ब्रॉडबैंड सेवायें पहुचाने वाली पहली समुद्री केबल परियोजना का उद्घाटन - Live Aaryaavart

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सोमवार, 10 अगस्त 2020

ब्रॉडबैंड सेवायें पहुचाने वाली पहली समुद्री केबल परियोजना का उद्घाटन

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नयी दिल्ली, 10 अगस्त, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह को तीव्र गति की ब्रॉडबैंड संचार सेवाओं से जोड़ने वाली पहली आप्टिकल फाइबर केबल परियोजना का उद्घाटन किया। यह केबल समुद्र के अंदर से बिछाई गई है। इससे क्षेत्र में डिजिटल सेवाओं और पर्यटन तथा अन्य गतिविधियों को बढ़ाने में मदद मिलेगी। मोदी ने 30 दिसंबर 2018 को 2,312 किलोमीटर लंबी चेन्नई से अंडमान एवं निकोबार द्वीप के पोर्ट ब्लेयर को जोड़ने वाली इस सबमैरीन आप्टिकल फाइबर केबल परियोजना की शुरुआत की थी। परियोजना को 1,224 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। परियोजना के उद्घाटन अवसर पर मोदी ने कहा, ‘‘चेन्नई से पोर्टब्लेयर, पोर्ट ब्लेयर से लिटिल अंडमान और पोर्ट ब्लेयर से स्वराज द्वीप तक यह सेवा आज से अंडमान निकोबार के बड़े हिस्से पर चालू हो गई है।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि यह देश की जिम्मेदारी बनती है कि वह अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के लोगों को आधुनिक दूरसंचार सुविधायें उपलब्ध कराये। पोर्ट ब्लेयर के साथ ही यह सेवा स्वराज द्वीप, लांग आइलैंड, रंगत, लिटिल अंडमान, कारमोटा, कार निकोबार और ग्रेटर निकोबार को भी कनेक्टिविटी उपलब्ध करायेगी।

देश की दूरसंचार कंपनियां अब इस आप्टिकल फाइबर केबल के जरिये अपनी मोबाइल और ब्रॉडबैंड सेवायें इस द्वीप समूह में उपलब्ध करा सकेंगी। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक पोर्ट ब्लेयर पर अब 400 गीगाबाइट प्रति सैंकिड की गति से इंटरनेट सेवायें उपलब्ध होंगी वहीं अन्य द्वीप समूहों में यह 200 गीगाबाइट प्रति सैंकड की गति से उपलब्ध होंगी। मोदी ने कहा कि समुद्री के अंदर केबल बिछाने का यह काम चुनौतियों के बावजूद समय से पहले पूरा हुआ है। उन्होंने कहा, ‘‘ये चुनौतीपूर्ण काम तभी हो सकते हैं, जब पूरी क्षमता के साथ, पूरे प्रतिबद्धता के साथ काम किया जाता है। हमारा समर्पण रहा है कि देश के हर नागरिक, हर क्षेत्र की दिल्ली से और दिल से, दोनों दूरियों को पाटा जाए। अब अंडमान निकोबार के लोगों को भी मोबाइल कनेक्टिविटी और तेज़ इंटरनेट की वही सस्ती और अच्छी सुविधाएं मिल पाएंगी, जिसके लिए आज पूरी दुनिया में भारत अग्रणी है।’’ मोदी ने कहा अंडमान को आज जो सुविधा मिली है, उसका बहुत बड़ा लाभ वहां जाने वाले पर्यटकों को भी मिलेगा। बेहतर नेट कनेक्टिविटी आज किसी भी पर्यटन स्थल की सबसे पहली प्राथमिकता हो गई है। इंटरनेट अच्छा मिलेगा, तो मुझे पूरा विश्वास है कि लोग और ज्यादा लंबे समय के लिए वहां आएंगे। जब लोग ज्यादा रुकेंगे, अंडमान निकोबार के समंदर का, वहां के खान-पान का, आनंद लेंगे तो इसका बहुत बड़ा प्रभाव रोजगार पर भी पड़ेगा, रोजगार के भी नए अवसर बनेंगे।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह द्वीप समूह भारत के आर्थिक रणनीतिक सहयोग और समन्वय का प्रमुख केन्द्र है। ‘‘भारत हिन्द- प्रशांत क्षेत्र में व्यापार-कारोबार और सहयोग की नई नीति और रीति पर चल रहा है, तब अंडमान-निकोबार सहित हमारे तमाम द्वीपों का महत्व और अधिक बढ़ गया है। पूर्वी एशियाई देशों और समंदर से जुड़े दूसरे देशों के साथ भारत के मज़बूत होते रिश्तों में अंडमान निकोबार की भूमिका बहुत अधिक है और ये निरंतर बढ़ने वाली है। नए भारत में, अंडमान निकोबार द्वीप समूह की इसी भूमिका को मज़बूत करने के लिए, तीन साल पहले द्वीपीय विकास एजेंसी का गठन किया गया था।’’ उन्होंने कहा कि अंडमान निकोबार में इसके अलावा सड़क, हवाई और जलमार्ग के जरिये भी संपर्क को सशक्त किया जा रहा है। उत्तरी और मध्य अंडमान की रोड कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए 2 बड़े पुल और राष्ट्रीय राजमार्ग-4 के चौड़ीकरण पर तेज़ी से काम हो रहा है। पोर्ट ब्लेयर एयरपोर्ट में एक साथ 1200 यात्रियों का आवागमन करने की क्षमता को तैयार किया जा रहा है। आने वाले कुछ महीनों में यह बनकर तैयार हो जाएगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि द्वीप के बीच और बाकी देश से जलमार्ग की सुविधा को बढ़ाने के लिए कोची शिपयार्ड में जो चार जहाज़ बनाए जा रहे हैं, उनकी डिलिवरी भी आने वाले कुछ महीनों में हो जाएगी। अंडमान निकोबार, को बंदरगाहों से जुड़ी तमाम गतिविधियों को बड़ा केन्द्र बनाया जायेगा। उन्होंने कहा, ‘‘इसी तरह पूर्वी तट में गहरे बंदरगाह पोताश्रय के निर्माण का काम भी तेज़ी से चल रहा है। इसके अलावा अब ग्रेट निकोबार में करीब 10 हज़ार करोड़ रुपए की संभावित लागत से ‘ट्रांस शिपमेंट पोर्ट’ के निर्माण का प्रस्ताव भी है।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि जब भारत आत्मनिर्भरता के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है, वैश्विक विनिर्माण केन्द्र के रूप में, वैश्विक आपूर्ति और मूल्य श्रृंखला के एक अहम देश के रूप में खुद को स्थापित करने में जुटा है, तब देश के जलमार्गों और बंदरगाहों के नेटवर्क को सशक्त करना बहुत ज़रूरी है।

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