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मंगलवार, 16 मार्च 2021

बैंकों की हड़ताल का बिहार में भी दिखा असर

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पटना 15 मार्च, केंद्र सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का निजीकरण करने की नीति के विरोध में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स के आह्वान पर सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के बैंकों की दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल के कारण बिहार में बैंकिंग सेवा ठप रही। बिहार के सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के 40 हजार बैंककर्मी सोमवार को पहले दिन हड़ताल में रहे। बैंकों का निजीकरण करने की नीति के विरोध में बैंककर्मियों ने शाखाओं के सामने धरने पर बैठकर प्रदर्शन किया। पटना में स्टेट बैंक की अंटा घाट शाखा के सैकड़ों बैंककर्मियों ने  सड़क पर प्रदर्शन किया। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ एसोसिएशन के  बैंककर्मियों ने कामकाज को ठप करने के बाद नारेबाजी की। इसी तरह राज्य के लगभग सभी जिले में भी शाखा के बाहर  कर्मी इकट्ठे हुए। पटना में कोटक महिन्द्रा, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, एक्सिस सहित निजी क्षेत्र के कई बैंक पूरी तरह से बंद  रहे। औंरंगाबाद, सारण, सीवान, गया, जहानाबाद, सहरसा, सुपौल सहित अन्य जिलों  में भी निजी क्षेत्र के बैंककर्मियों ने हड़ताल के समर्थन में कामकाज नहीं किया। इस दौरान ऑटोमेटेड ट्रेलर मशीन (एटीएम) के बाहर भी सन्नाटा पसरा रहा। हड़ताल के कारण चेक क्लियरेंस नहीं होने से बिहार में करोड़ों रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है। यूनाइडेट फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स के आह्वान पर नौ  यूनियनों द्वारा दो दिवसीय (15 और 16 मार्च) हड़ताल की जा रही है।  बैंकों की इस हड़ताल का बीमा कंपनी के कर्मियों ने भी समर्थन दिया है। नेशनल  इंश्योंरेंस कंपनी लिमिटेड, यूनाइटेड इंश्योरेंस कंपनी इंडिया और  न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के क्षेत्रीय कार्यालयों के बाहर भी कर्मी  हड़ताल का समर्थन करते नजर आए। इस बीच  बैंक इम्प्लॉयीज फेडरेशन, बिहार के अध्यक्ष बी. प्रसाद ने कहा कि  राष्ट्रीयकृत बैंकों, स्टेट बैंक और निजी क्षेत्र के बैंकों के लगभग 10  हजार कार्यालयों-शाखाओं में कामकाज पूर्ण रूप से बंद रहा। हड़ताली  कर्मचारियों ने मुजफ्फरपुर, गया, नवादा, भागलपुर, छपरा और दरभंगा शहर में  रैली आयोजित कर बैंकों के निजीकरण के खिलाफ नारे लगाए। फेडरेशन के महासचिव जे. पी. दीक्षित ने बैंक कर्मियों, पदाधिकारियों एवं  ग्राहकों को पहले दिन की हड़ताल को सफल बनाने में सहयोग के लिए धन्यवाद दिया और कहा  कि वह देश के नागरिकों से अपील करता हूं कि वह सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों  के निजीकरण के दुष्परिणाम को समझने का प्रयास करें। जनता भी हड़ताल के  समर्थन में बाहर निकलें।






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