बेतिया : धर्मप्रांत में उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए कॉलेज खोलने की मांग - Live Aaryaavart

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गुरुवार, 23 जुलाई 2020

बेतिया : धर्मप्रांत में उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए कॉलेज खोलने की मांग

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बेतिया.पश्चिम चम्पारण में है बेतिया क्रिश्चियन कॉलोनी.इसका इतिहास 275 साल पुराना है. 12 पल्लियों को मिलाकर बेतिया धर्मप्रांत बनाया है. चखनी, रामनगर, नरकटियागंज,चनपटिया,चुहड़ी,  बेतिया, दुसैया, रतनपुरवा, रामपुरवा, गोपालगंज ,सिवान और सोनपुर पल्लियों में कुल मिलाकर 5,810 क्रिश्चियन रहते हैं.इन जनसंख्याओं के लिए 1मिडिल स्कूल और 4 हायर सेक्रेडरी स्कूल है.इसका संचालन 10 गैर सरकारी संस्थाओं के द्वारा किया जाता है.इन संस्थाओं के द्वारा उच्च शिक्षा की व्यवस्था नहीं करायी गयी है.इसके कारण येसु भक्त' के बच्चों को दसवीं और बारहवीं कक्षा पास करके कॉलेज के अभाव में पलायन करके दूसरे धर्मप्रांतों में जाकर पढ़ने के लिए बाध्य होना पड़ रहा है. बेतिया धर्मप्रांत की चखनी पल्ली की निवासी पुष्पा कहती हैं मेरी पुत्री प्रांजलि कुमारी माउंटफोर्ट सीनियर सेक्रेडरी स्कूल में पढ़ती थी.इस स्कूल में टॉप टेन में सातवां स्थान पर आयी हैं. प्रांजलि कुमारी साइंस में टॉप लाकर स्कूल में तहलका बचा दी हैं.मां पुष्पा और पापा फ्रांसिस कुमार ने कहा कि बेतिया धर्मप्रांत में कॉलेज नहीं है, तो प्रांजलि कुमारी को पटना धर्मप्रांत में संचालित संत माइकल हाई स्कूल अथवा लोयोला हाई स्कूल में दाखिला दिलवाने का प्रयास करेंगे.अगर एडमिशन हो जाता है,तो वह छात्रावास में रहकर स्कूल जाएगी.एक किशोरी बारहवीं कक्षा पास की हैं.वह पटना वीमेंस कॉलेज में नामांकन करवाना चाहती हैं. यहां तो कॉलेज भी नहीं है. बेतिया धर्मप्रांत के परेशान 'येसु भक्त' कहते हैं कि हमलोगों का दुर्भाग्य है कि 275 साल के बाद भी बच्चों के लिए उच्च शिक्षा प्रदान करवाने की व्यवस्था न याजक और न ही लोकधर्मियों के द्वारा की गयी है.दसवीं और बारहवीं कक्षा उर्त्तीण होने के बाद लड़को को दूसरे धर्मप्रांतों में ले जाकर कॉलेज में एडमिशन करवा देते हैं.कई संकुची परिजन लड़कियों की पढ़ाई पर ब्रेक लगा देते हैं. एक तो परिवार से दूर दूसरी ओर अधिकाधिक राशि व्यय करके उच्च शिक्षा दिलवानी पड़ती हैं. इस संदर्भ में  एक युवा जैसुइट प्रीस्ट ने कहा कि बेतिया धर्मप्रांत के येसु भक्तों ने कभी भी कॉलेज खोलने की मांग नहीं की है,जिसके कारण जैसुइट के अधिकारियों ने पटना में जाकर संत जेवियर कॉलेज  खोल दिये. इससे साफ साबित होता है कि अगर बच्चा नहीं रोएगा तो मां दूध नहीं पिलाएंगी.इसके पलट बेतिया धर्मप्रांत के येसु भक्तों का कहना है कि हमलोगों ने कई सालों से कॉलेज खोलने की मांग कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनता ही नहीं हैं. समर्थ लोगों के द्वारा धृतराष्ट्र बन जाने से अब तक न कॉलेज और न ही अस्पताल खोलने का कोई निर्णय नहीं ले पाए हैं.इसके आलोक में समझा जा सकता है कि बेतिया धर्मप्रांत में इस जनम में तो नहीं अगले जनम में मेडिकल कॉलेज व आईटीआई ट्रेनिंग सेंटर खुलना संभव हो सकेगा?

