मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के काफिले पर हमला - Live Aaryaavart

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सोमवार, 4 जनवरी 2021

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के काफिले पर हमला

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रविवार को रांची जिले के ओरमांझी इलाके में एक युवती का सर कटा शव मिला था। उसके साथ दुष्‍कर्म की आशंका जताई गई है। युवती का सर अभी तक नहीं मिला है। उसके गुप्‍तांग को भी तहस-नहस कर दिया गया था। शरीर पर एक भी कपड़ा मौजूद नहीं था। बताया जा रहा है कि आक्रोशित लोग आज इसी घटना के विरोध में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि सीएम के काफिले के आने के पहले से ही प्रदर्शनकारी एकजुट होने लगे थे। जैसे ही सीएम का कारकेड वहां पहुंचा, प्रदर्शनकारी सड़क पर आ गए। वे ओरमांझी में हुई दुष्‍कर्म-हत्या की घटना को लेकर सीएम से बात करना चाहते थे। उनका कहना था कि हेमंत सोरेन के एक साल के कार्यकाल में दुष्‍कर्म की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। पुलिस प्रशासन का तंत्र लचर अवस्‍था में है। बताया गया कि प्रोजेक्ट भवन से जब सोमवार की शाम मुख्यमंत्री अपने कारकेड के साथ अपने आवास के लिए निकले, तो किशोरगंज चौक के पास युवाओं के हुजूम ने उन्हें घेर लिया। इनमें महिलाओं की भी काफी तादाद थी। सीएम के वाहन के आगे चल रहे विशेष सुरक्षा सवारों के वाहन के साथ तोड़फोड़ की गई। बैरीकेड को तोड़ दिया गया। हालांकि सीएम सुरक्षित हैं। उन्हें दूसरे मार्ग से उनके आवास तक पहुंचाया गया। सोमवार शाम रांची के किशोरगंज में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के काफिले को रोकने की कोशिश की। इस दौरान काफिले को एस्कॉर्ट कर रहे यातायात थाना गोंदा के थानेदार इंस्पेक्टर नवल किशोर सिंह गंभीर रूप से जख्मी हो गए। उन्हें बेहतर इलाज के लिए मेडिका अस्पताल में भर्ती कराया गया है। भीड़ के आक्रोश को देखते हुए मुख्यमंत्री के काफिले को हरमू रोड में भारत माता चौक के पास से डायवर्ट कर बड़ा तालाब, मेन रोड, कचहरी चौक होते हुए मुख्यमंत्री आवास ले जाया गया। घटना शाम लगभग छह बजे की है। बताया जाता है कि रांची के किशोरगंज चौक के पास विभिन्न क्षेत्रों के करीब 150 महिला-पुरुष दुष्कर्म और हत्या की घटना के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए अपराधियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे। यहां भीड़ में शामिल लोग ओरमांझी में एक दिन पूर्व एक युवती की दुष्कर्म के बाद गला काटकर हत्या कर दिए जाने की घटना से आक्रोशित थी। इसी बीच शाम शाम करीब 5.55 बजे मुख्यमंत्री का काफिला हरमू रोड से होकर मुख्यमंत्री आवास के लिए गुजर रहा था। आगे-आगे रास्ता क्लियर कराने की जिम्मेदारी यातायात गोंदा के थानेदार नवल किशोर सिंह पर थी। यातायात गोंदा के थानेदार नवल किशोर सिंह ने जैसे ही किशोरगंज चौक पर पहुंचकर भीड़ को हटाने की कोशिश की, भीड़ उनपर टूट गई। इसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए। बीच-बचाव करने वाले पुलिसकर्मियों को भी चोट आई है। उधर, किशोरगंज चौक का माहौल बिगडऩे पर मुख्यमंत्री के काफिले को किशोरगंज चौक के पहले भारत माता चौक से डायवर्ट कर बड़ा तालाब के बगल से मेन रोड ले जाया गया, जहां से कचहरी चौक होकर वे मुख्यमंत्री आवास पहुंचे। सीएम के काफिले के पीछे-पीछे विधानसभा अध्यक्ष का काफिला भी था। किशोरगंज पर बवाल को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष का काफिला किशोरगंज मुहल्ले से होकर पहाड़ी मंदिर के रास्ते रातू रोड पहुंचा, जहां से उन्हें कांके रोड स्थित आवास ले जाया गया। किशोरगंज चौक पर भीड़ इस कदर आक्रोशित थी कि हर आने-जाने वालों को रोक रही थी। कुछ वाहनों में उग्र लोगों ने तोडफ़ोड़ भी की। जब काफिला गुजर गया तो भीड़ जबरन चौक के आसपास की दुकानों को बंद कराने लगी। तब तक एएसपी कोतवाली मुकेश कुमार लुनायत भी पहुंच गए। देखते ही देखते भारी संख्या में पुलिस बल पहुंच गया और भीड़ को नियंत्रित किया। पुलिस जवानों की संख्या बढऩे पर भीड़ तितर-बितर हो गई। घटनास्थल पर डीसी छवि रंजन, एसएसपी सुरेंद्र कुमार झा, एसपी यातायात अजीत पीटर डुंगडुंग सहित भारी संख्या में थानेदार व पुलिसकर्मी पहुंच गए थे। भीड़ के चलते हरमू रोड जाम हो गया था, जिसे खाली कराने में करीब एक घंटे लगे। झारखंड मुक्ति मोर्चा ने मुख्यमंत्री के काफिले को रोकने और पुलिसकर्मियो पर हमले को कायराना कार्रवाई बताया है। महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य और विनोद पांडेय ने कहा कि यह एक सुनियोजित षड्यंत्र है। कुछ लोग कानून को अपने हाथ में लेना चाहते हैं। पुलिस कर्मियों पर हमला करना, गाडिय़ों को क्षतिग्रस्त करना निंदनीय है। गड़बड़ी फैलाने की मंशा रखने वाले लोग असफल होंगे। झामुमो नेताओं ने आरोप लगाया कि यह विरोधियों का षड्यंत्र है और वे इसका अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहें। लोकतंत्र में विरोध करने का सबको हक है, लेकिन विधि-व्यवस्था को हाथ में लेने की मानसिकता गलत है। प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री के काफिले को लक्ष्य बनाना गलत है। घटना में शामिल लोगों की अविलंब गिरफ्तारी की जाए। पुलिस छानबीन में लगी हुई है, जल्द मामले का खुलासा हो। इसमें शिथिलता बरतने वाले पुलिस अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। मुख्यमंत्री के काफिले को निशाना बनाने की घटना कतई बर्दाश्त करने योग्य नहीं है। घटना एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है। कानून को हाथ में लेने का अधिकार किसी को नहीं है। सरकार दोषियों को चिह्नित कर अविलंब गिरफ्तार करे।

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