बिहार : राज्यपाल से हस्तक्षेप करने की हम लोगों ने मांग - Live Aaryaavart

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मंगलवार, 19 जनवरी 2021

बिहार : राज्यपाल से हस्तक्षेप करने की हम लोगों ने मांग

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पटना. आज सूबे के राजद नेता तेजस्वी यादव ने नीतीश चाचा को पहले पूर्ण सम्मान दिया और कहा कि आदरणीय नीतीश जी, हम जानते है कि आप कमजोर मुख्यमंत्री है लेकिन फिर भी मैं हाथ जोड़कर विनती करता हूँ कि कुर्सी के लालच में निर्दोष बिहारियों की बलि मत दिजीए. सत्ता संरक्षित सुशासनी गुंडों द्वारा गाजर-मूली की तरह आम आदमी को काटा जा रहा है और आप बेबस है? उसके बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और अन्य नेताओं के साथ राजभवन चले गये.महामहिम राज्यपाल फागू चौहान के द्वार पर जाकर चाचा की नाकामयाबियों की पोल खोल कर रख दी.बाजाप्ता नीतीश जी की एक एक खामियों का उजागर किया. उन्होंने बिहार की बदहाल कानून व्यवस्था के मुद्दे पर महामहिम राज्यपाल से मुलाक़ात कर ज्ञापन सौंपा है. बिहार में सरकार का इक़बाल ख़त्म हो चुका है. अपराधी बेखौफ होकर आपराधिक घटनाओं को अंजाम दे रहे है.ऐसे में प्रदेश की जनता भयभीत है. राज्यपाल से हस्तक्षेप करने की हम लोगों ने मांग की है.


बिहार में विगत कुछ दिनों में लूट,चोरी,डकैती,रंगदारी, बलात्कार एवं हत्या की घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि हुई है.राज्य के मुखिया श्री नीतीश कुमार से जब बढ़ते अपराध पर सवाल किए जाते हैं तो उनके पास सिर्फ एक ही जवाब होता है -2005 से पहले क्या स्थिति थी? जवाब के बदले मीडिया से सवाल करते हैं. हालांकि नीतीश कुमार के दावों से इतर बिहार पुलिस के आंकड़े कुछ और ही स्पष्ट बया करते हैं.बिहार पुलिस के अधिकारिक बेवसाइट पर 2005 से पहले यानी के 2004 में अपराध के कुल 1,15,216 मामले दर्ज हुए थे जबकि इनके शासनकाल के 15 वर्ष बाद वर्ष 2019 में अपराध के आंकड़े बढ़ कर 2,69,096 हो गए है.इससे स्पष्ट है कि नीतीश राज में राजद के शासन काल के मुकाबले अपराध दुगुने से भी ज्यादा बढ़े है और नीतीश कुमार जुमले गढ़ने,रटने तथा मनगढ़ंत इतिहास खोदने में लगे हैं. एनसीआरबी डाटा के अनुसार वर्ष 2020 में 3138 हत्या तथा 1450 बलात्कार की घटना घटी है.आश्चर्यजनक है कि अपराध की प्रकृति वीभत्स से वीभत्स रूप ले चुका है.इनके नाक के नीचे दिन दहाड़े अपराधियों द्वारा सरेआम सड़क पर हत्याएं हो रही है और पुलिस प्रशासन मुकदर्शक बन बैठा है.भारत सरकार का डाटा बिहार में अपराध के बारे में कुछ इस प्रकार कहता है..वर्ष 2005 में संज्ञेय अपराध 1,04,778 और 2019 में 2,69,096 था.वर्ष 2005 में बलात्कार 973 और 2019 में 1450,वर्ष 2005 में अपहरण 2,566 और 2019 में 10925 और वर्ष 2005 में डकैती 1,310 और 2019 में 2046 था. रूपेश सिंह हत्या के पांच-छह दिन बीत जाने के बाद भी अपराधी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है.बहुत ही दुखद पहलू यह है कि बिहार पुलिस के काम करने के तरीके में बहुत पतन हो चुका है.मुजफ्फरपुर बालिका कांड हो, पटना आश्रयगृह कांड,नवरूणा कांड, गोपालगंज जे.पी.चौधरी हत्याकांड या वर्तमान में चर्चित रूपेश सिंह हत्याकांड,राज्य की पुलिस दोषियों को दंड देने के बजाय निर्दोष को फंसाने एवं प्रमाणों और साक्ष्य को मिटाने में लग जाती है उसके बाद सीबीआई को जांच सौंप दी जाती है.सीबीआई जांच में राज्य में पुलिस द्वारा उचित सहयोग नहीं दी जाती है.


महामहिम,मुख्यमंत्री जी रोज यह बयान देकर बैठ जाते हैं कि बिहार में कानून का राज है.पुलिस प्रशासन का चरित्र पूरी तरह संदेहास्पद हो चुका है.सवाल सिर्फ कानून राज का नही,अपराधों की ईमानदारी से निष्पक्ष जांच का,पुलिस -अपराधी सांठ-गांठ तोड़ने का है.सत्तापक्ष द्वारा अपराधियों का संरक्षण देने,प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष ढंग से बचाने में ही लगे रहते हैं.नीतीश सरकार अपराध कम करने के बजाए अपराध को छुपाने ,दबाने,निर्दोंषों को फंसाने और सुशासन का भ्रम पैदा करने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाने में लगी रहती है.अपराध कम दिखाने के लिए पुलिस एफआईआर तक दर्ज नहीं करती है.अगर दबाव में केस दर्ज कर भी लेती है तो जांच के दौरान हत्या,बलात्कार की घटना को ही कमतर कर दिखाने में लगी रहती है,दोषियों को सजा नहीं दिलाती है. हमारी मांग है कि रूपेश सिंह हत्याकांड की जांच का जिम्मा अविलम्ब सीबीआई को सौंपा जाए.वरना राज्य की पुलिस साक्ष्यों को विनष्ट कर देगी और हमेशा की तरह बड़ी मछलियों को बचाने के लिए छोटी मछलियों को बलि का बकरा बना देगी. जदयू के प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि1990 से 2005 तक का दौर बिहार के कानून व्यवस्था के लिए सबसे बुरा दौर था. जातीय हिंसा, सामूहिक नरसंहार के दौर से बिहार को निकालकर मुख्यमंत्री @NitishKumar जी ने बिहार में कानून का राज स्थापित किया. @yadavtejashwi को उस दौर से इस दौर की तुलना करने का जोखिम नहीं उठाना चाहिए. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार को जातीय हिंसा, सामूहिक नरसंहार, इलाकाई क्षत्रपों, वाहनों से बंदूकों की नलियां निकलने को स्टेटस सिंबल माने जाने वाले दौर से बाहर निकालकर बिहार में कानून का राज स्थापित किया. राजद शासन के जंगलराज की बदनामी को पूरी दुनिया में बिहार ने झेला है. लालू/राबड़ी शासन में कोई बाहरी बिहार आने से डरता था और शाम होते ही पूरे प्रदेश में सन्नाटा पसर जाता था.एनसीआरबी के ताजा आंकड़ों के अनुसार संगे अपराध के मामले में बिहार देश में 23वें स्थान पर है. साल-दर-साल बिहार में घटते अपराध के आंकड़े इसकी गवाही देते हैं. आज बिहार में कोई भी, कभी भी, कहीं भी आ-जा सकता है. पेशेवर, व्यापारी और सैलानी बिहार आ-जा रहे हैं.

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