झारखंड : ईसाई समुदाय के लिए एक मंत्री पद की मांग - Live Aaryaavart

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रविवार, 27 दिसंबर 2020

झारखंड : ईसाई समुदाय के लिए एक मंत्री पद की मांग

गत वर्ष झारखंड चुनाव में जीत हासिल करने के बाद हेमंत सोरेन सीधे रांची के पुरुलिया रोड स्थिति कार्डिनल हाउस पहुंचकर आर्च बिशप फेलिक्स टोप्पो से आशीर्वाद लिया था. तब सहायक बिशप मास्करेन्हांस ने कहा था कि इस दिन का पांच साल से इंतजार था.....

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रांची. गत वर्ष 2019 में झारखंड विधानसभा चुनाव का परिणाम 23 दिसंबर को आया था. झारखंड मुक्ति मोर्चा महागठबंधन को बहुमत मिला. जेएमएम के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री बने.  सत्ता परिवर्तन होने से ईसाई समाज में हर्ष व्याप्त रहा.इसके आलोक में राज्य में 4.30 प्रतिशत जनसंख्या वाला ईसाई समाज क्रिसमस की तैयारी में जुट गये थे, उनकी खुशी दोगुणी हो गई.जब हेमंत सोरेन अपने पिता से आशीर्वाद लेने के बाद सीधे रांची के पुरुलिया रोड स्थित कार्डिनल हाउस पहुंचे. आर्च बिशप फेलिक्स टोप्पो से आशीर्वाद लिये. तब यहां सहायक बिशप थियोडोर मास्करेन्हांस ने कहा कि इस दिन का पांच साल से इंतजार था. आर्चबिशप फेलिक्स टोप्पो और सहायक बिशप थियोडोर मास्करेन्हांस ने क्रिसमस 2020 के मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से क्रिसमस गिफ्ट के तौर पर ईसाई समुदाय के लिए एक मंत्री पद की मांग की है.  मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन,आर्चबिशप फेलिक्स टोप्पो और सहायक बिशप थियोडोर मास्करेन्हांस ने मिलकर केक काटा.इसके बाद दोनों बिशप हाउस में मीडिया को संबोधित किया. मीडिया से बात करते हुए दोनों ने कहा कि झारखंड सरकार में एक ईसाई मंत्री भी होना चाहिए. उन्होंने कहा कि वो हमारी समस्याओं और भावनाओं को ज्यादा बेहतर तरीके से समझ सकता है. आर्चबिशप मंगलवार को पुरूलिया रोड स्थित आर्चबिशप हाउस में मीडिया से बात कर रहे थे. उन्होंने इस दौरान अल्पसंख्यक स्कूलों की समस्याओं को भी सामने रखा. उन्‍होंने कहा कि पिछली सरकार के समय में अल्पसंख्यक स्कूलों में कोई भी नियुक्ति नहीं हो पाई. स्कूलों में शिक्षकों के नहीं होने से उसके संचालन में मुश्किल हो रही है और इसका सीधा प्रभाव बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है. आर्चबिशप फेलिक्स टोप्पो ने कहा कि हेमंत सरकार के गठन को 1 साल पूरे हो रहे हैं.मंत्रिमंडल में ईसाई समाज का प्रतिनिधित्व नहीं है. मुख्यमंत्री अविलंब इस पर ध्यान दें और मंत्रिमंडल में ईसाई समाज की भागीदारी सुनिश्चित करें.उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष से 12 विधायक ईसाई समाज के हैं.साथ ही अल्पसंख्यक स्कूलों में नियुक्ति नहीं होने पर सवाल उठाया.कहा कि करीब पांच सालों से अल्पसंख्यक स्कूलों में नियुक्ति नहीं हो रही है.इससे पढ़ाई बाधित हो रही.अब लोकधर्मियों की तरह ही याजकगण भी सरकार से मांग करने लगे हैं.नूतन वर्ष 2021 में दोनों मिल बैठकर मांगों की सूची बनाये कि कहां कहां से ईसाइयों को लाभ मिल सकता है. बता दें कि पिछले साल विधानसभा चुनाव जीतने के बाद हेमंत सोरेन आशीर्वाद लेने के लिए बिशप हाउस पहुंचे थे. तब हेमंत ने आर्च बिशप फेलिक्स टोप्पो से आशीर्वाद लिया था. यहां बिशप फादर मास्करेन्हांस कहा था कि इस दिन का पांच साल से इंतजार था. नई सरकार को उन्‍होंने क्रिसमस गिफ्ट बताया था. वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सह वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव ने आर्चबिशप फेलिक्स टोप्पो और सहायक बिशप थियोडोर मास्करेहंस के झारखंड मंत्रिमंडल में क्रिश्चियन मंत्री के मांग का समर्थन किया है. उन्होंने इस को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी इनकी मांगों से अवगत कराने की बात भी कही है.


भाजपा ने कहा- छिपा एजेंडा एक्‍सपोज हुआ

इधर भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि क्रिसमस के पूर्व आर्चबिशप फेलिक्स टोप्पो की हेमन्त सरकार से एक ईसाई समुदाय से विधायक को मंत्री बनाने की मांग पूरे तरीके से चर्च के छिपे एजेंडे को एक्सपोज़ करता है. प्रतुल ने कहा कि भाजपा यह शुरू से कहती आई है कि झारखंड में चर्च के कुछ पदाधिकारी राजनीतिक हस्तक्षेप करते हैं, जबकि उनके जिम्मेवारी सिर्फ संविधान के दायरे के भीतर अपने धर्म का प्रचार-प्रसार करना और सामाजिक कार्य करना है. लेकिन, हेमन्त सरकार के गठन को आर्चबिशप कभी क्रिसमस गिफ्ट बताते हैं, तो 1 वर्ष के बाद अब ईसाई समुदाय से एक मंत्री को शामिल करने की मांग करते हैं. प्रतुल ने कहा कि भाजपा यह शुरू से कहती है कि चुनाव के समय भी कुछ धर्मगुरुओं के द्वारा खूंटी, सिमडेगा, रांची ,गुमला, लातेहार और संथाल परगना के क्षेत्रों में राजनीतिक दलों के लिए फतवा जारी किया जाता रहा है. समाज सेवा की आड़ में बड़े पैमाने पर धर्मांतरण का कार्य होता है. अब तो आर्चबिशप ने खुलकर अपने धार्मिक कार्यक्षेत्र से आगे बढ़कर राजनीतिक मुद्दों को उठाना शुरू कर दिया जो कि निंदनीय है.

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