खिलौना मेला आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम : मोदी - Live Aaryaavart

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा I ह्रदय राखि कौसलपुर राजा II, हरिजन जानि प्रीति अति गाढ़ी। सजल नयन पुलकावलि बाढ़ी॥, मंगल भवन अमंगल हारी I द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी II, हरि अनंत हरि कथा अनंता I कहहि सुनहि बहुबिधि सब संता II, दीन दयाल बिरिदु संभारी । हरहु नाथ मम संकट भारी।I, माता पिता की सेवा करें....बुजुर्गों का ख्याल रखें...अपनी प्रतिभा और आचरण से देश का नाम रौशन करें...

शनिवार, 27 फ़रवरी 2021

खिलौना मेला आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम : मोदी

toy-industries-make-india-self-dependent-modi
नयी दिल्ली 27 फरवरी, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि देश के खिलौना उद्योग में बहुत बड़ी ताकत छिपी हुई है और इसे बढाकर अपनी पहचान बनाने तथा आत्मनिर्भर अभियान में बड़ा योगदान देना जरूरी है। श्री मोदी ने शनिवार को पहले खिलौना मेला का वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया। कोरोना महामारी के कारण देश में पहली बार आयोजित यह मेला भी पूरी तरह से वर्चुअल है। प्रधानमंत्री ने कहा , “ आप सभी से बात करके ये पता चलता है कि हमारे देश खिलौना उद्योग में कितनी बड़ी ताकत छिपी हुई है। इस ताकत को बढ़ाना, इसकी पहचान बढ़ाना, आत्मनिर्भर भारत अभियान का बहुत बड़ा हिस्सा है। ” उन्होंने कहा कि यह खिलौना मेला केवल एक व्यापारिक या आर्थिक कार्यक्रम भर नहीं है यह देश की सदियों पुरानी खेल और उल्लास की संस्कृति को मजबूत करने की एक कड़ी है। मेले में कारीगरों और स्कूलों से लेकर बहुराष्ट्रीय कंपनिययों के साथ साथ 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 1,000 से अधिक लोग अपनी प्रदर्शनी लगा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा , “ आप सभी के लिए ये एक ऐसा मंच होने जा रहा है जहां आप खिलौनों के डिजायन, नवाचार, प्रौद्योगिकी से लेकर मार्केटिंग पैकेजिंग तक चर्चा परिचर्चा भी करेंगे, और अपने अनुभव साझा भी करेंगे। टॉय फेयर 2021 में आपके पास भारत में ऑनलाइन गेमिंग उद्योग और ई-स्पोर्ट उद्योग के ईको सिस्टम के बारे में जानने का अवसर होगा।” प्रधानमंत्री ने कहा, “ खिलौनों के क्षेत्र में भारत में परंपरा भी है और प्रौद्योगिकी भी है, भारत के पास कंसेप्ट भी हैं, और कंपीन्टेंस भी है। हम दुनिया को इको फ्रेन्डली खिलौना की ओर वापस लेकर जा सकते हैं, हमारे साफ्टवेयर इंजीनियर कंप्यूटर गेम्स के जरिए भारत की कहानियों को, भारत के जो मूलभूत मूल्‍य हैं उन कथाओं को दुनिया तक पहुंचा सकते हैं। लेकिन इस सबके बावजूद, 100 बिलियन डॉलर के वैश्विक खिलौना बाजार में आज हमारी हिस्सेदारी बहुत ही कम है। देश में 85 प्रतिशत खिलौने बाहर से आते हैं, विदेशों से मंगाए जाते हैं।” 

कोई टिप्पणी नहीं: