क्या है अलग मिथिला राज्य की मांग? - Live Aaryaavart

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बुधवार, 22 जुलाई 2020

क्या है अलग मिथिला राज्य की मांग?

मिथिला स्टेट की मांग बहुत पुरानी है. बोले तो आजादी से भी पहले की. 1912 में जब बिहार बंगाल प्रोविंस से निकल कर एक अलग स्टेट बना. उसी समय से एक अलग मिथिला
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नई दिल्ली: मिथिला स्टेट की मांग बहुत पुरानी है. बोले तो आजादी से भी पहले की. 1912 में जब बिहार बंगाल प्रोविंस से निकल कर एक अलग स्टेट बना. उसी समय से एक अलग मिथिला स्टेट की मांग शुरू हो गई थी. तब से लेकर अब तक बिहार राज्य से निकलकर 1936 में ओडिशा और 2000 में झारखंड अलग राज्य बन चुके हैं. वहीं दूसरी तरफ अलग मिथिला राज्य की मांग चलती रही. मिथिला राज्य के एक्टिविस्ट दो मांगों को लेकर प्रोटेस्ट करते रहे. पहली मांग थी, ‘मिथिलांचल’ के नाम से एक अलग मिथिला राज्य बनाना. और दूसरी मांग मैथिली भाषा को भारत सरकार की आठवीं अनुसूची में शामिल करना. झारखंड के अलग राज्य बनाने के बाद से ये मांगें और भी तेज हो गईं

इन्हीं यूथ में से एक लड़का और मिथिला मुक्ति मोर्चा के सेक्रेटरी “कुणाल झा” ने बताया “पहली बात तो हम बिहारी नहीं हैं, हम मैथिल हैं और यही हमारी पहचान है. हमारे मिथिला को जबरदस्ती बिहार में मिला दिया गया है. और बिहार में हमारे साथ भेदभाव किया जाता है. यहां तक कि बिहार गीत में भी मैथि‍ली और मिथि‍ला की उपेक्षा की गई है. पूरे बिहार गीत में ना तो कवि विद्यापती है ना हीं मां जानकी. विकास के नाम पर भी मिथि‍ला की उपेक्षा की गई. आज कोई भी कारखाना, यूनिवर्सिटी खोलने की मांग होती है तो उसे मगध एरिया में धकेल दिया जाता है. आईआईटी की बात हो या सेंट्रल यूनिवर्सिटी की. मिथि‍ला हमेशा से उपेक्षित रहा है. और यही वजह है जो अलग मिथि‍ला राज्य के आंदोलन को बढ़ावा दे रहा हूँ.”

कुणाल ने बताया कि अपने यहां स्टेट भाषा के मुताबिक बने हैं. मिथिला की अपनी एक अलग संस्कृति और एक अलग भाषा है. मिथिला हमेशा से एक अलग राज्य रहा है. यही वो भूमि है जिसने पूरे विश्व को वैशाली के जरिए डेमोक्रेसी का पाठ पढ़ाया. हम चाहते हैं कि मिथिला एक अलग स्टेट बने, जिससे उसका विकास हो. सभी धर्म, अभी जाति और अभी जिले के लोग एक साथ आ चुके हैं. बाढ़ मिथि‍ला की सबसे बड़ी प्रॉब्लम है. आजादी से पहले ही ‘लोर्ड वेवेल’ ने इसके लिए खास प्रोजेक्ट तैयार किया था. कोसी के बाराह इलाके में हाई डैम बनाना था. इससे मिथिलांचल बाढ़ की तबाही से बचता. लेकिन आजादी के बाद बिहार सरकार ने बहाने बनाकर इस प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया. अगर इन प्रोजेक्ट्स पर ढंग से काम हो और कोसी नदी पर हाइड्रो पॉवर प्लांट्स लगाएं जाएं तो इससे इतनी एनर्जी जेनरेट होगी कि बिहार और मिथिला ही नहीं पूरे भारत को जगमगाया जा सकता है. मिथिला राज्य को लेकर हमने दरभंगा में भी नितीश कुमार का घेराव किया था. हम युवा हैं और इतिहास गवाह है कि जीत हमेशा युवाओं की ही हुई है.”

वहीं दूसरी ओर मिथिला राज्य की मांग को लेकर पिछले 25 वर्षों से आंदोलन कर रहे अखिल भारतीय मिथिला राज्य संघर्ष समिति के अध्यक्ष डां० बैजनाथ चौधरी बैजू ने कहा कि अलग मिथिला राज्य की मांग को लेकर पांच अगस्त से शुरू हो रहे संसद के सत्र से लेकर सत्रांत तक संसद के सामने धरना-प्रदर्शन कि या जायेगा। उन्होंने दरभंगा, तिरहुत, कोशी, पूर्णियां, मुंगेर, भागलपुर और झारखंड के दुमका प्रमंडल को मिलाकर अलग मिथिला राज्य के गठन की मांग की है।

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