बिहार : कोरोना के मरीजों को नहीं लिखी जाएगी रेमडेसिविर इंजेक्शन - Live Aaryaavart

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा I ह्रदय राखि कौसलपुर राजा II, हरिजन जानि प्रीति अति गाढ़ी। सजल नयन पुलकावलि बाढ़ी॥, मंगल भवन अमंगल हारी I द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी II, हरि अनंत हरि कथा अनंता I कहहि सुनहि बहुबिधि सब संता II, दीन दयाल बिरिदु संभारी । हरहु नाथ मम संकट भारी।I, माता पिता की सेवा करें....बुजुर्गों का ख्याल रखें...अपनी प्रतिभा और आचरण से देश का नाम रौशन करें...

गुरुवार, 22 अप्रैल 2021

बिहार : कोरोना के मरीजों को नहीं लिखी जाएगी रेमडेसिविर इंजेक्शन

no-remdesivir-price-in-bihar
पटना : बिहार में कोरोना से जारी मौत के बीच पिछले कई दिनों से रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर मारामारी चल रही है। कोरोना मरीजों को देने के लिए यह इंजेक्शन नहीं मिल रहा है और परिजन इंजेक्शन के लिए अस्पताल से लेकर दवा दुकानों तक खाक छानते फिर रहे हैं। अब पटना के एनएमसीएच अस्पताल ने इसको लेकर बड़ा फैसला किया है। वहीं इंडियन मेडिकल काउंसिल ने भी प्रेस रिलीज जारी कर रेमडेसीविर के इस्तेमाल को लेकर आवश्यक जानकारी दी है. एनएमसीएच के अधीक्षक डॉ. विनोद सिंह ने आदेश जारी कर दिया है कि कोविड मरीजों के लिए रेमडेसिविर इंजेक्शन की उपयोगिता नहीं है। अधीक्षक डॉ. सिंह ने डब्ल्यूएचओ का हवाला देते हुए सभी चिकित्सकों को आदेश दिया है कि अभी से कोई डॉक्टर कोविड मरीजों के लिए रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं लिखेंगे , क्योंकि डब्लूएचओ ने इसकी उपयोगिता को नकार दिया है। इस बात की पुष्टि रिसर्च में भी हो चुकी है कि यह इंजेक्शन कोविड की रोकथाम के लिए कारगर नहीं है। इसके बावजूद इसे लेकर पैनिक क्रिएट हो रहा है और परिजन परेशान हो रहे हैं। दरअसल इस इंजेक्शन को लेकर लगातार बिहार में भी हाय तौबा मची हुई है और एक एक मरीज के लिए डॉक्टर 07 से 08 इंजेक्शन देने का पर्चा लिख रहे हैं। दूसरी तरफ इंजेक्शन का मिलना मुश्किल है। इंजेक्शन की जमकर कालाबाजारी भी हो रही है। पीड़ित लोग 15 से 25 हजार में एक फाइल खरीद रहे हैं। इससे पहले शोध में यह भी साबित हो चुका है कि इस इंजेक्शन की एआरडीएस रोकने में कोई भूमिका नहीं है। डॉक्टरों की माने तो यह इंजेक्शन ऑक्सिजन लेवल घटने अर्थात 90 से नीचे आने पर ही दी जाती है ताकि मरीज की जान बचाई जा सके। अब एनएमसीएच के अधीक्षक डॉ. सिंह के पत्र के बाद चर्चा है कि स्वास्थ्य विभाग भी इससे सम्बंधित शीघ्र आदेश जारी करेगा और चिकित्सकों को इसे लिखने की सलाह न देने की अपील करेगा। वहीं इंडियन मेडिकल काउंसिल ने भी कहा है कि रेमेडीसिविर नाम की दवा का कोविड 19 रोगियों की मृत्यु को कम करने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसका केवल कुछ रोगियों में बीमारी की गंभीरता को कम करने के लिए चिकित्सक की निगरानी में उपयोग होता है. आइएमए ने कहा है कोविड लक्षणों वाले रोगियों को इम्यूनिटी बढ़ाने वाले पौष्टिक भोजन, भाप और श्वसन संबंधी व्यायाम इस बीमारी के तकलीफ को कम करने में मदद करते हैं. बताया गया है कि ज्यादातर कोविड संक्रमित लोग बिना लक्षण के अथवा साधारण लक्षण युक्त होते हैं जिनका इलाज डॉक्टरों द्वारा बताये गये कुछ दवाओं से होम आइसोलेशन में हो सकता है. जबतक कोई डॉक्टर सलाह नहीं दें तब तक अस्पताल में भरती होने की जरूरत नहीं है. साथ ही कहा गया है कि सही मास्क का प्रयोग, हाथ को बार बार धोना, दो गज की दूरी एवं टीकाकरण के द्वारा ही इस बीमारी पर काबू पाया जा सकता है.

कोई टिप्पणी नहीं: