किसान आंदोलन को बदनाम व विभाजित करने का सरकारी प्रयास बेहद निंदनीय : माले - Live Aaryaavart

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रविवार, 13 दिसंबर 2020

किसान आंदोलन को बदनाम व विभाजित करने का सरकारी प्रयास बेहद निंदनीय : माले

  • एआईकेएससीसी के आह्वान पर 29 दिसंबर को आयोजित राजभवन मार्च को माले का समर्थन
  • 15-28 दिसंबर तक किसान बचाओ-देश बचाओ अभियान के तहत किसान संघर्ष यात्रा 
  • किसान पंचायतों का होगा आयोजन, तीनों काले कृषि कानूनों के खिलाफ लिये जायेंगे प्रस्ताव
  • 18 दिसंबर को माले के पूर्व महासचिव काॅ. विनोद मिश्र स्मृति दिवस पर पटना में संकल्प सभा
  • विधायी कार्यों में कारगर हस्तक्षेप हेतु 19 दिसंबर को विधायकों की होगी कार्यशाला
  • नए साल में 50 हजार नए सदस्यों की भर्ती का लक्ष्य लिया गया.

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पटना 13 दिसंबर, भाकपा-माले की राज्य स्थायी समिति की एकदिवसीय बैठक पार्टी राज्य कार्यालय में संपन्न हुई. बैठक में मोदी सरकार द्वारा तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के चल रहे आंदोलन को बदनाम व विभाजित करने की कोशिशों की कड़ी निंदा की गई. सरकार समस्या को हल करने में अपनी विफलता से ध्यान हटाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रही है. जबकि उसका असली मकसद भारतीय व विदेशी कारपोरेट को बढ़ावा देना और देश की खेती-किसानी को बर्बाद करना है. भाकपा-माले किसान आंदोलन का तहेदिल से स्वागत व समर्थन करती है. बिहार में नीतीश सरकार के दावे के ठीक विपरीत कहीं भी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों का धान नहीं खरीदा जा रहा है. बिहार के किसान 800-900 रु. प्रति क्विंटल की दर से अपना धान बेचने को बाध्य हैं. हमारी पार्टी किसानों के केंद्रीय मुद्दों के साथ-साथ बिहार स्तरीय मुद्दों पर एआईकेएससीसी के आह्वान पर 29 दिसंबर को आयोजित राजभवन मार्च का तहेदिल से स्वागत व समर्थन करती है और अन्य दलों से भी समर्थन देने की अपील करती है. 29 दिसंबर के कार्यक्रम के पूर्व भाकपा-माले वे अखिल भारतीय किसान महासभा के संयुक्त आह्वान पर 15 दिसंबर से 28 दिसंबर तक राज्य में किसान बचाओ-देश बचाओ अभियान के तहत किसान संघर्ष यात्रा निकाली जाएगी. चट्टी-बाजारों पर नुक्कड़ सभाओं का आयोजन करके तीनों काले कृषि कानूनों व प्रस्तावित बिजली बिल 2020 की सच्चाई से किसानों को वाकिफ करवाया जाएगा.


हरेक गांव में किसान पंचायतों का भी आयोजन होगा और वहां से इन कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव पारित किये जाएंगे. पंचायतों से लिए गए प्रस्ताव को 29 दिसंबर के आयोजित राजभवन मार्च में राज्यपाल महोदय को सौंपा जाएगा. इस दौरान हरेक पंचायत में मोदी-अमित शाह का पुतला दहन करने का भी निर्णय लिया गया है. छात्र संगठन आइसा व युवा संगठन इनौस की राज्य कमिटियां पूरे राज्य में अंबानी-अडानी के सामानों, दुकानों, माॅल प्रतिष्ठान आदि के बहिष्कार का शांतिपूर्ण आंदोलन चलायेंगे और बाॅयकाट करेंगे. अंबानी-अडाणी के हाथों देश की खेती-किसानी को गिरवी रखना देश की जनता कभी स्वीकार नहीं करने वाली है. 18 दिसंबर को भारतीय नृत्य कला मंदिर में पार्टी के पूर्व महासचिव विनोद मिश्र के स्मृति दिवस पर बिहार चुनाव में हसिल उपलब्धियों को सुदृझ़ करने के लिए पार्टी का विस्तार, उसे मजबूत बनाने, फासीवाद की ताकतों के खिलाफ प्रतिवाद को तेज करने और उसका विस्तार करने के लिए चैतरफा पहलकदमी लेने हेतु संकल्प सभा का आयोजन किया जाएगा. इसमें राज्यस्तर के प्रमुख कार्यकर्ता भाग लेंगे. मुख्य वक्ता के बतौर पार्टी के महासचिव काॅ. दीपंकर भट्टाचार्य शामिल होंगे. 19 दिसंबर को पार्टी राज्य कार्यालय में विधायी कार्यों में पार्टी के कारगर हस्तक्षेप हेतु विधायकों और विधायक क्षेत्र के कार्यकर्ताओं की एक कार्यशाला आयोजित होगी. राज्य स्थायी समिति ने नए वर्ष में भाकपा-माले की 50 हजार सदस्यता और बढ़ाने का निर्णय किया. अभी पार्टी की सदस्यता तकरीबन 1 लाख है. इसे अगले वर्ष के अंत तक डेढ़ लाख कर लेने की योजना पर बात हुई. साथ ही यह भी तय हुआ कि नौजवानों, छात्रों, किसानों, स्कीम वर्करों, आशाकर्मियों, आंगनाबाड़ी, रसोइयों, ग्रामीण मजदूरों आदि तबकों के बीच संगठन का विस्तार किया जाएगा और इन तबकों में जनसंगठनों का संदस्यता अभियान चलाया जाएगा. युवा संगठन इनौस ने राज्य के कई प्रमुख इलाकों में युवा कन्वेंशन का आयोजन कर रही है.

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