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सोमवार, 26 अप्रैल 2021

बक्सर : कोविड संक्रमितों के इलाज में आ रही दिक्कतों का जायजा लिया

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बक्सर. भाकपा-माले की जांच टीम ने बक्सर के कोविड डेडिकेटेड अस्पताल का दौरा करके कोविड से लड़ने में आ रही परेशानियों के कारणों को जानने-समझने की कोशिश की. माले के डुमरांव विधायक कॉमरेड अजीत कुमार सिंह, इनौस के जिला संयोजक धर्मेन्द्र सिंह, नीरज यादव की टीम ने कोविड अस्पताल का दौरा किया.अस्पतालों का दौरा करके कोविड संक्रमितों के इलाज में आ रही दिक्कतों का जायजा लिया. माले विधायक अजीत कुमार सिंह ने अस्पताल का दौरा करने के उपरांत कहा है कि इन अस्पताल में आधारभूत संरचनाओं से लेकर मानव संसाधनों का अभाव है.बक्सर कोविड अस्पताल में कोरोना मरीजों के 54 बेड उपलब्ध हैं. आज इसमें 15 बेड की बढ़ोतरी की गई है.ऑक्सीजन युक्त बेड और ICU की तत्काल व्यवस्था करने की जरूरत है.डाॅक्टरों व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के साथ-साथ दवाइयों का भी अभाव है.ऐसी स्थिति में इस महामारी का मुकाबला कैसे किया जा सकता है? यह बिहार सरकार को बताना चाहिए कि विगत एक साल में उसने इस दिशा में कौन से ठोस प्रयास किए हैं? अस्पताल प्रबंधक से बात करने पर यह बात उभरकर सामने आई कि नीचे के अस्पतालों की खराब स्थिति के कारण माहौल लगातार बिगड़ता जा रहा है. नीचे के अस्पतालों में अभी तक सरकार कोरोना संक्रमितों के इलाज के काम को आरंभ नहीं कर सकी है. इन अस्पतालों की जर्जर व दयनीय स्थिति देखकर जनता सीधे पटना भागती है. ऐसे में पटना के अस्पतालों पर भारी दबाव आ जा रहा है. सही समय पर इलाज अथवा आॅक्सीजन नहीं मिलने के कारण पटना आते-आते रोगियों की स्थिति गंभीर हो जाती है और उन्हें बचाना कठित होता जा रहा है. यदि नीचे के अस्पतालों की व्यवस्था को सरकार सुधारे और दवाइयों व आॅक्सीजन की न्यूनतम व्यवस्था कर दे तो स्थिति को तत्काल नियंत्रण में लाया जा सकता है. प्राइवेट अस्पतालों में रोगियों को भारी पैसा खर्चा करना पड़ रहा है और जब उनका पैसा खत्म हो जाता है, तो उन्हें अस्पताल प्रबंधन रेफर कर देता है.इसलिए, हमारी मांग है कि सरकार प्राइवेट अस्पताल में कोरोना मरीजों पर आ रहे खर्च का वहन खुद करे ताकि प्राइवेट अस्पताल मरीजों पर कोई दबाव न बना सकें. कोविड की जांच का मामला बहुत ही धीमा है, जिसके कारण स्थिति और गंभीर होते जा रही है. सरकार को चाहिए कि कोविड की जांच की रफ्तार को बढ़ाने के लिए तत्काल आवश्यक कदम उठाये और इस बात की गांरटी करे कि 24 घंटे के भीतर जांच रिपोर्ट आ जाए ताकि सही समय पर रोगियों का इलाज आरंभ हो सके और कोरोना संक्रमण की दर को रोका जा सके.

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