देश भर में इंडियन जर्नलिस्ट्स यूनियन ने मनाया प्रतिरोध दिवस ,प्रधानमंत्री को भेजा मांग पत्र - Live Aaryaavart

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मंगलवार, 13 अक्तूबर 2020

देश भर में इंडियन जर्नलिस्ट्स यूनियन ने मनाया प्रतिरोध दिवस ,प्रधानमंत्री को भेजा मांग पत्र

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जमशेदपुर ,2 अक्टूबर ,(आर्यावर्त डेस्क) देश में श्रमजीवी पत्रकारों की प्रतिनिधि संस्था इंडियन जर्नलिस्ट्स यूनियन के आह्वान पर आज गाँधी जयंती के दिन पूरे देश में पत्रकारों ने कोरोना संक्रमण काल में सरकार और समाचार पत्र / मीडिया हाउस  प्रबंधन द्वारा श्रमजीवी पत्रकारों और मीडिया कर्मियों की अनदेखी किये जाने के विरोध में "प्रतिरोध  दिवस"  के रूप में मनाया और देश के विभिन्न राज्यों में स्थानीय इकाईयों के सहयोग से अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन मेंशांतिपूर्ण सत्याग्रह धरना का आयोजन किया गया। देश में कई राज्यों में समाचार संकलन करने व ड्यूटी के दौरान हज़ारों पत्रकार संक्रमण का शिकार होकर कोरोना पॉजिटिव पाए गये और १३० से ज्यादा पत्रकार असमय काल के गाल में समां गये। तमाम मीडिया / समाचार पत्र संस्थानों से पत्रकारों की छंटनी की गयी और कई संस्थानों ने बिना पूर्व सूचना या वैकल्पिक व्यवस्था किये दफ्तर बंद कर दिए जिससे बड़ी संख्या में पत्रकारों के समक्ष बेरोजगारी और रोजी रोटी ,परिवार चलाने की समस्या उत्पन्न हो गयी।  झारखण्ड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन ने भी इस मामले में संज्ञान लेते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सम्बोधित एक ज्ञापन जिला उपायुक्त को सौंपा। इंडियन जर्नलिस्ट्स यूनियन के राष्ट्रीय कार्यकारिणी परिषद् सदस्य विजय सिंह और झारखण्ड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के सह संयोजक प्रमोद कुमार झा ने बताया कि प्रधानमंत्री व झारखण्ड के मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में मांग की गयी है कि ग्राउंड ड्यूटी व क्षेत्र में समाचार संकलन करने वाले पत्रकारों को कोरोना योद्धा घोषित किया जाये। पूरे राज्य के पत्रकारों का  ५० लाख का बीमा किया जाये। सभी पत्रकारों का सरकारी अस्पताल सहित सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल और कॉर्पोरेट अस्पतालों में निशुल्क इलाज की व्यवस्था हो। कोरोना की वजह से मृतक  पत्रकारों के परिवार को ५० लाख की सहायता राशि उपलब्ध दी जाये। जिन संस्थानों ने पत्रकारों को नौकरी से निकला है या बिना पूर्व सूचना श्रम हितों की अनदेखी नियम विरुद्ध  कार्यालय बंद कर दिया है उन पर कड़ी कार्यवाई की जाये।  छोटे व मझोले समाचार पत्रों व श्रमजीवी पत्रकारों द्वारा संचालित पत्र पत्रिकाओं को आर्थिक सहायता व विज्ञापन की मदद की जाये। वैसे ग्रामीण व आंचलिक पत्रकारों के लिए जिनकी नौकरी इस दौरान चली गयी हैं उन्हें आर्थिक सहायता व वैकल्पिक व्यवस्था प्रदान की जाये। पत्रकारों पर हमले व बिना वजह केस में उलझाने की सूचनाएँ प्राप्त होती रही हैं ,इन पर अविलम्ब रोक लगायी जाये।

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