सज्जाद ज़हीर चेयर प्रोफैसर पर गलत तरीके से नियुक्त - Live Aaryaavart

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रविवार, 4 अप्रैल 2021

सज्जाद ज़हीर चेयर प्रोफैसर पर गलत तरीके से नियुक्त

  • जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में सज्जाद ज़हीर चेयर प्रोफैसर पर गलत तरीके से नियुक्ति व यूनिवर्सिटी मेंटीनेंस फंड का गलत इस्तेमाल

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जामिया मिल्लिया यूनिवर्सिटी में मास कम्युनिकेशन की मौजूदा आफिशियेटिंग डायरैक्टर प्रोफैसर शोहिनी घोष हैं। प्रोफैसर शोहिनी घोष 2007 से चेयर प्रोफैसर बनी हुई हैं। 2007 से 2009 तक वह ज़ाकिर हुसन चेयर प्रोफैसर रहीं। 2009 में फिर वह सज्जाद ज़ाहिर चेयर प्रोफैसर बनीं और आज तक इसी पद पर बनी हुई हैं। उनकी सज्जाद ज़हीर चेयर पर नियुक्ति के संबंध में पीएम पोर्टल के माध्यम से शिकायत की गई जिसका Grievance No. PMOPG/E/2020/1012627 था। जहां तक मुझे पता है प्रोफैसर शोहिनी घोष आज तक जितनी बार भी डायरैक्ट/नार्मल प्रोफैसर के लिए अप्लाई किया वह हर बात सिलैक्शन कमेटी के ज़रिए अस्वीकार/रीजैक्ट कर दी गई। इस संबंध में यूनिवर्सिटी से सवाल पूछा गया था कि जामिया आर्डिनेंस में साफ तौर पर लिखा है कि कोई भी व्यक्ति चेयर प्रोफैसर पर पहले तीन साल और फिर दो साल यानी कुल पांच साल तक रह सकता है। चेयर प्रोफैसर पर रहते हुए तीसरे साल के अंत में वाइस चांसलर के ज़रिए बनाई गई कमेटी के ज़रिए उसके कामकाज का आंकलन किया जाएगा। इस सवाल के जबाब में यूनिवर्सिटी ने लिखा है कि वह रिटायरमेंट तक सज्जाद ज़हीर चेयर प्रोफैसर रहेंगी। प्रोफैसर शोहिनी घोष ने जितनी बार भी नार्मल प्रोफैसर बनने के लिए अप्लाई किया वह सिलैक्शन कमेटी के ज़रिए अस्वीकार कर दी गईं। सवाल यह है जब वह आज तक नार्मल प्रोफैसर नहीं बन सकीं तो वह पिछले 13-14 सालों से चेयर प्रोफैसर कैसे हैं?क्या प्रोफैसर शोहिनी घोष एक अपवाद है? क्या ऐसा प्रावधान यूनिवर्सिटी के दूसरे प्रोफैसर के लिए भी है?  आखिर यूनिवर्सिटी प्रोफैसर शोहिनी घोष पर इतनी मेहरबान क्यों है? प्रोफैसर शोहिनी घोष ने प्रोफैसर रहते हुए पीएचडी पूरी करने के लिए स्टडी लीव लिया था। प्रोफैसर शोहिनी की स्टडी लीव को लेकर भी यूनिवर्सिटी से सवाल किया गया था। जिसके जबाब में यूनिवर्सिटी ने लिखा है कि प्रोफैसर शोहिनी घोष 16/7/2011 से 17/2/2014 तक स्टडी लीव पर थी। यूनिवर्सिटी के जबाब से साफ तौर पर लगता है कि यह कोई बड़ा वित्तीय घोटाला है। यह स्टडी लीव 2 साल 7 महीने के लिए लिया गया था जबकि जामिया आर्डिनेंस के पेज-18 पर साफ तौर से लिखा है कि कोई भी प्रोफैसर सिर्फ Sabbatical Leave ले सकता है जोकि एक बार में एक साल और अपनी पूरी सर्विस में मैक्सिमम दो साल के लिए ले सकता है। आखिर रूल को बाइ पास करते हुए प्रोफैसर शोहिनी घोष को 2 साल 7 महीने का स्टडी लीव कैसे दिया गया। यह स्टडी लीव पे होता है। ऐसे में सात साल की सर्विस पूरी करने के बाद जब प्रौफैसर के लिए Sabbatical Leave  का प्रावधान है तो प्रोफैसर शोहिनी घोष को 2 साल 7 महीने का स्टडी लीव क्यों दिया गया\क्या यह एक सरकारी फंड का मिस यूज नहीं हैं\क्या यह एक वित्तीय घोटाला नहीं है कि यूनिवर्सिटी ने रूल को बाइ पास करते हुए प्रोफैसर शोहिनी घोष को 2 साल 7 महीने का स्टडी लीव दिया।


