महाराष्ट्र में 16 प्रवासी मजदूरों की मालगाड़ी से कट कर मौत - Live Aaryaavart

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शनिवार, 9 मई 2020

महाराष्ट्र में 16 प्रवासी मजदूरों की मालगाड़ी से कट कर मौत

राज्यों ने और ट्रेनें चलाने की मांग की
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औरंगाबाद/लखनऊ, आठ मई, महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में ट्रेन की पटरियों पर सो रहे कम से कम 16 प्रवासी मजदूरों की शुक्रवार को सुबह मालगाड़ी की चपेट में आने से मौत हो गई। वे मध्य प्रदेश लौट रहे थे। इस दुर्घटना ने देशभर में लॉकडाउन से प्रभावित लाखों मजदूरों की दुर्दशा को उजागर किया, जो हर हाल में अपने घर लौटना चाहते हैं। रेलवे ने इस दुर्घटना की समग्र जांच की घोषणा की है। हादसा औरंगाबाद से करीब 30 किलोमीटर करमाड के समीप सुबह लगभग सवा पांच बजे हुआ। अधिकारियों ने बताया कि मारे गए मजदूर और जीवित बचे चार अन्य मजदूर-सभी पुरुष थे। जैसा कि देश के कई हिस्सों से परिवहन सुविधा की मांग कर रहे चिंतित प्रवासी श्रमिकों की खबरें सामने आई हैं, ऐसे में कई राज्यों ने लाखों मजदूरों के परिवहन के लिए और अधिक श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाने की मांग की है। सोशल मीडिया पर वायरल, हादसे के एक वीडियो क्लिप में पटरियों पर मजदूरों के शव पड़े दिखाई देते हैं और शवों के पास मजदूरों का थोड़ा बहुत सामान बिखरा पड़ा नजर आता है। जिला पुलिस प्रमुख मोक्षदा पाटिल ने पीटीआई-भाषा को बताया कि जीवित बचे चार लोगों में से तीन ने अपने साथियों को जगाने की कोशिश की थी जो घटनास्थल से करीब 40 किलोमीटर दूर जालना से रातभर पैदल चलने के बाद पटरियों पर सो गए थे। करमाड थाने के एक अधिकारी ने बताया कि मध्य महाराष्ट्र के जालना से भुसावल की ओर पैदल जा रहे मजदूर अपने गृह राज्य मध्य प्रदेश लौट रहे थे। उन्होंने बताया कि वे ट्रेन की पटरियों के किनारे चल रहे थे और थकान के कारण पटरियों पर ही सो गए थे। जालना से आ रही मालगाड़ी पटरियों पर सो रहे इन मजदूरों पर चढ़ गई। इस संबंध में एक अन्य अधिकारी ने कहा, ‘‘जालना में एक इस्पात कारखाने में काम करने वाले ये मजदूर गत रात पैदल ही अपने गृह राज्य की ओर निकल पड़े थे। वे करमाड तक आए और थक कर पटरियों पर सो गए।’’  पुलिस ने बताया कि जीवित बचे चार मजदूरों में से तीन पटरी से कुछ दूर सो रहे थे। कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के कारण ये प्रवासी मजदूर बेरोजगार हो गए थे और अपने घर जाना चाहते थे। वे पुलिस से बचने के लिए ट्रेन की पटरियों के किनारे पैदल चल रहे थे। इस हादसे में बाल-बाल बचे लोगों ने आ रही मालगाड़ी को लेकर अपने समूह के सदस्यों को जगाने का प्रयास किया। जीवित बचे मजदूरों ने इस हादसे के बारे में रूह कंपा देने वाली कहानी बताई।

