बिहार : 2005 से पहले अफ्रीकी देशों से भी खराब थी बिहार की हालत : सुशील मोदी - Live Aaryaavart

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बुधवार, 23 सितंबर 2020

बिहार : 2005 से पहले अफ्रीकी देशों से भी खराब थी बिहार की हालत : सुशील मोदी

राजद की नेता सुनीता देवी कहती हैं कि बिहार के वित्त मंत्री हैं उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी।इनसे अपना विभाग नहीं संभल पा रहा है।इनके राज में राज्यकर्मियों काे नियमित वेतन नहीं मिल रहा है।स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष 2211 कर्मियों को मार्च 2020 से वेतन नहीं मिल रहा है।इस बार मांझी के रहते नइया डूबने वाला है.....
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पटना। बिहार सरकार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी को भय सताने लगा है, आसन्न चुनाव में चित पड़ जाएंगे। फिर भी हिम्मत करके मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि अगर आगे मौका मिलता है तो वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व में मंत्रिपरिषद की पहली बैठक जरूर आयोजित की जाए ताकि पूरे देश का ध्यान आकृष्ट हो। बिहार सरकार के सात विभागों की अनेक योजनाओं के उद्धाटन-शिलान्यास के लिए आयोजित वर्जुअल समारोह को सम्बोधित करते हुए बड़ी बात उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कह दी, कि  2005 से पहले बिहार की हालत अफ्रीकी देशों से भी ज्यादा खराब थी । वे यहीं पर नहीं ठहरे और कह दिए कि लोग बिहारी कहलाने में शर्म महसूस करते थे और अपनी पहचान छुपाते थे। बड़ी मुश्किल से उस अंधेरी सुरंग से आज बिहार को निकाल कर यहां तक लाया गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस तरह से बिहार की मदद कर हैं वैसे में अब बिहार का विकास कभी रूकेगा नहीं। आज कोरोना,चमकी बुखार से लेकर सड़क, बिजली,पानी के साथ ही बाहर से आए मजदूर और बाढ़ को भी विपक्ष मुद्दा नहीं बना पा रहा है।



श्री मोदी ने कहा कि शुरूआत में विपक्ष ने कोरोना को मुद्दा बनाने का प्रयास किया मगर आज प्रतिदिन डेढ़ लाख से ज्यादा जांच हो रही है,एम्स सहित अन्य अस्पतालों के बेड खाली पड़े है। सरकार की सजगता की वजह से ही इस साल चमकी बुखार से बड़ी संख्या में बच्चों की जान बचाई जा सकी है।15 लाख से ज्यादा मजदूरों को ट्रेन से उनके घरों तक पहुंचाया गया,उन्हें 8 महीने का मुफ्त अनाज दिया जा रहा है।20 लाख बाढ़ पीड़ितों को उनके खाते में 6-6 हजार रूपये भेजे गए है। इको टूरिज्म के नए स्थल के तौर पर जिस बेहतर ढंग से करकटगढ़,तुतला भवानी और वाल्मीकिनगर आदि का विकास किया गया है वह कल्पना से परे है। मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि अगर आगे मौका मिलता है तो वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व में मंत्रिपरिषद की पहली बैठक जरूर आयोजित की जाए ताकि पूरे देश का ध्यान आकृष्ट हो।पटना में जिस राष्ट्रीय डॉल्फिन शोध संस्थान का शिलान्यास किया जा रहा है वह भारत का ही नहीं बल्कि एशिया का पहला संस्थान होगा। विवेक कुमार महेली कहते हैं कि इसलिए सुशील मोदी की मानसिकता अफ्रिकन देशों से भी खराब हो चुकी है।अब भी इन्हें समझ नहीं आ रहा है इनको लग रहा है कि अभी भी लालू यादव मुख्यमन्त्री हैं।नरेंद्र मोदी जी से सादर निवेदन है कि इनका इलाज़ किसी प्राइवेट मेन्टल हॉस्पिटल में z plus सुरक्षा में कराई जाय। पार्टी हित में  ...।जूनियर तल्हा कहते हैं कि भ्रष्टाचार और गरीबी तो सर चढ़ कर बोल ही रही थी... मगर जो नाकामी तुम्हारी निकम्मी सरकार ने दिखाई है,गरीबों और मजदूरों के साथ... तुम्हें तो शर्म से डूब मरना चाहिए। बिहार की जनता ने काम के लिए वोट दिए और तुम अय्याशी कर रहे हो.. तुम्हारी औकात जल्द ही जनता दिखा देगी..  फिक्र ना करो निकम्मी सरकार के उपमुख्यमंत्री।

इस पर डॉक्टर बालेन्द्र कुमार यादव का कहना है कि यह सब बोलने से काम नहीं चलने वाला है इस बार।इस बार आप लोगों की विदाई तय है। जितना भय का माहौल 2005 के पहले का दिखा लो कुछ नहीं होगा।जनता परिवर्तन के मूड में आ चुकी है। श्रवन शर्मा ने कहा कि छोटे मोदी साहेब, आप बिहार की सत्ता पर पिछले 15 सालों से चिपके बैठे हैं, लेकिन आपके दिमाग में वही 15 साल पहले की यादें घूमती रहतीं हैं, कभी तो आप अपने 15 सालों में किये कामों की गिनती भी करवा दें,शर्म न करें, जैसा भी बता सकते है बता डालें।

