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रविवार, 15 मार्च 2020

कोरोना पर भारत ने पाकिस्तान के रवैये पर जतायी निराशा


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नयी दिल्ली 15 मार्च, भारत ने कोरोना विषाणु की महामारी से निपटने के मकसद से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) के सदस्य देशों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में पाकिस्तान के स्वास्थ्य सलाहकार द्वारा जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाये जाने पर निराशा जाहिर करते हुए है कि इससे साफ हो गया है कि पाकिस्तान को मानवीय त्रासदी के समय भी अपने नागरिकों के हित छोड़कर केवल अपने राजनीतिक फायदे का ख्याल रहता है। सूत्रों ने कहा कि भारत की पहल पर आयोजित इस बैठक के लिए क्षेत्र के सभी देशों के शीर्ष राजनेता आगे आये। यहां तक कि नेपाल के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली सर्जरी के बाद अस्पताल से छुट्टी मिलने के अगले दिन ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में शामिल हुए लेकिन पाकिस्तान की ओर से प्रधानमंत्री इमरान खान ने स्वयं आने की बजाय अपने स्वास्थ्य सलाहकार को भेजना मुनासिब समझा जो बैठक में अपनी बात कहने में भी सहज नहीं थे। इसे सबने देखा कि किसी ने उन्हें एक पर्ची दी जिसके बाद उन्होंने जम्मू-कश्मीर पर टिप्पणी की। सूत्रों ने कहा कि पाकिस्तान का यह अशिष्ट व्यवहार है। उसने एक मानवीय मुद्दे का राजनीतिकरण करने का प्रयास किया। यह दर्शाता है कि उसके लिए अपने नागरिकों के कल्याण की बजाय राजनीतिक फायदा अधिक महत्वपूर्ण है। उल्लेखनीय है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में पाकिस्तान सरकार में स्वास्थ्य मंत्री के समकक्ष एवं सलाहकार ज़फर मिर्जा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में भी कोविड 19 का मामला सामने आना चिंता का विषय है और इसलिए जम्मू-कश्मीर में जो पूरा लॉकडाउन है, उसे हटाया जाना चाहिए। दक्षेस नेताओं की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद दक्षेस के मंच के सक्रिय होने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर सूत्रों ने कहा कि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी। इस वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से एक आपात स्थिति से निपटने के लिए दक्षेस नेता एक साथ आये हैं। इस पहल से कोई शुरुआत होगी, यह कहना मुश्किल है। पाकिस्तान की टिप्पणी पर कोई प्रतिक्रिया करना भी मुनासिब नहीं है। इससे पता चलता है कि असल में वह क्या है। जहां तक दक्षेस के अन्य सदस्यों के विचार का सवाल है तो उन्होंने भी देखा है कि साझा विकास के लिए गठित इस मंच का पाकिस्तान मानवीय त्रासदी के समय भी राजनीतिक दुरुपयोग करता है। भारत के कोविड-19 आपातकालीन कोष के गठन के सुझाव के क्रियान्वयन के बारे में पूछे जाने पर सूत्रों ने कहा कि कोष के गठन को सभी देशों के विदेश सचिव अंतिम रूप देंगे। भारत इसमें एक करोड़ डॉलर का अपना योगदान तुरंत करेगा। श्रीलंका, बंगलादेश और अफगानिस्तान ने भी योगदान की बात कही है। यह कोष दूतावासों द्वारा संचालित होगा ताकि जिसको जरूरत हो, उसे तुरंत सहायता मिल जाये। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन के बाद दक्षेस देशों के विशेषज्ञों का वीडियो काॅन्फ्रेंस होगा जिसमें व्यवहारिक बातों पर फैसले लिये जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अहमदाबाद में दक्षेस देशों के आपदा प्रबंधन केन्द्र का इस्तेमाल किया जाएगा। भारत दक्षेस देशों की भाषाओं में सूचनाओं की एक वेबसाइट भी बनवायेगा। सूत्रों ने कहा कि दक्षेस देशों में कोरोना के संक्रमण के केवल 150 मामले आये हैं जो अन्य क्षेत्रों की तुलना में बहुत कम हैं मगर इसका यह मतलब नहीं है कि आने वाले दिनों में इसका खतरा नहीं है। सूत्रों के अनुसार सभी नेताओं में इस बात को लेकर सर्वसम्मति है कि वे अपने अनुभव और संसाधनों को साझा करें। उन्होंने कहा कि भारत ने विदशों से अब तक 1444 नागरिकों को बाहर निकाला है जिनमें से 766 चीन से, 336 ईरान से, 218 इटली से और 124 जापान से आये हैं। ईरान एवं इटली से और लोगों को बाहर निकाला जाएगा। सूत्रों ने माना है कि इस महामारी के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में गिरावट आयेगी। नागरिक उड्डयन, यात्रा एवं पर्यटन, परिवहन आदि क्षेत्रों पर सर्वाधिक असर पड़ा है। 

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