खादी आयोग बेच रहा है ऑनलाइन मिट्टी के दीये - Live Aaryaavart

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा I ह्रदय राखि कौसलपुर राजा II, हरिजन जानि प्रीति अति गाढ़ी। सजल नयन पुलकावलि बाढ़ी॥, मंगल भवन अमंगल हारी I द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी II, हरि अनंत हरि कथा अनंता I कहहि सुनहि बहुबिधि सब संता II, दीन दयाल बिरिदु संभारी । हरहु नाथ मम संकट भारी।I, माता पिता की सेवा करें....बुजुर्गों का ख्याल रखें...अपनी प्रतिभा और आचरण से देश का नाम रौशन करें...

शुक्रवार, 6 नवंबर 2020

खादी आयोग बेच रहा है ऑनलाइन मिट्टी के दीये

khadi-seling-mud-dipak
नई दिल्ली, 05 नवंबर, राजस्थान के जैसलमेर और हनुमानगढ़ जिलों के सुदूर गांवाें के कुंभकारों के मिट्टी के दीये खादी इंडिया के ई-पोर्टल की बदौलत देश के हर कोने तक पहुंच रहे हैं। खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना ने गुरूवार को यहां बताया कि इस वर्ष पहली बार प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण– 'वोकल फॉर लोकल' को सार्थक बनाने के लिए ऑनलाइन और स्टोर के माध्यम से दीया बेचने का फैसला किया। केवीआईसी ने 08 अक्टूबर को दीये की ऑनलाइन बिक्री शुरू की और एक महीने से भी कम समय में लगभग 10,000 दीये पहले ही ऑनलाइन बिक चुके हैं। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन बिक्री के शुरू होने के बाद पहले दिन से ही मिट्टी के दीयों की भारी मांग रही और 10 दिनों से भी कम समय में डिजाइनर दीयों को पूरी तरह से बेच दिया गया।डिजाइनर दीयों के नए सेट की भी भारी मांग हैं। दीवाली के निकट आने के साथ ही दीयों की बिक्री भी बढ़ रही है। श्री सक्सेना ने बताया कि केवीआईसी दिल्ली और अन्य शहरों में अपने आउटलेट के माध्यम से दीया और अन्य मिट्टी की वस्तुओं जैसे लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों और अन्य सजावट के सामान भी बेच रहा है। ये मूर्तियां वाराणसी, राजस्थान, हरियाणा और अन्य राज्यों में बनाई जा रही हैं और कुंभकारों के लिए अच्छी आय का जरिया बन रही हैं. उन्होंने कहा कि राजस्थान में निर्मित दीये अरुणाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, केरल, असम, महाराष्ट्र, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह जैसे दूरस्थ राज्यों में खरीदे जा रहे हैं।  

कोई टिप्पणी नहीं: