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शुक्रवार, 10 जुलाई 2020

स्वास्थ्य कर्मचारियों की कोरोना से मौत पर 1 करोड़ मुआवजा दे दिल्ली सरकार : सुभाष

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नई दिल्ली। लोक नायक अस्पताल स्वास्थ्य कर्मचारी यूनियन 717 (मान्यता प्राप्त) के अध्यक्ष सुभाष एवं महासचिव बलवंत सिंह रावत ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल,स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन एवं स्वास्थ्य सचिव दिल्ली सरकार को पत्र लिखकर स्वास्थ्य कर्मचारियों के साथ कोरोना संकट के दौरान हो रहे सामाजिक भेदभाव ओर असमानता के चलते ड्यूटी के दौरान कोरोना बीमारी से मौत का ग्रास बने कर्मचारियों को भी एक करोड़ मुआवजा राशि तुरंत देने की मांग की है। उन्होंने कहा की स्वाथ्यकर्मी भी कोरोना योद्धा बनकर दिनरात संक्रमण क्षेत्र में सफाई से लेकर अन्य सभी कार्य अस्पताल में कर रहे हैं फिर भी उनके कार्य को कम आंका जा रहा है क्योंकि दिल्ली सरकार असमानता और भेदभाव बरत रही है अन्यथा अभी तक हमारे लोकनायक अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मी जिनमें स्व.चरण सिंह एवं स्व. श्रीमती सीमा जिनकी कोरोना के कारण पिछले दिनों मौत हो गयी थी।  उनको भी दिल्ली सरकार 1 करोड़ की मुआवजा राशि प्रदान करती जिस प्रकार  मुख्यमंत्री ने हमारे अस्पताल के डॉक्टर के परिजनों को एक करोड़ की सहायता राशि प्रदान की थी। सुभाष ने कहा कि हमारा संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार हमारे सभी स्वास्थ्य कर्मचारियों को कोरोना से मौत होने की स्थिति में परिजनों को एक करोड़ की सहायता राशि प्रदान करने का प्रावधान नहीं करती और उनके परिजनों में एक व्यक्ति को नौकरी देने के लिए कदम नहीं उठती। स्वस्थ्य कर्मचारी यूनियन के चेयरमैन धारा सिंह ने कहा की हमारे काम को कोरोना संकट में स्वस्थ कर्मियों के साथ भेदभाव नहीं चलेगा। उन्होंने बताया कि हाल में केंद्र सरकार ने भी अपने अध्यादेश में प्रावधान किया था कि कोविड-19 महामारी के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जायेगा। लेकिन अफ़सोस की बात दिल्ली सरकार  लोकनायक अस्पताल के कर्मचारियों के साथ भेदभाव बरत रही है। महासचिव बलवंत सिंह रावत ने कहा कि हमने अपना मांग व शिकायत पत्र अपने चिकित्सा अधीक्षक और दिल्ली सरकार के संबधित विभागों को सौंप दिया है अब दिल्ली सरकार को निर्णय लेना है वह स्वास्थ्य कर्मचारियों के साथ हो रहे सामाजिक भेदभाव व असमानता को कैसे और कब दूर करती है। बाकि हमारी यूनियन आगे की रणनीति पर चर्चा करेगी जैसे सरकार की तरह से कुछ पहल होती है तो अन्यथा हमारा संघर्ष जैसे कोरोना से चल रहा है वैसे ही कर्मचारियों के अधिकारों के लिए प्रशासन से चलता रहेगा।

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