पीएम पोर्टल के माध्यम से जिन सवालों का स्पष्टीकरण मांगा गया था वह नीचे दिए गए हैं।

1. 1990 में प्रोफैसर शोहिनी घोष को बिना किसी अनुभव के डायरैक्ट रीडर के पद पर नियुक्त किया गया था। क्या 1990 में कोई भी व्यक्ति डायरैक्ट रीडर बन सकता था, अगर नही तो वह बिना किसी अनुभव के डायरैक्ट रीडर कैसे बनीं? यूनिवर्सिटी से इस सम्बंध में पीएम पोर्टल के माध्यम से प्रश्न किया गया था जिसके जबाब में यूनिवर्सिटी ने लिखा है कि प्रोफैसर शोहिनी घोष को 1990  में सिलैक्शन कमेटी के ज़रिए उपयुक्त पाया गया था जिसकी वजह से उन्हें डायरैक्ट रीडर बना दिया गया।

2. जहां तक मुझे पता है प्रोफैसर शोहिनी घोष आज तक जितनी बार भी डायरैक्ट/नार्मल प्रोफैसर के लिए अप्लाई किया वह हर बात सिलैक्शन कमेटी के ज़रिए अस्वीकार/रीजैक्ट कर दी गई। प्रोफैसर शोहिनी घोष को 2007-2009 तक ज़ाकिर हुसैन चेयर प्रोफैसर बनाया गया। इसके बाद उन्हें 2009  में सज्जाद ज़हीर चेयर प्रोफैसर बनाया गया और वह आज तक इसी पद पर बनी हुई हैंA इस संबंध में यूनिवर्सिटी से सवाल पूछा गया था कि जामिया आर्डिनेंस में साफ तौर पर लिखा है कि कोई भी व्यक्ति चेयर प्रोफैसर पर पहले तीन साल और फिर दो साल यानी कुल पांच साल तक रह सकता है। चेयर प्रोफैसर पर रहते हुए तीसरे साल के अंत में वाइस चांसलर के ज़रिए बनाई गई कमेटी के ज़रिए उसके कामकाज का आंकलन किया जाएगा। इस सवाल के जबाब में यूनिवर्सिटी ने लिखा है कि वह रिटायरमेंट तक सज्जाद ज़हीर चेयर प्रोफैसर रहेंगी। प्रोफैसर शोहिनी घोष ने जितनी बार भी नार्मल प्रोफैसर बनने के लिए अप्लाई किया वह सिलैक्शन कमेटी के ज़रिए अस्वीकार कर दी गईं। सवाल यह है जब वह आज तक नार्मल प्रोफैसर नहीं बन सकीं तो वह पिछले 13-14 सालों से चेयर प्रोफैसर कैसे हैं?क्या प्रोफैसर शोहिनी घोष एक अपवाद है? क्या ऐसा प्रावधान यूनिवर्सिटी के दूसरे प्रोफैसर के लिए भी है?  आखिर यूनिवर्सिटी प्रोफैसर शोहिनी घोष पर इतनी मेहरबान क्यों है?

3. सज्जाद ज़हीर चेयर प्रोफैसर को लेकर भी यूनिवर्सिटी से सवाल किया गया था कि यूनिवर्सिटी को इस चेयर के लिए किन-किन सालों में फंड मिला और क्या अभी भी इस चेयर को फंड मिल रहा है? इसके जबाब में यूनिवर्सिटी ने लिखा है कि सज्जाद ज़हीर चेयर को अलग से कोई फंड नहीं मिलता है बल्कि इस चेयर को यूनिवर्सिटी मेंटीनेंस फंड से चलाया जाता है। आपके माध्यम से मेरा यूनिवर्सिटी से जानना है कि जब इस चेयर को फंड ही कहीं से नहीं मिलता है तो इसे यूनिवर्सिटी मेंटीनेंस फंड से चलाने की ज़रूरत क्या है? आखिर बार-बार प्रोफैसर शोहिनी घोष को स्पेशल ट्रीटमेंट क्यों दिया जा रहा है? क्या यह यूनिवर्सिटी मेंटीनेंस फंड का गलत इस्तेमाल नहीं है


