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रविवार, 27 दिसंबर 2020

रेल आरक्षण की आधुनिक वेबसाइट का तोहफा देगी रेलवे

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नयी दिल्ली 26 दिसंबर, वर्ष 2020 में भारतीय रेलवे की सबसे बड़ी उपलब्धि कोविड-19 महामारी के काल में लॉकडाउन के दौरान देश में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को बनाये रखना और 63 लाख से अधिक श्रमिकाें को उनके गृहक्षेत्र में पहुंचाना रहा। वर्ष 2021 की शुरुआत आईआरसीटीसी की नयी एवं आधुनिक वेबसाइट के साथ होगी। गाड़ियों की गति बढ़ेगी और समयबद्धता भी सुधरेगी। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनोद कुमार यादव ने यहां एक वर्चुअल संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वर्ष 2020 में रेलवे की सबसे बड़ी उपलब्धि कोविड काल में आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना रहा। रेलवे के समर्पित कर्मचारियों एवं अधिकारियों की निष्ठा एवं सेवा के कारण खाद्यान्नों, मेडिकल उपकरणों एवं दवाओं, तापविद्युत गृहों में कोयला, खाद आदि की आपूर्ति सुचारु रूप से जारी रही। रेलवे ने पार्सल ट्रेनों का परिचालन किया। यात्री गाड़ियों का दबाव नहीं होने के कारण मालगाड़ियों की औसत गति करीब दो गुनी हो गयी। श्री यादव ने कहा कि दूसरा महत्वपूर्ण काम देशभर से करीब 63 लाख दस हजार श्रमिकों को विभिन्न राज्य सरकारों के सहयोग से 4621 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के जरिये उनके गंतव्य स्थानों तक पहुंचाना रहा। उन्होंने कहा कि रेलवे ने आपदा को अवसर में बदलते हुए इस दौरान संरक्षा के लंबित सभी कामों को अंजाम दिया और ढांचागत विकास के 350 आवश्यक कार्यों को त्वरित गति से पूरा किया और 1367 पुलों की मरम्मत की गयी जिससे संरक्षा एवं गति में सुधार हुआ। ट्रैक अनुरक्षण, सिगनल एवं दूरसंचार, ओवरहेड इलेक्ट्रिक वायर, कोच, लोकोमोटिव आदि सभी से संबंधित लंबित कमियों को दुरुस्त किया गया। जहां ब्लॉक लेने की जरूरत थी उन सभी कार्यों को पूरा किया गया। उन्होंने कहा कि कोविड काल में रेलवे ने 5601 कोचों को कोविड केयर सेंटर में बदला और विभिन्न स्टेशनों पर तैनात किया गया जिससे हजारों कोविड रोगियों के उपचार में मदद मिली। रेलवे ने कोविड के सभी प्रोटोकॉल का पालन करते हुए लोगों को आवागमन की सुविधा प्रदान करने के लिए 1100 स्पेशल ट्रेनें, 618 फेस्टिवल ट्रेनें, मुंबई, कोलकाता एवं चेन्नई में 3936 उपनगरीय ट्रेनें, कोलकाता में 264 मेट्रो ट्रेनें और 138 पैसेंजर गाड़ियों का परिचालन किया।

कोविड काल में रेलवे पर पड़े आर्थिक प्रभाव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि रेलवे मालवहन क्षेत्र में किये उपायों से अब तक गत वर्ष की तुलना में 97.5 प्रतिशत से अधिक के स्तर पर आ गयी है तथा संकेतों से साफ है कि वित्त वर्ष की समाप्ति पर लाभ की स्थिति में आ जाएगी। उसे यात्री राजस्व में नुकसान होगा। लेकिन यात्री गाड़ियों के नहीं चलने से एवं अन्य उपायों से व्यय में भी 12 हजार करोड़ रुपए से अधिक कटौती हुई है। इस प्रकार से रेलवे का परिचालन परिव्यय के मामले में प्रदर्शन अच्छा ही रहेगा। मुंबई अहमदाबाद हाईस्पीड रेल परियोजना के बारे में एक सवाल के जवाब में श्री यादव ने कहा कि इस परियोजना के लिए गुजरात में 90 प्रतिशत और महाराष्ट्र में करीब 15 प्रतिशत भू अधिग्रहण हो चुका है। महाराष्ट्र सरकार ने रेलवे को आश्वासन दिया है कि अगले चार माह में 80 प्रतिशत से अधिक भू अधिग्रहीत कर ली जाएगी। उन्होंने कहा कि रेलवे चाहती है कि पूरी परियोजना एक बार में ही बन जाये और उसे एक साथ खोला जाये लेकिन यदि महाराष्ट्र में भू अधिग्रहण की समस्या नहीं सुलझी तो उसे पहले चरण में गुजरात में वापी से साबरमती के बीच खोला जाएगा और बाद में बाकी हिस्से को पूरा किया जाएगा। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष ने नये साल की प्राथमिकताओं के बारे में पूछे जाने पर कहा कि रेलयात्रियों को टिकट बुकिंग आसान एवं सुविधायुक्त बनाने के लिए भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) की वेबसाइट को आधुनिक एवं नया स्वरूप दिया गया है जिसे नववर्ष में रेल मंत्री पीयूष गोयल लोकार्पित करेंगे। उन्होंने कहा कि रेलवे ने 2020 में मालगाड़ियों की औसत गति में सुधार किया है। प्रमुख शहरों को जोड़ने वाली गोल्डन काॅर्ड (जीसी)और गोल्डन क्वार्डिनल (जीक्यू) लाइनों पर गति अवरोधों को दूर करके गतिसीमा 160 किलोमीटर प्रतिघंटा की जा रही है। दिल्ली मुंबई और दिल्ली हावड़ा लाइनों की सेक्शनल गति 160 किलोमीटर प्रतिघंटा करने के लिए काम शुरू हो चुका है। अन्य जीसी एवं जीक्यू मार्गों पर गतिसीमा 130 किलोमीटर प्रतिघंटा करने का काम जुलाई 2021 में पूरा हो जाएगा। जबकि 2025-26 तक इन्हें सेमीहाईस्पीड रेलमार्ग में बदल दिया जाएगा। श्री यादव ने कहा कि नये साल में जीरो बेस समय सारणी में गाड़ियों की गति बढ़ा कर यात्रा अवधि में कमी लायी जाएगी। मालगाड़ियों की औसत गति में अभी जो सुधार हुआ है, उसे बरकरार रखा जाएगा। उत्तर प्रदेश में कानपुर से खुर्जा के 351 किलोमीटर के सेक्शन और हरियाणा-राजस्थान में रेवाड़ी से मदार तक 306 किलोमीटर तक समर्पित मालवहन गलियारा (डीएफसी) खोला जा रहा है। मार्च तक खुर्जा से दादरी (46 किलोमीटर), मदार से पालनपुर (335 किलोमीटर) तथा सोननगर से दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन (137 किलोमीटर) के तीन खंड खोल दिये जाएंगे। इस प्रकार से 40 प्रतिशत डीएफसी यातायात के लिए खुल जाएगा।

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