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बुधवार, 6 मई 2020

बिहार : कोटा से आए छात्रों को रिसीव करने बरौनी जंक्शन पहुंचे डीएम और एसपी

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अरुण शाण्डिल्य (बेगूसराय) आज देश में कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए सरकार की ओर से लागतै गए लॉकडाउन की विवशता के कारण हजारों छात्र-छात्राओं जो भी जहाँ भी और जिस हाल में थे उन्हें वहीं विवशता वश रुकना पड़ा। लॉकडाउन की अवधि जैसे-जैसे बढ़ते गई वैसे वैसे ही छात्र एवं छात्राओं की समस्या भी धीरे-धीरे बढ़ती गई, जिसके कारण उनका जीवन घुटन और हताशों में तब्दील होता चला गया।कोरोना के खतरनाक वायरस फैलते ही अपने प्रांत व जिले से बाहरी  इलाकों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के बीच एक अनजान दहशत फैलने लगी। सभी छात्र अपने-अपने घर लौटने के लिए बेचैन होने लगे।दूर-दराज में फँसे लोगों को वापस लाने की माँग को लेकर देश में राजनीतिक हलचल चरम पर हो गई थी।एक ओर कुछ राजनीतिक दलों ने उपवास भी किया तो कुछ ने आंदोलन की चेतावनी भी दी।वहीं दूसरी ओर इस माँग के आखिरी दौर तक सरकार भागते दिखाई दे रही थी।आखिरकार एक लम्बे समयांताराल ही सही सरकार को छात्रों के वापसी का फैसला तो लेना पड़ा।आगे बताते चलें कि देश के चर्चित शैक्षिक हब राजस्थान के कोटा से छात्रों को लेकर बिहार के लिए चली सबसे पहली स्पेशल ट्रेन सोमवार को बरौनी जंक्शन पहुंची।ट्रेन में बेगूसराय, खगड़िया,लखीसराय,शेखपुरा,जमुई,मुंगेर,भागलपुर और बांका के 1271 छात्र-छात्राएं सवार थे।बरौनी जंक्शन पर छात्र-छात्राएं जब ट्रेन से उतरे तो उनके चेहरे पर घर लौटने की खुशी  साफ-साफ झलक रही थी।पहली बार ऐसा हुआ कि इन लोगों को स्टेशन पर माता-पिता की जगह प्रशासन द्वारा सुरक्षा प्रदान की गई। लेकिन इसके बाद भी घर वापसी की खुशी देखते ही बन रही थी।कड़ी सुरक्षा  व्यवस्था के बीच स्टेशन पर उतरने के बाद स्वास्थ्य जाँच के लिए काउंटर पर पंजीकरण के बाद अलग-अलग बसों से उन्हें प्रखंड मुख्यालय भेजा गया।जहां स्क्रीनिंग के बाद उन्हें घर भेजा जाएगा। दूसरी ओर इसी ट्रेन से आए भागलपुर,लखीसराय,जिला के बच्चों को संबंधित जिला प्रशासन के संरक्षण में बस उनके जिला भेज दिया गया है।इधर सोमवार को अहले सुबह ट्रेन के आने से पहले ही डीएम जिलाधिकारी अरविन्द कुमार वर्मा और पुलिसकप्तान अवकाश कुमार रेल विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी पहले से ही मौजूद थे। ट्रेन बरौनी जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर चार पर पहुंचते ही सुरक्षा बलों ने उसे घेर लिया तथा बारी-बारी से काउंटर पर स्कैनिंग के बाद सभी को जंक्शन से बाहर निकाला गया।उल्लेखनीय है कि बेगूसराय जिला के सभी प्रखंडों के लिए खड़ी अलग-अलग बसों से उन्हें नोडल अधिकारियों की देख रेख में पुलिस बल के साथ प्रखंड मुख्यालय भेज दिया गया जहां सभी छात्र-छात्राओं को 14 दिन के लिए घर पर ही होम क्वारेन्टाइन कर नियमित स्वास्थ्य जांच की जाएगी।दूसरी तरफ़ मुंगेर एवं भागलपुर प्रमंडल के सभी जिलों के लिए भी वाहन की व्यवस्था की गई थी। बरौनी जंक्शन पर पंजीकरण के बाद खगड़िया के चार बसों पर शेखपुरा के तीन,बांका के चार,भागलपुर के सात,लखीसराय के पांच,जमुई के पांच तथा मुंगेर के बच्चे पांच बसों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रवाना किया गया।बरौनी पहुंची मनीषा,पायल,रोहित आदि ने बताया कि लॉक डाउन के बाद कोटा में काफी परेशानी हो रही थी। क्लास बंद हो गया था।मेस भी बंद हो गए थे।खाने-पीने की समस्या थी।सरकार की व्यवस्था बिल्कुल ही बेकार थी।ट्रेन में भी  हम लोगों को काफी फजीहत झेलनी पड़ी।उन्होंने  आगे यह भी बताया कि स्लीपर में सीट अलॉट था। लेकिन दूसरे लोगों को बैठाकर हम लोगों को सामान्य बोगी से लाया गया जिसमें पूरे रास्ते पानी नहीं मिली,जो खाना मिला वह भी बेकार ही था।ट्रेन में कोई सोशल डिस्टेंस के पालन का ध्यान नहीं रखा गया।उन्होंने बताया कि एक सीट पर तीन-तीन छात्र एवं छात्राओं को बैठाया गया था।छात्रों ने बताया कि अपने कोचिंग की ओर से मिले नाश्ता के सहारे यहां तक पहुंचे।उन्होंने कहा कि कोटा में पढ़ाई और मेस बंद होने से भय का माहौल बना हुआ था। लेकिन अब अपने घर पहुंच गए हैं तो काफी राहत महसूस हो  रही है।

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