बिहार : चंपारण के खलिद हुसैन हत्याकांड के खिलाफ 1 सितंबर को संयुक्त प्रतिवाद - Live Aaryaavart

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शुक्रवार, 28 अगस्त 2020

बिहार : चंपारण के खलिद हुसैन हत्याकांड के खिलाफ 1 सितंबर को संयुक्त प्रतिवाद

आज जिले में भाकपा-माले का प्रतिवाद, लाॅकडाउन की आड़ में लोकतंत्र का दमन कर रही सरकार, खालिद हुसैन हत्याकांड की न्यायिक जांच कराए सरकार
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पटना 29 अगस्त, भाकपा-माले के बिहार राज्य सचिव कुणाल व माले विधायक दल के नेता महबूब आलम ने संयुक्त प्रेस बयान जारी करके विगत दिनों पश्चिम चंपारण के बेतिया के लालू नगर में नृशंस खालिद हुसैन हत्याकांड की कड़ी निंदा की है. उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रशासन अपराधियों को गिरफ्तार करने की बजाए उलटे बचाने के ही अभियान में लगी हुई है. इस बर्बर हत्याकांड के खिलाफ न्याय के सवाल पर 1 सितंबर को जिले में संयुक्त प्रतिवाद का आयोजन किया जाएगा. इसको लेकर वहां विपक्षी पार्टियों की बैठक भी आयोजित हुई. आज उपर्युक्त घटना के खिलाफ भाकपा-माले का जिलाव्यापी प्रतिवाद चल रहा है. नरकटियागंज, साठी, मलदहिया आदि जगहों पर सैंकड़ों की तादाद में माले कार्यकर्ता व आम लोग प्रतिवाद में शामिल हो रहे हैं और अपराधियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं. लेकिन प्रशासन लाॅकडाउन की आड़ में बेतिया में शारीरिक दूरी बनाकर किए जाने वाले शांतिपूर्ण विरोध को भी आयोजित नहीं करने दे रही है. माले नेताओं ने कहा कि सरकार व प्रशासन लाॅकडाउन की आड़ में लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचलने में लगी है. भाकपा-माले के पश्चिम चंपारण इलाके के प्रभारी का. वीरेन्द्र प्रसाद गुप्ता ने इस हत्याकांड के सिलसिले में बताया कि उपर्युक्त कांड में मारे गए खालिद हुसैन के पिता अख्तर हुसैन द्वारा बियाडा की जमीन के अधिकार के लिए सीडब्लयूजेसी 16095/2019 मुकदमा उच्च न्यायालय में दायर किया गया था. उक्त तीन एकड़ जमीन 2 अप्रैल 1987 को ही 99 साल के लिए उन्हें लीज पर मिला था. फिर बिहार-झारखंड के बंटवारे के बाद 2007 में भी उक्त जमीन की लीज अख्तर हुसैन के नाम पर हो गई. फिर बियाडा जमीन घोटाले के क्रम में भाजपा-जदयू के नेताओं के दबाव पर लीज कैंसिल कराकर 2008 में रोहित सिकारिया के नाम आवंटित कर दी गई. जिस पर बेतिया मंुसिफ कोर्ट में मुकदमा चला. कोर्ट से मुकदमा खारिज कर दिया गया और जमीन पर अवस्थित राइस मिल, तेल मिल, मशाला मिल, चीडड़ा मिल, आटा मिल और पानी प्लांट को ध्वस्त कर अख्तर हुसैन को विस्थापित कर दिया गया. इसके खिलाफ अख्तर हुसैन ने पटना उच्च न्यायालय में अपील दायर की. उक्त मामले में उच्च न्यायालय में न्याय पाने लिए दायर किए गए मुकदमे के ही सिलसिले में हत्या की गई.

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