सुरक्षा पर रेलवे का सबसे ज्यादा फोकस : गोयल - Live Aaryaavart

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शुक्रवार, 13 मार्च 2020

सुरक्षा पर रेलवे का सबसे ज्यादा फोकस : गोयल

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नयी दिल्ली 13 मार्च, सरकार ने आज कहा कि रेलवे में उसका सबसे ज्यादा फोकस सुरक्षा पर है तथा इसके साथ ही उसने अति महत्वपूर्ण तथा महत्वपूर्ण परियोजनाओं को पहले पूरा करने पर ध्यान दिया है। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने वित्त वर्ष 2020-21 के लिए रेलवे की अनुदान माँगों पर लोकसभा में करीब साढ़े नौ घंटे चली चर्चा का जवाब देते हुये आज कहा “हमने सुरक्षा पर सबसे ज्यादा फोकस किया है। मुझे यह बताते हुये खुशी है कि चालू वित्त वर्ष में 13 मार्च 2020 तक रेल दुर्घटना में एक भी यात्री की मृत्यु नहीं हुई है।” उन्होंने इसके लिए रेलवे के 13 लाख कर्मचारियों की तारीफ करते हुये कहा कि उन्हीं की मेहनत का परिणाम है कि भारतीय रेल यह अद्भुत उपलब्धि हासिल कर सका है। श्री गोयल ने करीब डेढ़ घंटे के अपने जवाब में कहा कि सरकार ने सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दो साल से पुराने आईसीएफ यात्री डिब्बों का निर्माण पूरी तरह बंद कर दिया है तथा उनकी जगह अब सिर्फ एलबीएच कोच शामिल किये जा रहे हैं जो ज्यादा सुरक्षित हैं। एलबीएच कोच को अपनाने में देरी के लिए उन्होंने पिछली सरकारों को दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि ब्रॉडगेज नेटवर्क पर मानव रहित लेवल क्रॉसिंग पूरी तरह समाप्त कर दिये गये हैं। रेल मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार का फोकस उन अति महत्वपूर्ण तथा महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर है जिनके पूरा होने से बड़े पैमाने पर नेटवर्क विस्तार होगा या नेटवर्क पर बोझ कम होगा। ऐसे 58 अति महत्वपूर्ण और 68 महत्वपूर्ण परियोजनाओं की पहचान की गयी है। अधिकांश पैसे ऐसी परियोजनाओं के लिए दिया जा रहा है जिनमें भूमि अधिग्रहण का काम पूरा हो गया हो, पर्यावरण तथा अन्य जरूरी मंजूरियाँ मिल गयी हों। उन्होंने आरोप लगाया कि पुरानी सरकारें बड़े पैमाने पर योजनाओं की घोषणा कर देती थीं, लेकिन वास्तव में उनके लिए बजट में प्रावधान नहीं किया जाता था। इस तरह की कई घोषित परियोजनायें 30-30 साल से लंबित हैं। अलग रेलवे बजट की परंपरा फिर से शुरू करने की विपक्ष की माँग पर उन्होंने कहा कि वह “एक गुब्बारा” था। तालियाँ बहुत बजती थीं। राजनीतिक घोषणायें होती थीं। घोषणाओं पर एक चुनाव जीता जाता था, दूसरे चुनाव में कहा जाता था कि पिंक बुक में योजनायें आ चुकी हैं। इसी प्रकार सर्वे, भूमि अधिग्रहण आदि के नाम पर एक-एक चुनाव पार लगाया जाता था।  

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