बिहार : 1 जुलाई को जनसम्मेलन के जरिए अभियान की होगी शुरूआत - Live Aaryaavart

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा I ह्रदय राखि कौसलपुर राजा II, हरिजन जानि प्रीति अति गाढ़ी। सजल नयन पुलकावलि बाढ़ी॥, मंगल भवन अमंगल हारी I द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी II, हरि अनंत हरि कथा अनंता I कहहि सुनहि बहुबिधि सब संता II, दीन दयाल बिरिदु संभारी । हरहु नाथ मम संकट भारी।I, माता पिता की सेवा करें....बुजुर्गों का ख्याल रखें...अपनी प्रतिभा और आचरण से देश का नाम रौशन करें...

गुरुवार, 24 जून 2021

बिहार : 1 जुलाई को जनसम्मेलन के जरिए अभियान की होगी शुरूआत

  • बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था के खिलाफ भाकपा-माले का स्वस्थ बिहार-हमारा अधिकार अभियान
  • जल्द ही कोविड काल में हुई मौतों की सूची बनाने का काम कर लिया जाएगा पूरा.
  • तीन महीने के अंदर सबके लिए कोविड वैक्सीन के टीके की गारंटी करे सरकार.

cpi-ml-press-confrence-patna
पटना 23 जून, कोविड की दूसरी लहर ने बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है. यदि यह व्यवस्था ठीक होती, तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी. स्वास्थ्य का मुद्दा आज एक व्यापक जनसरोकार के मुद्दे के रूप में स्थापित हुआ है. भाकपा-माले बिहार की जर्जर व बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को बदलने के लिए स्वस्थ बिहार-हमारा अधिकार अभियान चलाएगी. 1 जुलाई से इस अभियान की शुरूआत होगी. वर्चुअल मेथड से इस मुद्दे को लेकर उस दिन एक व्यापक जनसम्मेलन का आयोजन किया जाएगा. इस जनसम्मेलन में चिकित्सा पेशे से जुड़े लोगों की व्यापक भागीदारी की कोशिश की जाएगी. आईएमए, डाॅक्टर, नर्स, आशाकर्मियों, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कार्यकर्ताओं और आम लोगों को इस अभियान से जोड़कर बिहार में एक व्यापक स्वास्थ्य आंदोलन का निर्माण किया जाएगा. स्वास्थ्य ढांचों में सुधार को लेकर 22 जून को पूरे राज्य में कोविड प्रोटोकाॅल का पालन करते हुए अस्पतालों के सामने प्रदर्शन भी किया गया. इस आंदोलन को एक राज्यव्यापी आंदोलन बनाया जाएगा. कोविड वैक्सीनेशन मामले में बिहार सरकार द्वारा 6 महीने में 6 करोड़ लोगों को टीका उपलब्ध कराने की घोषणा कोविड की तीसरी लहर को नहीं रोक सकता. सरकार को तीन महीने के भीतर सबके टीका की व्यवस्था की गारंटी करनी होगी. जहां से भी हो, और जैसे संभव हो सरकार इसकी व्यवस्था करे. देश के बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं की साझी अपील पर कोविड-19 और अन्य सन्दर्भों में मारे गए लोगों का शोक मनाने का एक बड़ा अभियान चल रहा है. सरकारें चाहती हैं कि हम इन मौतों को भूल जायें, लेकिन हम हर एक मौत पर सवाल पूछेंगे और हिसाब लेंगे. गांव-गांव मारे गए लोगांे के परिजनों से बातचीत और उनका दुख जानने का प्रयास किया जा रहा है. 27 जून को पूरे राज्य में एक बार फिर से ‘अपनों की याद’ कार्यक्रम को गांव-गांव संगठित किया जाएगा. इसमें कोविड काल में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी जाएगी. हमारी कोशिश है कि इस कार्यक्रम में देश के बड़े बुद्धिजीवियों को भी शामिल किया जाए. इसे लेकर प्रख्यात लेखिका अरूंधति राय से भी बातचीत चल रही है. यह कार्यक्रम हर रविवार को होगा.


कोविड काल में हुई मौतों की सूची बनाने का कार्य जारी है, अभी तक कुछ जिलों से जांच की एक प्राथमिक रिपोर्ट भी मिली है. भोजपुर, पटना, अरवल, जहानाबाद, सिवान, बक्सर और दरभंगा से आई प्राथमिक जांच रिपोर्ट सरकार के झूठ का पर्दाफाश करती है. हमारी पार्टी अस्पतालों का भी एक सर्वेक्षण अभियान चला रही है. यह रिपोर्ट हम जल्द ही बिहार सरकार को सौंपेगे. हमारी मांग है कि पटना उच्च न्यायालय अपनी देखरेख में मौतों की जांच कराए. कोविड काल में हुई हर एक मौत के लिए सरकार पर 4 लाख रु. मुआवजा देने का दबाव बनायेंगे और इसे आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बनाया जाएगा. भोजपुर में हुई जांच के मुताबिक जिले की लगभग आधी पंचायतों का सर्वे संपन्न हो चुका है. 107 पंचायतों के 247 गांवों की जांच में कोविड लक्षण से 1424 लोग मारे गए हैं. 178 अन्य मौतें हुई हैं. इस प्रकार कुल 1602 मौतों का आंकड़ा सामने आया है. इसमें कोविड की जांच महज 178 लोगों की हुई थी. एक भी व्यक्ति को अबतक मुआवजा नहीं मिला है. इस प्रोजेक्शन के आधार पर देखें तो भोजपुर जिले में कम से कम 3000 और पूरे राज्य में एक लाख से अधिक मौतें हुई हैं. दूसरी ओर, भोजपुर का सरकारी आंकड़ा महज 102 मौतें दिखला रहा है. जाहिर है कि सरकार मौत घोटाला कर रही है. जांच रिपोर्ट पूरी आ जाने के बाद सरकार का झूठ और बेनकाब होगा. अगिआंव विधानसभा के अंतर्गत सरकारी अस्पतालों की जांच की रिपोर्ट बिहार में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की कलई खोल देता है. विधानसभा में प्रखंड स्तर पर दो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और तीन अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है. पंचायत स्तर पर 41 स्वास्थ्य उपकेंद्र हैं. इन 41 स्वास्थ्य उपकेंद्रों में से मात्र 17 के पास सरकारी भवन हैं, जो काफी दयनीय स्थिति में हैं. डाॅक्टर, नर्स, अन्य स्वास्थ्यकर्मियों व मेडिकल सुविधाओं का घोर अभाव है. ऐसी लचर स्वास्थ्य व्यवस्था आखिर कोविड के हमले को कैसे झेल सकती है? 30 जून को पेट्रोल-डीजल व अन्य खाद्य पदार्थांे के दाम में बेतहाशा मूल्य वृद्धि के खिलाफ वाम दलों के आह्वन पर जिलास्तरी पर आंदोलन किया जाएगा. किसान संगठनों के आह्वान पर 26 जून को खेती बचाओ-लोकतंत्र बचाओ दिवस के रूप में मनाने के निर्णय का हमारी पार्टी समर्थन करते हुए अपनी कमिटियों से इसे सफल बनाने की अपील करती है.

कोई टिप्पणी नहीं: