बिहार : लाॅकडाउन-बाढ़ की तबाही के कारण मजदूरों-गरीबों का जीवन मुहाल : माले - Live Aaryaavart

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शनिवार, 29 अगस्त 2020

बिहार : लाॅकडाउन-बाढ़ की तबाही के कारण मजदूरों-गरीबों का जीवन मुहाल : माले

  • जनता को अपने भरोसे जीने-मरने के लिए छोड़कर नीतीश कुमार चुनावी घोषणाओं में लग गए हैं.
  • 31 अगस्त को माले व खेग्रामस द्वारा प्रखंड कार्यालयों पर मानव शृंखला का होगा निर्माण.
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पटना 29 अगस्त, भाकपा-माले के बिहार राज्य सचिव कुणाल और खेग्रामस के महासचिव धीरेन्द्र झा ने आज प्रेस बयान जारी करके कहा है कि प्रवासी मजदूरों, बाढ़ व अन्य ज्वलंत सवालों पर आगामी 31 अगस्त को राज्य के प्रखंड कार्यालयों पर अपनी मांगों से संबंधित पोस्टर व प्लेकार्डस के साथ दूरी बनाते हुए कतारबद्ध होकर हजारों की तादाद में लोग मानव शृंखला का निर्माण करेंगे और अपनी मांगों को अविलंब पूरा करने के लिए सरकार पर दबाव बनायेंगे.


नेताद्वय ने कहा कि आज पूरा बिहार लाॅकडाउन व बाढ़ की भीषण तबाही झेल रहा है, लेकिन जनता को अपने भरोसे जीने-मरने के लिए छोड़ दिया है. जनता की चिंता करने की बजाए भाजपा-जदयू के नेता पूरी तरह से चुनावी अभियान में लग गए हैं. कई तरह की पीड़ा झेल रही बिहार की जनता को ठोस राहत देने की बजाए नीतीश कुमार चुनावी धड़ाधड़ चुनावी घोषणाएं किए जा रहे हैं, लेकिन उन्हें जो करना चाहिए उसकी चर्चा तक नहीं करते. इस सरकार को इस बार के चुनाव में जनता सबक सिखाएगी. नेताओं ने कहा कि प्रखंड मुख्यालयों के साथ-साथ चट्टी-बाजारों में भी शृंखला का निर्माण किया जाएगा. इस कार्यक्रम से एक बार फिर प्रवासी मजदूरों सहित सभी मजदूरों को 10 हजार रु. कोरोना लाॅकडाउन भत्ता देने, सभी ग्रामीण परिवारों को राशन-रोजगार देने, स्वयं सहायता समूह -जीविका समूह समेत तमाम तरह के छोटे लोन माफ करने, मनरेगा की मजदूरी 500 रु. करने व साल में न्यूनतम 200 दिन काम की गारंटी करने, दलित व गरीब विरोधी नई शिक्षा नीति 2020 वापस लेेने, सभी बाढ़ पीड़ितों को तत्काल 25 हजार रु. मुआवजा की राशि उपलब्ध करवाने, छूटे-बचे सभी गरीब परिवारों के लिए राशन कार्ड का प्रावधान करने, सभी दलित-गरीब छात्रों को कोरोना काल में पढ़ाई के लिए स्मार्ट फोन देने, मनरेगा को कृषि कार्य से जोड़ने, बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता देने आदि मांगें उठाई जाएंगी. माले नेताओं ने कहा कि आने वाले चुनाव में ये सारे मुद्दे हमारे केंद्रीय मुद्दे होंगे. भाजपा-जदयू के सारे नरेटिव आज ध्वस्त हो गए हैं और बिहार एक नए किस्म के बदलाव के द्वार पर खड़ा है

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