बजट सत्र में हँगामे की भेंट चढ़ा पहला दिन - Live Aaryaavart

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सोमवार, 2 मार्च 2020

बजट सत्र में हँगामे की भेंट चढ़ा पहला दिन

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नयी दिल्ली 02 मार्च, दिल्ली में पिछले दिनों हुई भयंकर हिंसा को लेकर साेमवार को संसद में बजट सत्र के दूसरे चरण का पहला दिन हँगामे की भेंट चढ़ गया और दोनों सदनों में गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की जोरदार मांग की गयी। लोकसभा में हंगामा इतना जबरदस्त हुआ कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच हाथापाई की नौबत आ गई और तीन बार के स्थगन के बाद सदन की कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गयी। राज्यसभा में शून्यकाल के समय ही हंगामा हुआ जिसके कारण भोजनावकाश तक सदन की कार्यवाही स्थगित किये जाने के बाद ढाई बजे के आसपास दिन भर के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी गयी। हँगामे के बीच ही दोनों सदनों में जरूरी कागजात सदन के पटल पर रखवाये गये। लोकसभा में चिकित्सा गर्भपात (संशोधन) विधेयक तथा खनिज नियम (संशोधन) विधेयक पेश किये गये। राज्यसभा में भोजनावकाश के बाद हंगामे के बीच केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय विधेयक पेश किया गया। लोकसभा में वर्तमान जनतादल (यू) सदस्य वैद्यनाथ प्रसाद महतों को श्रद्धांजलि देने के बाद सदन की कार्यवाही भोजनावकाश तक स्थगित कर दी गयी। उसके बाद तीन बार स्थगन के बाद अपराह्न 4.30 बजे जैसे ही सदन की कार्यवाही फिर से शुरू हुई तो अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि सदस्यों को सदन की मार्यादा बनाये रखना चाहिये। उन्होंने कहा कि आज दोपहर बाद दो बजे सदन में जो कुछ भी हुआ उन्हें उससे दु:ख पहुँचा है। श्री बिरला ने कहा “हम सबका प्रयास होना चाहिये कि संसद की मार्यादा बनाये रखें। वरिष्ठ सदस्य हस्तक्षेप कर सदन की गरिमा बनाये रखें। आज जो हुआ उससे मैं व्यक्तिगत रूप से बहुत दु:खी हूँ। मैं ऐसी परिस्थिति में सदन नहीं संचालित करना चाहता। सब मिलकर विचार कर लें, एक मर्यादा बन जाये।” इसके बाद उन्होंने सदन की कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी। दोपहर बाद दो बजे जब कार्यवाही शुरू हुई तो कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दलों के सदस्य हंगामा करते हुए सदन के बीचोंबीच आ गये। अध्यक्ष ओम बिरला ने हँगामे के बीच जरूरी कागजात सदन के पटल पर रखवाये। उन्होंने प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास विधेयक, 2020 पर चर्चा की शुरुआत भी करवाई लेकिन सदन में तीखी नोंकझोंक और कांग्रेस तथा भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों के बीच हाथापाई की स्थिति के कारण कार्यवाही अपराह्न तीन बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। इसके बाद एक बार तीन बजे और एक बार चार बजे सदन की कार्यवाही बिना किसी कामकाज के स्थगित की गयी। तीनों बार स्थगन के बावजूद दोनों पक्षों के कई सदस्य सदन में ही बैठे रहे। उन्होंने कार्यवाही स्थगित रहने के दौरान भी सदन के अंदर एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी की।  

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