बिहार : ओ जाने वाली हो सके तो लौट के आना - Live Aaryaavart

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गुरुवार, 5 मार्च 2020

बिहार : ओ जाने वाली हो सके तो लौट के आना

अगले जन्म में रेजी ओस्ता पापा और क्रिस्टी रेजी मां बने.5 साल पहले अज्ञात बीमारी से एस्ले भइया प्रभु के प्यारे हो गए.5 साल बाद मैं भी अज्ञात बीमारी के शिकार होकर मम्मी और पापा को छोड़ दिए.समझा जाता है कि वह अनुवांशिक बीमारियाें से पीड़ित थीं.जो पीढ़ी दर पीढ़ी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में जाती है. इसका कारण, वह गुणसूत्र होते हैं, जो परिवार के एक सदस्य को अपने माता-पिता से मिलते हैं. यही गुणसूत्र एक व्यक्ति के गुणों को एक से दूसरे में लेकर जाते हैं. जीन के जरिए आने वाली इन बिमारियों को जेनेटिक या हेरिडीटरी डिजीज कहा जाता है. जानते हैं उन बीमारियों के बारे में जो अनुवांशिक रूप से होती हैं
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पटना,04 मार्च. क्रिश्चियन वेलफेयर सोसाइटी के महासचिव स्व.ए.ए.ओस्ता की पोती एंजेलीना रेजी ओस्ता का निधन 3 मार्च को हो गया.रेजी ओस्ता और क्रिस्टी रेजी की सुपुत्री थीं एंजेलीना रेजी ओस्ता.अज्ञात बीमारी की चपेट में पड़ने से परिजनों काफी इलाज कराएं .आखिरकार विधि के विधान के तहत इहलीला समाप्त हो गयी. हर जन एंजेलीना को चले जाने पर दुख व्यक्त कर रहे हैं. नेपाल में रहने वाले रोनी रेमी कहते है कि वह मेरी भगिनी थीं. रोनी कहते हैं कि मैं अभी काठमांडू में हूं.फ्लाइट नहीं मिलने के कारण पटना नहीं आ सक रहा हूं.हां दिल पर पत्थर रखकर कहता हूं कि भगिनी को मिट्टी देने नहीं आ सक रहा हूं.बचपन में भगिनी को बहुत खेलाते थे..वह याद आ रहा है...इतना कहकर रोने लगे..आज  न्यू पाटलिपुत्र स्थित चर्च में मिस्सा हुआ. इसके बाद कुर्जी कब्रिस्तान में दफन कर दिया.इस बात की जानकारी एंजेलीना का बड़ा पापा रेमंड दी हैं.

मम्मी और पापा को छोड़कर बहुत ही बुरा लग रहा है.एस्ले भइया और मैं एंजेलीना बहन मिलकर घर से निकलकर स्कूल जाते थे.मगर हम दोनों अलग-अलग स्कूल में जाते थे.भइया लोयोला हाई स्कूल में जाते थे और मैं नोट्रे डेम एकेडमी में जाती थी. उस समय हम दोनों ने मिलकर फोटो खिंचवाएं थे.फोटो देखकर मम्मी -पापा और परिजन खुश हो जाते थे. इस बीच जब भइया बीमार पड़ने लगे.मम्मी -पापा भइया को ठीक करवाने हेतु हर संभव प्रयास किए.दवादारू और दुआ की गयी.मगर भइया 9 साल की उम्र में 'प्रभु' के पास चले गए.तब मम्मी -पापा और मैं काफी रोए.मैं दोनों को दिलासा देती रही कि मैं हूं न. तब दोनों ने मुझे (एंजेलीना) टीएलसी देने लगे.डियर मम्मी हाथ पकड़कर रखती थी.कही मैं भी मम्मी -पापा को छोड़कर चली न जाऊं. इस बीच मैं बीमार पड़ने लगी.भइया के चले जाने के बाद मम्मी-पापा बीमारी से मुक्ति दिलवाने का प्रयास किए.विख्यात से विख्यात चिकित्सकों से परामर्श लिया.करिश्माई प्रार्थना की गयी.यह सब 'प्रभु' की योजना न थी.प्रभु ने अपने बागवानी भी भइया और चचेरी बहन को चमन को रोशनदार बना रहे थे.उसी बागवानी के पुष्प के रूप में प्रभु ने 3 मार्च को चुन लिया है. यह सब मम्मी-पापा विधि के विधान के तहत ही हुआ है.भइया तो 9 साल की अवस्था में चले गए मैं तो 2 साल अधिक आप दोनों के संरक्षण में प्यार और दुलार पाती रही. मम्मी-पापा धीरज रखे.आप दोनों ने प्रभु की परीक्षा में पास कर चुके हैं.भइया और बहन मिलकर प्रभु से दुआ करेंगे कि आप दोनों खुश रहिए.हमलोगा चाहते हैं कि अगले जन्म में रेजी ओस्ता पापा और क्रिस्टी रेजी मां बने.

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