प्रियतम कुमार ने कहा कि और आप 15 सालो में पटना को पेरिस बना दिए सर जी। आपकी अपनी केंद्र सरकार की रिपोर्ट देखी की नहीं सबसे गंदा शहर का नाम ? और सबसे कम विकसित जिला पूरे भारत में टॉप 20 ? अरे महाराज चेहरे का धूल साफ कीजिए। 15 सालो में 1 IT-PARK नहीं खोल पाए । वैसे आइए वोट मांगने आप का स्वागत है।मोहित राज 2020 में जब पूरा बिहार बाढ़ की चपेट में था और त्राहिमाम कर रहा था, तब तुमने किस-किस जगह का दौरा किया और क्या मदद पहुंचाई इस बात का ब्योरा दो। कोरोना के समय बिहार के प्रवासी मजदूरों के लिए क्या किया तुमने इस बात का ब्योरा दो।अपने पूरे राजनीतिक कैरियर में तुमने बिहार के लिए क्या किया, इस बात का ब्योरा क्यों नहीं देते हो, तुम्हारे जैसे घटिया आदमी के वजह से बिहार में भारतीय जनता पार्टी को नुकसान उठाना पड़ता है और वह सरकार नहीं बना पाती। जयंत कुमार ने कहा कि और 2005 के बाद तो बिहार अमेरिका के न्यूयॉर्क और और जापान के टोक्यो से भी बेहतर हो गया है।कमाल है मोदी जी आप 2005 के और 2000 के बात  क्यों कर रहे हैं? क्योंकि बिहार की  जनता ने तो आपको 15 साल इन्हीं चीजों की सुधारने के लिए दिया था और आप ने विगत 15 सालों में रईसी की जिंदगी जिए हैं।मो.एजाज ने कहा कि अभी 5-6 महीने पहले ही लॉकडाउन के समय लाखों लोग दिल्ली-मुम्बई सहित तमाम शहरों से भूखे प्यासे पैदल बिहार आ रहे थे, तब सरकार ने उनके लिए क्या किया था?लगता है लोग भूल गए, एक बार फिर बिहार चुनाव में सारे मुद्दों पर धार्मिक मुद्दे और जुमले भारी पड़ रहे है।राज ढिल्लो ने कहा कि क्या स्विज़रलैंड बना दिया हैं तुमने बिहार, मतलब बाड़ से कोई घर बरबाद नहीं होगा, स्कूलों की बिल्डिंग में चढ़चढ़ कर खुलेआम नकल नहीं होगी, अब कया बिहार के बच्चे को दूसरे परदेश में जा कर रोजगार नहीं करना पड़ेगा क्या, अब क्या बच्चिया लड़किया किसी भी वक्त बेझिजक आ जा सकेंगी बिना खौफ। अखिलेश तिवारी ने कहा कि इधर के हालके वर्षों में तो बुनियादी ढांचोंमें चीन,प्रोद्योगिकी में जर्मनी तथा समग्रता में अमेरिका से भी आगे पहुंचा दिया है आपलोगोंने नहीं?भाजपाइयोंमें कोई एक भी है क्या जिसे थोड़ीभी शर्म महसूस होती हो?

आनंद सिंह ने कहा कि श्रम संसाधन विभाग के अधीन Govt. ITI में कार्यरत 1222 अतिथि अनुदेशकों को लॉक डाउन अवधि के मानदेय का भुगतान किया जाए तथा घंटा प्रणाली से मुक्त करते हुए नियमितीकरण किया जाय बिहार के दूसरे विभाग के अतिथि शिक्षकों,आउटसोर्सिंग तथा संविदा पर कार्यरतकर्मियों को लॉकडाउन के भुगतान किया गया। राजद की नेता सुनीता देवी कहती हैं कि बिहार के वित्त मंत्री हैं उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी।इनसे अपना विभाग नहीं संभल पा रहा है।इनके राज में राज्यकर्मियों काे नियमित वेतन नहीं मिल रहा है।स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष 2211 कर्मियों को मार्च 2020 से वेतन नहीं मिल रहा है।इस बार मांझी के रहते नइया डूबने वाला है। सामाजिक कार्यकर्ता पप्पू राय का कहना है कि इस सरकार से अल्पसंख्यक समुदाय उदासीन हैं।एकमात्र अध्यक्ष के बल पर अल्पसंख्यक आयोग चल रहा है। अल्पसंख्यक आयोग में पदधारी बनने वाले सत्ताधारी के बीजेपी के अल्पसंख्यक मोर्चा व जदयू के  अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के कार्यकर्ता निराश हो गये हैं।ऐन मौके पर रंग बदलने को दृढ़संकल्प हैं। धनंजय कुमार ने कहा कि अगर शर्म हया है तो ऐसे ही कुछ भी मत बोलिए।आज भी बिहार की स्थिति अफ्रीकी देशो से ख़राब है और नहीं पता तो जीडीपी क आकड़ा चेक कर लीजिये सब समझ में आ जायेगा।झूठ बोलने और मक्कारी की सारी हदे पार कर चुकी है सरकार और नेता सब। इस बार विदाई तय है 

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