बिहार : आज से 90 हजार आशा कार्यकर्ता हड़ताल पर - Live Aaryaavart

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गुरुवार, 6 अगस्त 2020

बिहार : आज से 90 हजार आशा कार्यकर्ता हड़ताल पर

आशा कार्यकर्ताओं को वेतन नहीं मिलता है केवल वर्क के अनुसार प्रोत्साहन राशि दी जाती है....
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पटना, 6 अगस्त। आज से 90 हजार आशा कार्यकर्ता हड़ताल पर चले गए। इनलोगों के हड़ताल पर चले जाने से स्वास्थ्य सेवा चरमरा गयी है। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, धनरूआ ( पटना) ने जानकारी दी है कि केन्द्र से जुड़े के आशा कार्यकर्ता 6 से 8 अगस्त तक हड़ताल पर है। इन आशा कार्यकर्ताओं का नाम पंजीयन रसीद पर अंकित नहीं किया जाए। जिला के आशा कार्यकर्ता अवैतनिक काम कर रही हैं।मान्यता प्राप्त स्वास्थ्य कार्यकर्ता (आशा) जो कोरोना महामारी से लड़ने के लिए महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्हें न तो पर्याप्त सुरक्षा मिल रही है और न ही पैसा। इस स्थिति के आलोक में 6 अगस्त से 8 अगस्त तक हड़ताल करने के लिए विवश हैं। बिहार में 90,000 से अधिक आशा हैं। मुजफ्फरपुर की आशा कार्यकर्ता अनिता देवी ने बताया कि कोरोना वायरस सर्वेक्षण अब तक तीन बार किया गया है, लेकिन इसका भुगतान अब तक नहीं किया गया है। 22 मार्च, 2020 में बिहार में कोरोना का पहला मामला रिपोर्ट किया गया था, तब बिहार सरकार द्वारा आशा कार्यकर्ता को ‘डोर-टू-डोर‘ कैम्पेन के तहत उन लोगों की स्क्रीनिंग और सूची बनाने का काम सौंपा गया था जो विदेश से आए थे। स्क्रीनिंग 20 अप्रैल से शुरू हुई और आठ दिनों तक चली। फिर एक दूसरे राउंड का सर्वेक्षण मई में आयोजित किया गया। यह सर्वेक्षण भी आठ दिनों तक चला था। तीसरे दौर का सर्वेक्षण 26 जून से शुरू हुआ और पांच दिनों तक चला। पूर्वी चंपारण के केसरिया गांव की आशा कार्यकर्ता चुन्नी देवी गांव कनेक्शन को बताती हैं कि, ‘पहले सर्वेक्षण के लिए प्रतिदिन 400 रुपए के दर से 3200 रुपए देने थे। जबकि दूसरे और तीसरे सर्वेक्षण के लिए 200 रुपए के दर से 2600 रुपए दिए जाने थे। लेकिन भुगतान अब तक नहीं किया गया है। परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। हम किसी तरह जी रहे हैं, लेकिन सरकार हमारी ओर ध्यान नहीं दे रही है।‘

इस साल आशा कार्यकर्ता द्वारा मुजफ्फरपुर सहित उत्तर बिहार के कुछ जिलों में चमकी बुखार के खिलाफ अभियान में हिस्सा लिया गया था। लेकिन इसका भुगतान अब तक बकाया है। नाम नहीं बताने के शर्त पर एक आशा कार्यकर्ता ने कहा, ‘यह 90 दिनों का अभियान था। हम घर-घर जाकर ओ.आर.एस. और जरूरी दवाइयों को वितरण करते थे। चमकी बुखार की जागरूकता के लिए चैपाल का आयोजन करते थे। लेकिन इसके लिए मात्र 3000 रुपए दिए जाने थे जो अब तक नहीं मिला है।‘ आशा कार्यकर्ता संघर्ष समिति के अध्यक्ष मीरा सिन्हा ने कहा कि, ‘हम कई बार अधिकारियों से मिल चुके हैं, लेकिन सारा कुछ व्यर्थ साबित हुआ है। हम उन्हें भुगतान करने का अनुरोध करते-करते थक गए हैं। अब हम 6 अगस्त, 2020 से तीन दिवसीय हड़ताल करने जा रहे हैं।‘ आशा कार्यकर्ता की मदद से ग्रामीण गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की नियमित जांच कराई जाती थी और प्रसव कराने के लिए भी परिजनों के साथ मरीजों को लेकर वह अस्पताल आती थी। इनकी हड़ताल से प्रसव कार्य प्रभावित तो नहीं होगा, लेकिन संभावना जतायी जा रही है कि स्वास्थ्य जांच कराने गर्भवती कम आएंगी। क्योंकि आशा ही उन्हें प्रोत्साहित कर अस्पतालों तक लाती थीं। हड़ताल के कारण महिला व बच्चों को नियमित टीकाकरण कराने व परिवार नियोजन कार्यक्रम प्रभावित होने की बात कही जा रही है। आशा द्वारा पोलियो कार्यक्रम के दौरान बच्चों को खुराक पिलाने, टीबी मरीज को केन्द्र तक पहुंचाने, विटामिन ए की खुराक पिलाने, गृहभेंट कर महिलाओं को स्वास्थ्य कार्यक्रमों की जानकारी देने व घर-घर जाकर बच्चों की गणना करने जैसे कार्य किए जाते थे। लेकिन, इनके हड़ताल पर चले जाने से उक्त कार्यक्रम प्रभावित होने की संभाना जतायी जा रही है।

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