पाटिल ने कहा, ‘‘ फंसे हुए 20 मजदूरों का समूह जालना से पैदल चल पड़ा। उसने आराम करने का फैसला किया और इनमें से ज्यादातर पटरी पर ही लेट गए। तीन मजदूर लेटने के लिए कुछ दूरी पर समतल जमीन पर चले गए। कुछ देर बाद इन तीनों ने एक मालगाड़ी को आते देखा और चिल्लाए लेकिन किसी को कुछ सुनाई नहीं दिया।’’  आईपीएस अधिकारी ने कहा, ‘‘मेरी जीवित बचे हुए लोगों के साथ बातचीत हुई जो कुछ दूरी पर आराम कर रहे रहे थे। उन्होंने जोर-जोर से चिल्लाकर सोते हुए अपने साथियों को जगाने की कोशिश की लेकिन यह व्यर्थ रहा और ट्रेन मजदूरों के ऊपर से निकल गई।’’  उन्होंने कहा, ‘‘ यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। बीस में से 16 की मौत हो गई, एक घायल हो गया और तीन हमारे पास हैं। करमाड थाने में मामला दर्ज किया गया है।’’  मुख्य रेलवे सुरक्षा आयुक्त शैलेष पाठक ने रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष को पत्र लिखकर पर्याप्त चेतावनी की ओर उनका ध्यान आकृष्ट किया है और उनसे यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है कि ऐसा हादसा फिर न हो।  उन्होंने कहा कि प्रवासी या अन्य व्यक्तियों के रेलमार्ग पर चलने और फिर हादसे में मौत की घटना संज्ञान में आई है, ऐसे में भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति रोकने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएं। मुख्य रेलवे सुरक्षा आयुक्त ही सभी गंभीर रेल हादसों की जांच करते हैं और सभी रेल परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान करते हैं। महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश सरकार ने मृतकों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये की वित्तीय मदद देने की घोषणा की है। पांच-पांच लाख रूपये महाराष्ट्र सरकार, तो पांच-पांच लाख रुपये मध्य प्रदेश सरकार देगी। जालना के पुलिस अधीक्षक एस चैतन्य ने कहा कि प्रवासी मजदूरों ने अपने नियोक्ता या स्थानीय प्रशासन को सूचना दिए बिना ही अपनी यात्रा शुरू कर दी थी। पुलिस अधिकारी ने बताया कि मृतकों की उम्र 20 से 35 वर्ष के बीच थी और वे मध्य प्रदेश के उमरिया तथा शहडोल जिलों के रहने वाले थे। वे जालना में एक इस्पात कारखाने में काम करते थे। अधिकारी ने कहा कि प्रशासन जहां प्रवासी मजदूरों के लिए आश्रय शिविर चला रहा है, वहीं हादसे की चपेट में आए लोग अपने कारखाने के परिसर में रह रहे थे। उन्होंने कहा कि मजदूरों ने औरंगाबाद जाने का निर्णय किया क्योंकि उन्हें लगा कि उन्हें वहां से मध्य प्रदेश के लिए ट्रेन मिल सकती है। रेलवे के एक अधिकारी ने कहा कि जीवित बचे लोगों के अनुसार मजदूरों ने बृहस्पतिवार शाम सात बजे जालना से चलना शुरू किया और लगभग 36 किलोमीटर चलने के बाद पटरियों पर आराम करने का निर्णय किया। अधिकारी ने बताया कि मालगाड़ी में पेट्रोल के खाली कंटेनर थे और यह मनमाड तहसील स्थित पानेवाडी जा रही थी। दुर्घटना के बाद यह अगले स्टेशन पर रुक गई।

इस संबंध में एक अन्य अधिकारी ने कहा कि मृतकों के शव आज बाद में ट्रेन के जरिए जबलपुर ले जाए जाएंगे। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दुख प्रकट करते हुए कहा कि उनके पास 16 मजदूरों की मौत पर कुछ कहने के लिए शब्द नहीं हैं। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि उन्हें इस हादसे में लोगों की मौत की खबर से बड़ा दुख हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रवासी मजदूरों की मौत पर शुक्रवार को दुख प्रकट किया। उन्होंने कहा कि हरसंभव सहायता मुहैया कराई जा रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रवासी मजदूरों की मौत पर दुख प्रकट किया और कहा कि राष्ट्र के निर्माताओं के साथ हुए बर्ताव पर शर्मिंदा होना चाहिए। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस हादसे को अत्यंत दुखद और विचलित करने वाला करार दिया तथा मारे गए व्यक्तियों के परिवारों के लिए पर्याप्त मुआवजे की मांग की। कांग्रेस नेता पी चिदम्बरम ने प्रवासी मजदूरों को पहुंचाने के लिए बसों और ट्रेनों की सुविधा प्रदान करने की नीति को त्रुटिपूर्ण कदम करार दिया और कहा, ‘‘आज सुबह जो त्रासदी हुई, उसे रोका जा सकता था यदि सरकार समय पर इन प्रवासी मजदूरों को बचाने के लिए आगे आई होती।’’  महाराष्ट्र के औरंगाबाद से सांसद और मजलिस ए इत्तेहाद उल मुसलिमीन (एआईएमआईएम) के नेता इम्तियाज जलील ने कहा, ‘‘16 प्रवासी मजदूरों की मौत, हत्या का मामला है।’’  दुर्घटनास्थल का दौरा करने के बाद उन्होंने कहा, ‘‘फंसे मजदूरों की दुर्दशा की अनदेखी करने को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय, रेल मंत्रालय और राज्य सरकार के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए जाने चाहिए।’’  बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि मजदूरों की मौत केन्द्र और राज्य सरकारों की लापरवाही व असंवेदनशीलता का परिणाम है।  उन्होंने घर वापस आ रहे प्रवासी मजदूरों के लिए बेहतर व्यवस्था की मांग की। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने प्रवासी मजदूरों की मौत पर दुख जताया और उनके परिवारों को पांच-पांच लाख रुपये की वित्तीय मदद देने की घोषणा की। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने राज्य के प्रवासी मजदूरों की मौत पर दुख जताया और उनके परिवारों को पांच-पांच लाख रुपये की वित्तीय मदद देने की घोषणा की।

