बिहार : लोकतांत्रिक जन पहल के नेताओं ने विपक्षी दलों को आगाह किया - Live Aaryaavart

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गुरुवार, 24 दिसंबर 2020

बिहार : लोकतांत्रिक जन पहल के नेताओं ने विपक्षी दलों को आगाह किया

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पटना. कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन का आज 29वां दिन है, गतिरोध खत्म करने के लिए सरकार की ओर से एक बार फिर से बातचीत का प्रस्ताव भेजा गया, जिसे किसानों ने ठुकरा दिया. आज भाकपा-माले के तरारी से विधायक व अखिल भारतीय किसान महासभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य सुदामा प्रसाद, घोषी से विधायक रामबली सिंह यादव, अखिल भारतीय किसान महासभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य व भोजपुर के युवा नेता राजू यादव, जन कवि कृष्ण कुमार निर्मोही आदि नेताओं के नेतृत्व में किसानों का एक जत्था कल 24 दिसम्बर को दिल्ली रवाना होगा. किसान नेताओं का यह जत्था 28 दिसम्बर तक दिल्ली में कैम्प करेगा और फिर 29 दिसम्बर को पटना वापस लौटकर अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के आह्वान पर आयोजित राजभवन मार्च में हिस्सा लेगा. दिल्ली में किसान नेताओं का यह जत्था तीनों कृषि कानून को रद्द करने की मांग पर दिल्ली के बोर्डरों को चारों तरफ से घेरे हुए किसान आंदोलन के समर्थन में भूख हड़ताल में शामिल होगा.इन नेताओं के वापस लौट आने पर किसानों का दूसरा जत्था बिहार से दिल्ली की ओर प्रस्थान करेगा और यह धारावाहिकता बरकरार रहेगी. पटना आए थे गुरनाम सिंह चारुनी.वे भारतीय किसान यूनियन (BKU) हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष हैं. उनके साथ उनके संघ के करनाल जिला अध्यक्ष जगदीप सिंह औलख भी थे. वो फ्लाइट से पटना पहुंचे थे.उन्होंने कहा कि बिहार में 2006 में कृषि उपज बाजार समिति (एपीएमसी) अधिनियम को समाप्त कर दिया गया था क्योंकि एमएसपी में फसलों की खरीद नहीं की जा रही थी. चारुनी ने कहा कि बिहार के किसानों को काम करने के लिए दूसरे राज्यों में पलायन करना पड़ता है, इस तथ्य के बावजूद कि यहां की भूमि उपजाऊ है और पानी अच्छा है. यहां फसलें एमएसपी पर नहीं खरीदी जा रही हैं, इसलिए यहां के किसानों और मजदूरों को बाहर काम करना पड़ता है.


किसान नेता ने कहा कि बिहार के साथ-साथ पूरे देश में MSP कानून को लागू किया जाना चाहिए और बिहार के किसानों को चल रहे आंदोलन में हिस्सा लेना चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि पूंजीवादी देश को लूट रहे हैं.इससे गरीबों और अमीरों के बीच की खाई बढ़ रही है.चारुनी ने कहा कि ग्लोबर हंगर इंडेक्स (GHI) में भारत 107 देशों में 94वें स्थान पर था. केंद्र की ओर से लाए गए कृषि कानून से देश का पूरा कृषि व्यापार पूंजीपतियों के हाथों में चला जाएगा.किसानों को न्यूनतम मूल्य मिलेगा, जबकि उपभोक्ताओं को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी. इस बीच विपक्षी दलों को बिहार में किसान आंदोलन को गोलबंद करने के लिए आगे आने का आह्वान किया गया है.लोकतांत्रिक जन पहल की ओर से देशभर में चल रहे किसान आन्दोलन के प्रति एकजुटता प्रदर्शित करते हुए आज यहां डाकबंगला चौराहा पर प्रदर्शन किया गया जिसमें सैकड़ो की संख्या में नागरिकों ने हिस्सा लिया जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं.लोकतांत्रिक जन पहल ने तीनों फसल  कानूनों एवं प्रस्तावित बिजली संशोधन  बिल 2020 को वापस लेने की किसानों की मांग का पुरज़ोर समर्थन किया है. लोकतांत्रिक जन पहल के नेताओं ने विपक्षी दलों को आगाह किया है कि किसानों के मुद्दों पर केवल बयानबाजी करने और कार्यक्रम की खानापूरी से काम नहीं  चलेगा. नीतीश सरकार के डपोरशंखी दावों के बावजूद देशभर में सबसे ज्यादा दुर्दशाग्रस्त बिहार के किसान हैं. उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति पंजाब-हरियाणा की तरह  स्वंयस्फूर्त आन्दोलन की नहीं है.यही कारण है कि नरेन्द्र मोदी का तीनों फसल कानून और प्रस्तावित बिजली संशोधन बिल के किसान विरोधी होने के बावजूद जो गोलबंदी बिहार में दिखनी चाहिए थी,वह नहीं है.किसानों के सवालों पर नरेन्द्र मोदी और नीतीश सरकार दोनों कटघरे में हैं. इसलिए विपक्षी दलों और प्रगतिशील शक्तियों का सर्वोच्च दायित्व है कि बिहार में किसानों को संगठित करने के लिए आगे आयें। प्रर्दशन में शामिल प्रमुख लोगों में कंचन बाला, सुधा वर्गीस, जोस के, सोनी, मंजू,  एडवोकेट मणिलाल, फ्लोरिन,अफजल हुसैन, अनुपम प्रियदर्शी, मंजू डुंगडुंग, शौकत  अली, मनहर  कृष्ण अतुल, गजेन्दर मांझी, आज़म, वंदना, ग्रेसी, कृष्ण मुरारी, विनोद रंजन, ऋषि आनंद, अनूप सिन्हा, एडवोकेट मनीष रंजन, संजय यादव, सचिन कुमार, एडवोकेट अंजुम बारी, आस्मां खान, मुस्ताक राहत, शम्स खान ,मनोज प्रभावी, जोसेफ एस, कमर वारसी, जाहिद करीम, मुन्ना कुमार और एडवोकेट अभिनव आलोक के नाम उल्लेखनीय हैं.

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