बता दें कि पटना धर्मप्रांत के पूर्व धर्माध्यक्ष अगस्टीन बिल्डरमूथ के अवकाश ग्रहण करने के बाद पटना धर्मप्रांत को विभक्त कर मुजफ्फरपुर धर्मप्रांत बनाया गया. 21 जून 1980 में बेतिया के लाल बेनेदिक्त जे ओस्ता बिशप बने. 24 जून 1980 में मुजफ्फरपुर धर्मप्रांत के बिशप जोन बापतिस्ट ठाकुर बने.बेतिया के ही रहने वाले हैं.कहा जाता है कि कॉलेज खोलने की मांग 1980 में की गयी थी . मुजफ्फरपुर धर्मप्रांत को विभक्त कर बेतिया धर्मप्रांत 1999 में बना. नवसृजित बेतिया धर्मप्रांत के बेतिया निवासी बिशप विक्टर ओस्ता बने. इस बीच बिशप बेनेदिक्त जे ओस्ता को आर्च बिशप बनाया. इसके बाद बेतिया धर्मप्रांत के बिशप विक्टर ओस्ता को रायपुर के आर्च बिशप बनाया.विक्टर ओस्ता को आर्च बिशप बनने के बाद  बेतिया निवासी लौरेंस पास्काल को बेतिया धर्मप्रांत का प्रशासक बनाया गया .आर्च बिशप बेनेदिक्त जे ओस्ता का अवकाश ग्रहण करने के बाद पटना महाधर्मप्रांत के आर्च बिशप विलियम डिसूजा 01 अक्टूबर 2007 को बने. विलियम डिसूजा भी बहुत दिनों तक बेतिया में कार्य किया है.बेतिया धर्मप्रांत के बिशप पीटर सेबास्टियन गोबियस हैं. 22 जुलाई 2017 से बिशप हैं. यहां पर 5,810 येसु भक्त हैं. 12 पल्ली है.

गौरतलब है कि बेतिया से स्थानीय बिशप, पुरोहित,सिस्टर आदि बने हैं.सभी नीति निर्धारक होने के बाद भी अपने जन्म स्थान को उपेक्षित छोड़ दिया.ये महानुभाव लोग केवल सैद्धांतिक बात किया करते रहे पर धरातल पर आकर किसी ने नहीं सोचा. शायद बिशप और पुरोहितों को समझाने का कोई और तरीका था जिसे बेतिया के अबोध पल्लीवासी नहीं जानते थे. एक सवाल के जवाब में बताया गया कि विशाल भव्य व्हाइट हाउस बनाया गया है.इसको बेतिया के निवासी बिशप विक्टर ओस्ता ने अपने कार्यकाल में बिशप को रहने लायक बिशप हाउस बनाया. जो जरूरी नहीं था.समझा जा सकता है उसके एवज में एक विशाल प्रबंधन कॉलेज, बीएड कॉलेज या हॉस्पिटल बनाया जा सकता था.यह  येसु भक्त लोग सोच व समझ सकते हैं. बिशप,पुरोहित और सिस्टर नहीं सोच सकते हैं.अगर सोचते तो कॉलेज बना देते. बिशप विक्टर ओस्ता के चले जाने के बाद फादर लौरेंस पास्काल को बेतिया धर्मप्रांत के प्रशासक बनाया गया था.वे विकास के लिए बहुत कुछ सोचा था और अमलीजामा पहनाने का प्रयास भी किया लेकिन उनका अधिकार क्षेत्र सीमित ही था. मिशन स्कूल जो 25 सितंबर 2017 को गिर गया था नया भवन बन रहा है. इसके निर्माण में पैसे की जबरदस्त किल्लत है.इसको ढाल बनाकर बीएड कॉलेज, मैनेजमेंट कॉलेज, अस्पताल और कॉलेज बनाने की सोच को ठंडे बस्ते में डाल देंगे. वर्तमान बिशप पीटर सेबास्टियन गोबियस हैं. जो 22 जुलाई 2017 से बिशप हैं.

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