राकांपा प्रमुख शरद पवार ने प्रवासी मजदूरों की मौत को दिल दहलाने वाला हादसा बताया और कहा कि केंद्र को राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करना चाहिए, ताकि मजदूर अपने घर सुरक्षित पहुंच सकें। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने एक मालगाड़ी की चपेट में आने से 16 प्रवासी श्रमिकों की मौत पर शुक्रवार को महाराष्ट्र के मुख्य सचिव और औरंगाबाद के जिला मजिस्ट्रेट को नोटिस जारी किया। आयोग ने एक बयान में कहा कि उसने शुक्रवार तड़के मालगाड़ी की चपेट में आने से 16 प्रवासी श्रमिकों की मौत के बारे में मीडिया की खबरों का संज्ञान लिया है। इसमें कहा गया है कि अधिकारियों को चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया है। इसमें कोरोना वायरस के कारण लागू लॉकडाउन से बुरी तरह प्रभावित गरीब लोगों, खास कर प्रवासी मजदूरों के लिए भोजन, आश्रय और अन्य बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने के लिए राज्य और जिला अधिकारियों द्वारा उठाए गए कदमों का ब्यौरा भी देने को कहा गया है।  लॉकडाउन के दौरान माल गाड़ियों की औसत गति में 66 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। एक मई से अब तक रेलवे ने 251 से अधिक विशेष रेलगाड़ियां चलाई हैं और लगभग तीन लाख प्रवासियों को उनके घर तक पहुंचाया है, इसके बावजूद, कई मजदूरों ने पैदल या साइकिल से अपने घर की यात्रा शुरू की है, क्योंकि जाहिर तौर पर भोजन और रोजगार की कमी के कारण अब वे और अधिक इंतजार नहीं कर सकते हैं। ‘सेवलाइफ फाउंडेशन’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, 25 मार्च से 3 मई के बीच राष्ट्रव्यापी बंद के दो चरणों के दौरान 600 से अधिक सड़क दुर्घटनाओं में करीब 140 लोगों की जान जा चुकी है। इनमें 30 प्रतिशत मृतक प्रवासी श्रमिक हैं, जो अपने घरों को लौट रहे थे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार ने देश के अन्य हिस्सों से राज्य के प्रवासी मजदूरों को वापस लाने के लिए रेलवे से 25 अतिरिक्त ट्रेनें मांगी हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपील की है कि खुद के स्वास्थ्य और सुरक्षा के नाते कोई भी मजदूर पैदल, साइकिल या दोपहिया वाहन से अपने घर के लिए न निकले। उन्होंने कहा कि धैर्य रखें, सरकार उन तक जल्दी ही पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सभी प्रवासी कामगारों और श्रमिकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए और उनकी प्रदेश में सकुशल वापसी तथा प्रदेश में रह रहे दूसरे राज्यों के कामगारों की सम्बन्धित राज्य में सकुशल वापसी के लिए बेहतर संवाद को आगे बढ़ाया जाए।