Page 216, Chair Professor, Ordinance & Regulation (Academics)

Ordinance 29 (A) Chair Professor

 1. The Majlis – i – Muntazimah (Executive Council) may, out of a panel of at least three persons recommended to it by the Search Committee so constituted by the Shaikhul Jamia (Vice Chancellor), offer the position of a “Chair Professor” to an outstanding scholar in the rank of Professor and above or a person of academic/professional eminence including a person with R & D experience. Provided that, if the position of “Chair Professor” is explicitly created for specified discipline, area or an expertise, then only those persons who satisfy the requisite expertise as stated and notified by the funding agency shall be eligible for the said offer.


2. A “Chair Professor” shall initially be appointed for a period of three years, which may be extended by another two years, subject to a review at the end of the third year by a Committee so constituted by the Vice Chancellor Provided that no person shall be appointed or continued as "Chair Professor" on his/ her attaining the age of 70 years. However, in exceptional cases, keeping in view the professional and scholarly eminence as evident from research output, publications, national/ international fellowships, academic awards of national/ international repute and experience of institution building and ability to actively contribute to the development of the university, a person may be appointed as 'Chair Professor' beyond the age of 70 but in no case be continued on attaining the age of 75 years.


4.   प्रोफैसर शोहिनी घोष ने पीएचडी के लिए स्टडी लीव लिया थाA प्रोफैसर शोहिनी की स्टडी लीव को लेकर भी यूनिवर्सिटी से सवाल किया गया था। जिसके जबाब में यूनिवर्सिटी ने लिखा है कि प्रोफैसर शोहिनी घोष 16/7/2011 से 17/2/2014 तक स्टडी लीव पर थी। यूनिवर्सिटी के जबाब से साफ तौर पर लगता है कि यह कोई बड़ा वित्तीय घोटाला है। यह स्टडी लीव 2 साल 7 महीने के लिए लिया गया था, जबकि जामिया आर्डिनेंस के पेज-18 पर साफ तौर से लिखा है कि कोई भी प्रोफैसर सिर्फ Sabbatical Leave ले सकता है जोकि एक बार में एक साल और अपनी पूरी सर्विस में मैक्सिमम दो साल के लिए ले सकता है। उनकी स्टडी लीव को लेकर मेरे मन में कुछ सवाल हैं। आखिर रूल को बाइ पास करते हुए प्रोफैसर शोहिनी घोष को 2 साल 7 महीने का स्टडी लीव कैसे दिया गया? यह स्टडी लीव पे होता है। ऐसे में सात साल की सर्विस पूरी करने के बाद जब प्रौफैसर के लिए Sabbatical Leave का प्रावधान है तो प्रोफैसर शोहिनी घोष को स्टडी लीव 2 साल 7 महीने के लिए कैसे दिया गया? क्या यह एक सरकारी फंड का मिस यूज नहीं हैं? क्या यह एक वित्तीय घोटाला नहीं है कि यूनिवर्सिटी ने रूल को बाइ पास करते हुए प्रोफैसर शोहिनी घोष को 2 साल 7 महीने का स्टडी लीव दिया? 


Ordinance (Administrative/General) on Page-18

Ordinance Page-18 14. Sabbatical Leave (i) Permanent, whole time teachers of the university who have completed seven years of service as Lecturer Selection Grade/Reader or Professor, may be granted sabbatical leave to undertake study or research or other academic pursuit solely for the object of increasing their proficiency and usefulness to the university and higher education system. (ii) The duration of leave shall not exceed one year at a time and two years in the entire career of a teacher . (iii) A teacher who has availed himself/herself of study leave, would not be entitled to the sabbatical leave.


इन पाइंट्स के क्लैरिफिकेशन के लिए यूनिवर्सिटी से जबाब के लिए मेल किया गया था मगर अभी तक यूनिवर्सिटी ने स्पष्टीकरण नहीं दिया है। आपसे विनती है कि कृपा करके इस मैटर का संज्ञान लें।

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