी कम्पनी के मार्फत काम करने पर एक महीने में एक सफाई मजदूर पर लगभग 10 हजार रुपया निजी एजंेसी अथवा कम्पनियां लूट रही है. सरकार के इस निर्णय का विरोध और सफाई मजदूरों के पक्ष में बिहार के हर नागरिक को आवाज बुलंद करना चाहिये.

कल को यही सरकार ‘एनआरसी-एनपीआर’ के तहत नागरिकता साबित नहीं कर सकने के नाम पर इन सफाई मजदूरों को डिटेंशन कैंप में डालने वाली है. इन काले कानूनों की मार भी सबसे अधिक मजदूर, दलित व कमजोर समुदाय के लोगों पर ही पड़ने वाले हैं. सुप्रीम कोर्ट द्वारा पदोन्नति में एससी-एसटी के आरक्षण के संबंध में कहा है कि यह कोई फंडामेंटल अधिकार नहीं है. इस फैसले से इन समुदायों के अधिकारों का हनन ही होगा. पदोन्नति में आरक्षण बरकरार रहना चाहिए. नीतीश-भाजपा सरकार में नगर विकास एवं आवास विभाग पिछले 15 साल से भाजपा के पास है, नगर विकास विभाग के भाजपा मंत्री व मुख्यमंत्री नीतीश के नेतृत्व में समाज के सबसे दबे-कुचले, लगभग 99 प्रतिशत महादलित व अतिपिछड़ा समुदाय से सम्बंध रखने वाले ये सफाई मजदूर जो सामाजिक न्याय और विकास के प्रबल दावेदार हंै, इन्हें न्याय और अधिकार देने के बजाए उल्टे इनकी रोजी-रोटी और जीवन जीने के कानूनी अधिकार पर ही क्रूरतम हमला बोल दिया है। सुसाशन और सामाजिक न्याय की 15 वर्षीय डबल इंजन की नीतीश सरकार ने सफाई मजदूरों पर डबल हमला करते हुए इन्हें काम से हटा जबरन निजी कम्पनियों, एजेंसी मालिकों का गुलाम बना रही है। नीतीश सरकार में 15 वर्षों से लगातार जनसरोकारों वाला नगर विकास एवं आवास विभाग,स्वास्थ्य विभाग,श्रम संसाधन विभाग,खनन आदि विभाग भाजपा के पास है। इन विभागों के भाजपाई मंत्रियों द्वारा लिए जा रहे मालिक पक्षीय निर्णयों के कारण प्रभावित बालूमजदूर, आशाकर्मी, आईटीआई कर्मी से लेकर अब सामाजिक हैसियत में सर्वाधिक कमजोर सफाई मजदूर भी स्वतंत्र भारत मे आजादी के 70 वर्षों बाद भाजपा के प्रकोप से अपनी जीविका के अधिकार को बचाने के लिये लगातार रोजी रोटी जैसे जिंदा रह सकने के न्यूनतम सवाल पर लड़ने को मजबूर बना दिए गए हंै और इसी निकृष्टतम शासन को सुसाशन, विकास का नाम देकर प्रचारित किया जा रहा है।

हमारी पार्टी मांग करती है कि  सफाई मजदूरों के रोजी-रोटी और जिंदगी से जुड़े ‘बेहतर मजदूरी और स्थायी कार्यों में स्थाई नियोजन’ के अधिकार से वंचित करने वाला नीतीश सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग के आदेश संख्या 2503, तिथि 03-05-18 एवं 1435, तिथि 05-03-19 सहित अन्य सभी आदेशों, निर्णयों को रद्द किया जाय और बिहार के सभी नगर निगमों, परिषद व नगर पंचायतों में आबादी के अनुरूप सफाई मजदूर सहित अन्य सभी लाखों पदों का स्थाई सृजन किया जाय। वर्ष 2005 से अर्थात 15 वर्षों से लागातार जनसरोकार वाले विभाग जो भाजपा के जिम्मे है नगर विकास सहित उन सभी विभागों को मुख्यमंत्री नीतीश भाजपा के नियंत्रण से मुक्त करें। हमारी पार्टी भाकपा (माले) सफाई मजदूरों का पूरे बिहार में जारी आंदोलन का न सिर्फ समर्थन करती है बल्कि आगामी 11 फरवरी को पूरे बिहार में इस सवाल पर प्रतिरोध दिवस मनाने का आह्वान करती है.

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