बिहार : एक माह बाद का कार्य बहिष्कार करने का अल्टीमेटम भी दे दिया - Live Aaryaavart

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गुरुवार, 24 सितंबर 2020

बिहार : एक माह बाद का कार्य बहिष्कार करने का अल्टीमेटम भी दे दिया

जब आशाओं के तेवर को देख कर सिविल सर्जन भाग खड़े हो गए। आशा नेताओं ने एक माह का समय दिया हैं यदि समय सीमा में पूरा नहीं होगा हो कार्य का बहिष्कार करेंगे....
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पटना। सूबे में 38 जिले हैं। इन जिलों में सिविल सर्जन पदस्थापित होते हैं।खबर के अनुसार दर्जनों जिलों में बिहार राज्य आशा कार्यकर्ता संघ गोपगुट, ऐक्टू के नेतृत्व में हजारों आशाओं ने सिविल सर्जन का घेराव किया।जल्द से जल्द 13 सूत्री मांगों को पूरा करने का अनुरोध किया गया। ऐसा नहीं करने पर एक माह बाद का कार्य बहिष्कार करने का अल्टीमेटम भी दे दिया। बिहार राज्य आशा कार्यकर्ता संघ (ऐक्टू-गोप गुट) अध्यक्ष शशि यादव ने बताया कि जनवरी 2019 में सरकार ने हड़ताली आशाओं से 1000 रु मासिक मानदेय लागू करने सहित कुल 13 मांगों पर 4 राउंड की चली वार्ता के बाद समझौता किया लेकिन समझौता के लगभग 21 माह बीत जाने के बाद आजतक उस समझौते के तहत भुगतान चालू नहीं किया गया और नही अन्य समझौता पूर्ण तरीके से लागू हुआ। साथ ही कोरोना काल में कई आशाओं की मौत हुई है लेकिन सरकार द्वारा घोषित विशेष कोरोना भत्ता का लाभ आशा के पीड़ित परिजनों को नही मिला है। उन्होंने  नीतीश-मोदी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि दिल्ली-पटना की सरकारें कोरोना वारियर्स और घर घर की स्वास्थ्य कार्यकर्ता के साथ नाइंसाफी कर रही हैं। पीएम ने आशाओं को नियमित मासिक मानदेय न देकर जहां विश्वासघात किया है,वहीं नीतीश सरकार कोरोना भत्ता नही देकर नाइंसाफी कर रही है ।उन्होंने कहा है कि आशाएं बदला लो-बदल डालो नारे के तहत नाइंसाफी का बदला लेंगी।हम आशाओं के न्यायपूर्ण सवालों को चुनाव का सवाल बनाएंगे!



बिहार राज्य आशा कार्यकर्ता संघ (ऐक्टू-गोप गुट)की अध्यक्ष शशि यादव ने कहा कि वैश्विक कोरोना वॉरियर्स के बिहार वॉरियस परेशान हैं।घर-घर जाकर स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने वाली आशाओं की उपेक्षा जारी है। बिहार राज्य आशा कार्यकर्ता संघ के आह्वान पर दो दिवसीय हल्ला बोल कार्यक्रम के तहत 22 सितम्बर को पटना के विभिन्न पीएचसी सहित राज्य के रोहतास,कैमूर, अरवल,  जहानाबाद,नालंदा, पश्चिम चंपारण,पूर्वी चंपारण, समस्तीपुर,खगड़िया, मुजफ़्फ़रपुर,मधेपुरा,सुपौल, भागलपुर, दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी,गोपालगंज, सिवान, मुंगेर आदि    जिलों के 200 से ज्यादा पीएचसी पर आशाओं ने जत्थाबन्दी कर अपनी मांगों को रखा व मांगों के पक्ष में नारेबाजी किया।'एक हजार में दम नहीं 21 हजार से कम नहीं',13 सूत्री मांगों को पूरी करों,हम अपनी मांग को लेकर रहेंगे। राज्य के लगभग 200 पीएचसी पर प्रदर्शन सफल होने का दावा किया गया।  बिहार राज्य आशा कार्यकर्ता संघ (ऐक्टू-गोप गुट)की अध्यक्ष शशि यादव ने कहा कि 23 सितम्बर को जिले के सिविल सर्जन कार्यालयों के समक्ष प्रदर्शन किया गया।13 सूत्री मांगों को सिविल सर्जन को सौंपा गया।आशा कर्मियों ने जत्थाबन्दी कर अपनी मांगों को रखा। मासिक मानदेय की घोषणा, पूर्व समझौतों का क्रियान्वयन, कोरोना भत्ता और पूर्व के बकाये का भुगतान आदि मुख्य मांगें थीं। बिहार के दर्जनों जिलों में बिहार राज्य आशा कार्यकर्ता संघ गोप गुट ऐक्टू ने सिविल सर्जन के कार्यालय का घेराव किया आशाओं के जुझारू तेवर को देखकर सिविल सर्जन ने जल्द से जल्द 1000 रुपैया प्रतिमा देने वाले आदेश को पूरा करने और तमाम लंबित बकाया का भुगतान अति शीघ्र करने का आश्वासन दिया ।  मुजफ्फरपुर ,सिवान ,गोपालगंज ,समस्तीपुर, सीतामढ़ी, दरभंगा, कैमूर ,रोहतास, खगड़िया ,मुंगेर , पटना ,सुपौल , मधुबनी पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण  सहित अन्य जिलों में किया गया ।

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