योगी ने कहा कि सरकार अपने प्रदेश के हर श्रमिक को सुरक्षित उनके घर तक लाएगी। यह प्रक्रिया मार्च के अंतिम हफ्ते से ही जारी है। जरूरत के अनुसार इसके लिए ट्रेन और बसों की मदद ली जा रही है।  उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों-महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, कर्नाटक, केरल और तेलंगाना आदि से प्रदेश के श्रमिकों को लेकर चलीं 79 ट्रेन रास्ते में हैं। शनिवार तक ये अपने-अपने गंतव्य तक पहुंच जाएंगी। लॉकडाउन के नियमों की अनदेखी करते हुए करीब 2,000 प्रवासी मजदूर शुक्रवार को यहां गोटा इलाके में एक सरकारी कार्यालय के बाहर जमा हो गए। पुलिस ने कहा कि वे इस उम्मीद में यहां एकत्र हुए कि उन्हें किसी तरह उनके गृह प्रदेशों में लौटने का रास्ता मिल जाएगा। सुबह से मजदूरों की भीड़ स्पष्ट तौर पर उस अफवाह के कारण शुरू हुई जिसमें प्रवासी मजदूरों को रेलवे स्टेशन ले जाने वाली एक बस के सरकारी कार्यालय के बाहर पहुंचने की बात थी। गोटा पुल के पास उपजिलाधिकारी के कार्यालय के बाहर अचानक लोगों का हुजूम जुटने की खबर होने पर, पुलिस अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचे और मजदूरों को वहां से जाने के लिए मनाया। ज्यादातर श्रमिक उत्तर प्रदेश और बिहार के थे। कर्नाटक में 700 से अधिक प्रवासी मजदूर शुक्रवार को मंगलुरु में रेलवे स्टेशन पर उमड़ पड़े और उन्होंने तत्काल अपने-अपने राज्य भेजे जाने की मांग की। वे यह जानकर रेलवे स्टेशन पर उमड़ पड़े कि कर्नाटक सरकार उन्हें गृह राज्य भेजने के लिए विशेष ट्रेनें चलाएगी। इनमें से ज्यादातर मजदूर उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के हैं। मजदूर स्टेशन पर डटे रहे और पुलिस की अपील के बावजूद उन्होंने वहां से जाने से इनकार कर दिया। पुलिस ने प्रवासी मजदूरों के हवाले से कहा कि वे बिना नौकरी, पैसा और पर्याप्त भोजन के शहर में फंसे हुए हैं। अगर फौरन विशेष ट्रेनें नहीं चलाई गईं तो वे पैदल ही अपने गृह राज्य जाना चाहते हैं।

बेंगलुरु में एक निर्माण कार्यस्थल पर सैकड़ों प्रवासी मजदूरों ने दावा किया कि उन्हें एक स्थान पर रखा जा रहा है और उन्होंने सरकार से उन्हें उनके पैतृक स्थानों पर वापस भेजने की अपील की। तुमकुरु रोड पर अनचेपल्या में रहने वाले इन मजदूरों ने कहा कि वे बहुत ही मुश्किल स्थितियों में रह रहे हैं जहां उन्हें अपने स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस से निपटने के लिए लगाये गये लॉकडाउन के शुरू होने के बाद से उन्हें मजदूरी भी नहीं दी गई है। आंध्रप्रदेश से गए 22 मजदूर छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में पृथक-वास केंद्र से भाग गए हैं। दंतेवाड़ा जिले के पुलिस अधीक्षक अभिषेक पल्लव ने शुक्रवार को बताया कि जिले में बृहस्पतिवार देर शाम अरनपुर थाना क्षेत्र स्थित पृथक-वास केंद्र से 22 मजूदर भाग गए। सभी मजदूर आंध्रप्रदेश से यहां आए थे। पुलिस उनकी तलाश कर रही है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आंध्रप्रदेश से 47 मजदूर पिछले दिनों दंतेवाड़ा जिले में पहुंचे थे। उन्हें घर भेजे जाने से पहले अरनपुर थाना क्षेत्र में स्थित इस केंद्र में रखा गया है। लॉकडाउन की वजह से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में फंसे मजदूरों को, मुफ्त में बिहार ले जाने का लालच देकर सवारियों से 3-3 हजार रुपए वसूलने वाले दो बस चालकों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। अपर पुलिस उपायुक्त अंकुर अग्रवाल ने बताया कि थाना फेस-2 पुलिस को शुक्रवार दोपहर को सूचना मिली कि भंगेल गांव के पास दो बसें खड़ी हैं, जिन पर बैनर लगा है कि बिहार सरकार द्वारा दिल्ली उप्र में लॉकडाउन की वजह से फंसे मजदूरों को मुफ्त में बिहार ले जाया जा रहा हैं।  उन्होंने बताया कि सूचना के आधार पर पुलिस ने मौके पर जाकर जांच की तो, बस में बैठे लोगों ने पुलिस को बताया कि मुफ्त में बिहार ले जाने का बैनर गलत लगाया गया है और बस वाले प्रति सवारी से 3,000 रुपये वसूल रहे हैं।

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