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शुक्रवार, 13 नवंबर 2020

भारतीय अर्थव्यवस्था में जोरदार ढंग से सुधार हो रहा है : सीतारमण

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नयी दिल्ली, 12 नवंबर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को कहा कि एक लंबे और कड़े लॉकडाउन के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत में जोरदार सुधार देखने को मिल रहा है। उन्होंने अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए कुछ और प्रोत्साहनों की घोषणा करने के लिए आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि व्यापक आर्थिक संकेतक हालात में सुधार की ओर इशारा कर रहे हैं। सीतारमण कहा कि देश मे कोविड-19 के सक्रिय मामले एक समय 10 लाख से अधिक थे, जबकि अब ये मामले घटकर 4.89 लाख रह गए हैं और मृत्यु दर घटकर 1.47 प्रतिशत पर आ गयी है। अर्थव्यवस्था में सुधार का ब्यौरा देते हुए उन्होंने कहा कि कंपनियों के कारोबार की गति का संकेत देने वाला कंपोजिट परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) अक्टूबर में बढ़कर 58.9 रहा, जो इससे पिछले महीने में 54.6 था। उन्होंने कहा कि अक्टूबर के दौरान ऊर्जा खपत में 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का संग्रह 10 प्रतिशत बढ़कर 1.05 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। वित्त मंत्री ने कहा कि दैनिक रेलवे माल ढुलाई में औसतन 20 प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई है। उन्होंने आगे कहा कि बैंक ऋण में भी 5.1 प्रतिशत का सुधार हुआ है। इसके अलावा अप्रैल-अगस्त में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 13 प्रतिशत बढ़कर 35.37 अरब अमरीकी डालर रहा। भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर के सकारात्मक दिशा में लौटने का अनुमान जताया है। सीतारमण ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत घोषित पिछले प्रोत्साहनों की प्रगति का ब्यौरा देते हुए कहा कि एक सितंबर से 28 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ‘एक देश- एक राशन कार्ड’ योजना के तहत आ गए हैं। इसके तहत 68.6 करोड़ लाभार्थी शामिल हैं, जो इन 28 राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में किसी भी पीडीएस दुकान से खाद्यान्न ले सकते हैं। उन्होंने आगे बताया कि रेहड़ी दुकानदारों के लिए आत्मनिर्भर निधि के तहत 26.62 लाख ऋण आवेदन मिले, जिनमें से 13.78 लाख लोगों को कुल 1,373.33 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से 2.5 करोड़ किसानों को ऋण प्रोत्साहन मिला है। इसी तरह प्रधानमंत्री मातृ संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत 21 राज्यों के 1,682.32 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

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